खाद क्या है? खाद के प्रकारों की पूरी जानकारी (Fertilizer in Hindi Full Details)

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खाद क्या है? खाद के प्रकारों की पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तों , आज के इस लेख में हम खाद क्या है? खाद के प्रकारों की पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से जानेंगे। खाद से मिट्टी को प्रचुर मात्रा में ह्यूमस मिलता है, और साथ ही अनेक प्रकार के पोषक प्रदार्थ भी प्राप्त होती है। जो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बड़ा देती है। खाद मिट्टी को प्राकृतिक और रासायनिक रूप से मिलता है। अगर एक किसान को यह पता हो कि कौन सा खाद कब उपयोग करना है तो उसके लिए कृषि करना बहुत ही आसान हो जायेगा। 

"पेड़-पोधों के पोषण और विकास के लिए जिस पदार्थों को दिया जाता है, उसे खाद कहते है।" खाद के सही उपयोग से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी। 


Fertilizer in Hindi Full Details

खाद के प्रकार (type of fertilizer) -

  1. प्राकृतिक खाद
    • गोबर की खाद
    • हरी खाद
    • वर्मी कम्पोस्ट खाद
    • कम्पोस्ट खाद
  2. रासायनिक खाद (उर्वरक)
    • जैविक उर्वरक
    • यूरिया खाद (Urea fertilizer)
    • डी.ए.पी. (DAP)
    • पोटाश

1. प्राकृतिक खाद (natural fertilizers)

गोबर की खाद

गोबर की खाद विभिन्न पशुओं जैसे— गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, सुअर, मुर्गी आदि के ठोस एवं द्रव मल-मूत्र को किसी पोषक पदार्थों जैसे - पुआल, भूसा, बिछावन आदि को मिलाकर तैयार करते हैं।

  • गोबर की खाद तीन मुख्य अवयवों से बनती है -
    1. पशुओं का गोबर
    2. पशुओं का मूत्र
    3. पशुओं का बिछावन
  • गोबर की खाद वैज्ञानिक ढंग से दो तरीके से तैयार की जाती है -
    1. ढेर में एकत्रित करना
    2. गड्ढे में भरना।
  • गोबर की सड़ी खाद को फसल की बुआई से एक महीना पहले खेत में छिड़क कर डाल दिया जाता है तथा हल से जुताई कर देनी चाहिए।

हरी खाद (Green Manure)

परिभाषा-बिना गले-सड़े हरे पौधों अथवा उनके भागों को जब भूमि में दबाया जाता है जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, हरी खाद कहलाता है।

  1. हरी खाद के महत्व-
    • पोषक तत्त्वों का संरक्षण
    • मृदा सतह का संरक्षण
    • उर्वरता का बढ़ना
    • फसलों के उत्पादन में वृद्धि
    • क्षारीय एवं लवणीय मृदाओं का सुधार
    • मृदा संरचना में सुधार
    • पोषक तत्त्वों की उपलब्धता बढ़ाना
    • खरपतवार की वृद्धि को रोकना
  2. हरी खाद की विधियाँ -
    • हरी खाद की सीटू विधि
    • हरी पत्तियों से हरी खाद
  3. हरी खाद के लिए फसलें विभिन्न फसलें हरी खाद के लिए उगायी जाती है; जैसे- सनई, लैंचा, मूंग, ज्वार, मटर, बरसीम, मेथी, सैंजी, मसूर, सरसों आदि।

वर्मी कम्पोस्ट खाद (Vermicompost)

परिभाषा - केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है।

जब केंचुआ वनस्पति और कचरे को खाकर विघटित क्र देता है तब एस खाद का निर्माण होता है। इसका निर्माण अब व्यापारिक स्तर पर किया जा रहा है। क्योंकि वर्मीकम्पोस्ट खाद फसल को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाती है।


पढ़ें- भारत की 10 प्रमुख फसलें।

कम्पोस्ट (Compost)

परिभाषा - पौधों के अवशेष, कूड़ा-करकट, मानव मल-मूत्र, पशुओं का गोबर आदि पर जीवाणु या फफूंदी द्वारा विशिष्ट परिस्थितियों में विच्छेदन से बनी खाद को कम्पोस्ट कहते हैं।

कम्पोस्ट बनाने की विधियाँ (Method of Composting) कम्पोस्ट बनाने की निम्न पाँच विधियाँ प्रचलित हैं -

  • इन्दौर विधि-इस विधि को हावर्ड व वाड नामक वैज्ञानिक ने विकसित किया।
  • बंगलौर विधि-इस विधि को बंगलौर में वैज्ञानिक सी० एन० आचार्य ने विकसित किया।
  • एडको विधि
  • उत्प्रेरित कम्पोस्ट विधि
  • कम्पोस्ट बनाने की आधुनिक विधि

2. रासायनिक खाद (उर्वरक- fertilizers)

जैविक उर्वरक (Bio-fertilizers)

परिभाषा- सूक्ष्म जीवों द्वारा बनने वाली खाद को जैविक उर्वरक कहते हैं।

  • जैविक उर्वरकों के अन्तर्गत राइजोबियम इनोकुलेट मुख्य है जिसे विभिन्न दलहनी फसलों में प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त नील हरित शैवाल जो मुख्यतः धान में प्रयोग किया जाता है।
  • अन्य जैविक उर्वरक में एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम व फॉस्फेट घोलक भी भूमि की उर्वरता को बढ़ाते हैं।
  • राइजोबियम कल्चर (Rhizobium culture) का प्रयोग दलहनी फसलों जैसे-मटर, सेम आदि फसलों में किया जाता है, जो नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती है। इससे फसलों में लगभग 66% वृद्धि होती है।
  • एजोटोबैक्टर का प्रयोग धान्य फसलों में किया जाता है।
  • एजोस्पिरिलम कल्चर का प्रयोग ज्वार, बाजरा आदि फसलों में किया जाता है।
  • नील हरित शैवाल या एजोला का प्रयोग धान की खेती में किया जाता है।

यूरिया खाद (Urea fertilizer)

यूरिया खाद मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बेहतर कर देती है और मिट्टी को नाइट्रोजन देती है। जिससे फसल की पैदावार बढ़ा सकती है। यह खाद सफ़ेद दानेदार के रूप में होती है।

यूरिया खाद का उपयोग फसल लगाने के 1 ½ -2 माह बाद किया जाता है।

डी.ए.पी. खाद

DAP का पूरा नाम diammonium phosphate होता है। इसमें 18% नाईट्रोजन तथा 46% फास्फोरस होता है।

आज के पोस्ट में हमने खाद क्या है? खाद के प्रकारों की पूरी जानकारी के बारे में विस्तार से जाना। यदि आप कृषि करते हैं या वानिकी से जुड़े  हुए हैं, तो आपके लिए यह पोस्ट बहुत ही उपयोगी साबित होगा क्यूंकि इस पोस्ट में विभिन्न खादों और उसके उपयोग के बारे में बताया गया है।

आशा करता हूँ कि खाद क्या है? खाद के प्रकारों की पूरी जानकारी की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें। 


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