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सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य | Emperor Ashoka Interesting Facts

सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य | Emperor Ashoka Interesting Facts

चक्रवर्ती सम्राट अशोक (संस्कृत: अशोकः ) (ईसा पूर्व 304 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य

Emperor Ashoka Interesting Facts

सम्राट अशोक (273 ई.पू.-232 ई.पू.)

Emperor Ashoka Interesting Facts In Hindi

  1. अशोक का जन्म 304 ई.पू. मे पाटलिपुत्र में हुआ था। 

  2. चक्रवर्ती अशोक सम्राट बिन्दुसार तथा रानी सुभद्रंगी का पुत्र था।

  3. बिन्दुसार की मृत्यु के उपरान्त अशोक मौर्य साम्राज्य का शासक बना। 

  4. एक शासक के रूप में सम्राट अशोक विश्व इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है। 

  5. सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाईयों का वध करके मौर्य साम्राज्य का सिंहासन प्राप्त किया था। 

  6. बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक का राज्याभिषेक बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 218 वर्ष बाद हुआ था। 

  7. अभिलेखों एवं साहित्यिक ग्रंथों में सम्राट अशोक को 'देवनाम प्रियदर्शी' कहा गया है। 

  8. अशोक ने अपने राज्याभिषेक के नवें वर्ष (260 ई. पू.) में कलिंग पर आक्रमण करके उस पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। 

  9. कुछ इतिहासकारों के अनुसार कलिंग को जीतना आवश्यक था, क्योंकि दक्षिण के साथ सीधे संपर्क के लिए एक स्वतंत्र राज्य के समुद्री और स्थल मार्ग पर नियंत्रण होना जरूरी था।

  10. कौटिल्य (चाणक्य) के अनुसार कलिंग साम्राज्य हाथियों के लिए प्रसिद्ध था। इन्हीं हाथियों को प्राप्त करने के लिए अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया था। 

  11. कलिंग के हाथी गुफा अभिलेख से प्रकट होता है कि अशोक के कलिंग आक्रमण के समय कलिंग पर 'नन्दराज' नाम का कोई राजा राज्य कर रहा था। 

  12. कलिंग युद्ध तथा उसके परिणामों के विषय में अशोक के तेरहवें शिलालेख में विस्तृत जानकारी दी गई है। 

  13. अशोक के अभिलेखों से यह स्पष्ट होता है कि उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (अफगानिस्तान), दक्षिण में कर्नाटक, पश्चिम में काठियावाड़ और पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत था। 

  14. पुराणों में सम्राट अशोक को 'अशोक वर्द्धन' कहा गया है। राजगद्दी पर बैठने के समय अशोक अवन्ती का राज्यपाल था। 

  15. हेनसांग के अनुसार अशोक ने श्रीनगर की स्थापना की, जो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर की राजधानी है। 

  16. अशोक ने नेपाल में ललितपाटन नामक नगर का निर्माण करवाया था। दिव्यावदान से पता चलता है कि अशोक के समय तक बंगाल मौर्य साम्राज्य का अंग था। 

  17. ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा के दौरान बंगाल में अशोक द्वारा निर्मित स्तूप देखा था। 

  18. कल्हण द्वारा रचित ग्रंथ राजतरंगिणी के अनुसार अपने जीवन के प्रारंभ में अशोक शैव धर्म का उपासक था। 

  19. बौद्ध ग्रंथों के अनुसार कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया।

  20. बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान के अनुसार उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया। 

  21. अशोक का बौद्ध होने का प्रमाण उसके (वैराट-राजस्थान) लघु शिला लेख से प्राप्त होता है, जिसमें अशोक ने स्पष्टत : बुद्ध, धम्म और संघ का अभिवादन किया है।


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  23. अशोक के शासनकाल में 250 ई. पू. में बौद्ध धर्मावलम्बियों को पुनर्गठित करने के लिए बौद्ध परिषद् का तीसरा महासम्मेलन आयोजित किया गया।

  24. कलिंग युद्ध की विभीषिका(आतंक) ने अशोक के मन को बुरी तरह झकझोर दिया क्योंकि इस युद्ध का कलिंग के लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा।

  25. युद्ध की नृशंसता और व्यापक हिंसा को देखकर अशोक हदय पश्चाताप से भर गया। परिणामस्वरूप उसने आक्रमण और विजय की नीति त्याग कर धर्मघोष की नीति का अनुसरण किया। 

  26. अशोक के धर्म का उद्देश्य एक ऐसी मानसिक प्रवृत्ति की आधारशिला रखना था, जिसमें सामाजिक उत्तरदायित्व की एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति के प्रति व्यवहार को अत्यधिक महत्वपूर्ण समझा गया। 

  27. अशोक के धर्म में महिमा को स्वीकृति प्रदान करने और समा के क्रियाकलापों में नैतिक उत्थान की भावना का संचार करने का आग्रह था। 

  28. अशोक का धर्म वस्तुतः विभिन्न धर्मों का समन्वय है। वह नैतिक आचरणों का एक संग्रह है, जो 'जियो और जीने दो' की मूल पद्धति पर आधारित था। 

  29. इसमें कोई सन्देह नहीं है कि अशोक का व्यक्तिगत धर्म बौद्ध धर्म ही था। लेकिन यह भी सच है कि अशोक सभी धर्म का आदर करता था और सभी पंथों एवं संप्रदायों के नैतिक मूल्यों के बीच पायी जाने वाली एकता में विश्वास करता था। 

  30. रोमिला थापर ने अशोक के धर्म की तुलना अकबर के 'दीन-ए-इलाही' से की है। उनके शब्दों में, अशोक का धर्म औपचारिक धार्मिक विश्वासों पर आधारित सद्कार्यों से प्रसूत नैतिक पवित्रता तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह सामाजिक दायित्व बोध से भी प्रेरित था।

  31. वस्तुतः यह कहा जा सकता है कि अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए अशोक ने जिन आचारों की संहिता प्रस्तुत की उसे उसके अभिलेखों में धर्म कहा गया है। 

  32. अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर ऐसे अनेक कमजोर शासक आसीन हुए, जो मौर्य साम्राज्य की प्रतिष्ठा को बचा पाने में असमर्थ सावित हुए। 

  33. अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य के उत्तराधिकारियों का क्रम इस प्रकार है- मुजाल, दशरथ, संप्रति, शलिशुक, देववर्मन और सतधनवा। 

  34. मौर्य साम्राज्य का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या करने के पश्चात् उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ई.पू में शुंग वंश की स्थापना की।

  35. सम्राट अशोक को शासन में सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रिपरिषद् को व्यवस्था थी। प्रमुख मंत्रियों को तीर्थ कहा जाता था। 

  36. कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार 18 तीर्थ थे। सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ या महामात्य, मंत्री और पुरोहित थे। 

  37. कौटिल्य ने मौर्य प्रशासन के लिए संप्रग सिद्धांत का प्रतिपादन किया था, जिसमें राजा, अमात्य, मित्र, कोष, दुर्ग, सेना तथा देश शामिल थे। 

  38. मौर्य शासन राजतंत्रात्मक, वंशानुगत, ज्येष्ठाधिकारिता देव के ग्रथों तथा निरंकुशता पर आधारित था। 

  39. मौर्य साम्राज्य में केन्द्रीय शासन की व्यवस्था की। 

  40. अशोक के अभिलेखों से साम्राज्य के पांच प्रान्तों में विभक्त होने का संकेत मिलता है एवं केन्द्रीय प्रशासन का प्रांतों पर नियंत्रण होने का उल्लेख मिलता है।

  41. मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और वाणिज्य पर आधारित थी, जिन्हें सम्मिलित रूप से 'वार्ता' के नाम से जाना जाता था।

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