द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम (Consequences of Second World War in Hindi)

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द्वितीय विश्व युद्ध के प्रमुख परिणाम | Major Consequences of Second World War

आज के इस पोस्ट में द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम के बारे में जानेंगे। द्वितीय विश्व युद्ध के बीज प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति पर ही बो दिए गए थे। द्वितीय विश्व युद्ध 1 सितम्बर 1939 को प्रारंभ हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध का प्रमुख कारण साम्राज्यवाद बना। प्रत्येक राष्ट्र अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता था। जर्मनी की बढती शक्ति से आशंकित होकर अन्य देश गुट का निर्माण करने लगे और इस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार होने लगी।

इसके अलावा और भी तात्कालिक कारण थे जिसके कारण द्वितीय विश्व युद्ध हुआ। इस युद्ध के अनेक परिणाम सामने आये। इस पोस्ट में आज हम द्वितीय विश्व युध्द के परिणाम के बारे में जानने वाले हैं।

द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 से 1945 तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग 70 देशों की थल-जल-वायु सेनाएँ इस युद्ध में सम्मलित थीं।

द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम (Consequences of Second World War in Hindi)


     स्वतंत्रता

    • इस युद्ध के पश्चात् औपनिवेशिक (colonial) साम्राज्यों का अन्त हो गया।
    • विश्वयुद्ध में साम्राज्यवादी एवं उपनिवेशवादी शक्तियां कमजोर पड़ गई। फलतः उनके उपनिवेशों में स्वतंत्रता आंदोलन ने जोर पकड़ लिया।
    • ब्रिटेन ने अपनी विदेश नीति में परिवर्तन कर भारत, पाकिस्तान, बर्मा, मिस्त्र सहित अफ्रीका के कुछ देशों को स्वतंत्र कर दिया।
    • हॉलैंड ने भी अपने उपनिवेश को स्वतंत्र घोषित किया एवं हिंदेशिया नामक संघ अस्तित्व में आया, जिसमें जावा, सुमात्रा, बोर्नियों आदि द्वीप शामिल थे

     शीतयुद्ध

    • परमाणु बम का विकास हुआ एवं विश्व के अनेक भागों में मजबूत नौसैनिक अड्डे स्थापित हुए।
    • युद्धोपरान्त ग्रेट ब्रिटेन का साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया एवं अब वह विश्व नेता नहीं रह सका।
    • युद्ध पश्चात् अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच पर अमेरिका एवं सोवियत रूस के रूप में जो दो महाशक्तियां उदित हुई वे दोनों अलग-अलग विचाराधाराओं का प्रतिनिधित्व करती थीं। एक तरफ अमेरिका पूंजीवादी व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता था, वहीं सोवियत रूस साम्यवादी विचारों का।
    • अलग-अलग विचाराधारा वाले देशों के मध्य विभिन्न मुद्दों पर पर्याप्त मतभेद थे। यद्यपि इन दोनों के बीच मतभेद इतने चरम पर था कि युद्ध न होते हुए भी तनाव वैमनस्य के रूप में आरोप-प्रत्यारोप और परस्पर विरोधी राजनीतिक प्रचार का संघर्ष आरंभ हुआ। यह संघर्ष आमतौर पर 'शीतयुद्ध' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
    • सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवाद के प्रसार से संबंधित मुद्दों पर पूर्वी जर्मनी, हंगरी, रूमानिया, लिथुआनिया आदि देशों का एक पृथक गुट बन गया।
    • इस तरह समाजवादी प्रभाव में पूर्वी यूरोप का एक सोवियत समर्थक गुट बना, जबकि दूसरी तरफ पश्चिमी गुट के रूप में पूंजीवादी समर्थक देशों का एक गुट बना। 
    • संपूर्ण यूरोप दो गुटों में बंट गया तथा ये दोनों गुट अमेरिकी एवं रूम के दिशा-निर्देशों से संचालित होने लगे।
    >>द्वितीय विश्व युद्ध की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

     माल्टा सम्मेलन

    • माल्टा सम्मेलन के निर्णय के अनुसार, जर्मनी को चार भागों में विभाजित कर उसे अमेरिका, रूस, ब्रिटेन एवं फ्रांस के अधिकार क्षेत्र में शामिल कर दिया गया।
    • यह व्यवस्था मूल रूप से जर्मनी को जनतांत्रिक स्वरूप प्रदान करते हेतु प्रदान की गयी। इस व्यवस्था ने 1949 में एक नवीन रूप धारण कर लिया जब अमेरिका, ब्रिटेन एवं फ्रांस के अधीन जर्मन क्षेत्र पश्चिमी जर्मनी के रूप में संगठित हुए। इस पश्चिमी जर्मन क्षेत्र में "जर्मन संघीय गणराज्य" स्थापित हुआ।
    • 1949 को सोवियत संघ के प्रभाव वाले जर्मन क्षेत्र पूर्वी जर्मनी के रूप में संगठित हुए। पूर्वी जर्मनी का यह क्षेत्र "जर्मन जनतांत्रिक संघ" के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

     मानवाधिकार का युग

    • द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् विश्व शांति की स्थापना एवं विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया।
    • 1945 में सैन फ्रांसिस्को नामक सम्मेलन में इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की गई।
    • संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा की गई मानवाधिकारों की प्रसिद्ध घोषणा के फलस्वरूप मानवाधिकार के युग की शुरूआत हुई।

     साम्यवाद के अंत की शुरुआत

    • द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् कई प्रादेशिक संगठनों का विकास हुआ जैसे-साम्यवाद के प्रसार को रोकने हेतु शुरूआत हुई।
    • अमेरिका के नेतृत्व में नाटों सेंटो, सिएटो, बगदाद पैक्ट आदि जैसे सुरक्षात्मक संगठनों की स्थापना कीइसी तरह सोवियत संघ ने 'वारसा पैक्ट' नामक सुरक्षात्क संगठनों की स्थापना की।
    • इन विभिन्न प्रादेशिक संगठनों की स्थापना के फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सैन्यवाद एवं शस्त्रीकरण की होड़ में तीव्र वृद्धि हुई तथा भय एवं तनाव का माहौल भी उत्पन्न हुआ।

     आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना

    • द्वितीय विश्वयुद्ध के क्रम में जापानी सैन्य बलों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अंग्रेजी फौज के जिन भारतीय सैनिकों को युद्धबन्दी बनाया था।
    • उन्हें सुभाष चन्द्र बोस जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी से संगठित कर 'आजाद हिन्द फौज' नामक प्रसिद्ध दस्ते का निर्माण किया था।
    • आज़ाद हिन्द फ़ौज की सहायता से भारत में ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी गई थी। अतः द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात भारत में भी व्यापक हलचल देखी गई। जिसके परिणामस्वरूप भारत की स्वतंत्रता संभव हो पाई।
    >>प्रथम विश्वयुद्ध के परिणाम

     इजरायल का निर्माण

    • द्वितीय विश्वयुद्ध के परिणामस्वरूप इजरायल का निर्माण एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थी। 
    • प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् यहूदियों ने फिलिस्तीन में बसना आरंभ किया। 
    • संसार के विभिन्न क्षेत्रों से सारी संख्या में यहूदियों का आगमन इन क्षेत्रों में हुआ। इस क्षेत्र में यहूदियों के आगमन ने नई समस्याओं को जन्म दिया। 
    • अरबों एंव यहूदियो के बीच व्यापक दंगे होने लगे। इतना ही नहीं ब्रिटेन एवं अमेरिका के समर्थक से 1940 में इजराइल नाम से फिलिस्तीन में यहूदियों का राज्य कायम हो गया उसी समय से इजराइल एवं अरबों के मध्य तनाव एवं संघर्ष का अनवरत सिलसिला शुरू हुआ।

     वैज्ञानिक एवं तकनीकी खोज

    • द्वितीय विश्वयुद्ध के क्रम में सामरिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं तकनीकी खोज को पर्याप्त बढ़ावा मिला।
    • विज्ञान के क्षेत्र में होने वाले इस आशातीत प्रगति के रूप में जेट विमान, रडार, रेडियो, टेलीविजन आदि जैसे साधनों के विकास को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला।
    • इन क्षेत्रों में व्यापक पूंजी निवेश किय गया। 
    • युद्धकाल में प्लास्टिक, रेयान, हल्की मिश्र धातु, चमत्कारिक औषधियां आदि जैसे कृत्रिम पदार्थो का निर्माण महान उपलब्धियों कही जा सकती है।

    आज के पोस्ट में द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम के बारे में जाना। द्वितीय विश्व युद्ध से सम्बंधित प्रश्न प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

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