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Latest: भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी 2022

भारत के राज्य और राजधानी | भारत के केंद्र शासित प्रदेश और राजधानी | States and Capitals of India | Union Territories and Capitals of India

नमस्कार, studypointandcareer.com में आपका स्वागत है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जबकि जनसंख्या के दृष्टिकोण से चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है।वर्तमान में भारत में कुल 28 राज्य और 8 केन्द्रशासित प्रदेश हैं।  सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को चलाने के लिए एक राजधानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे ही भारत के सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों की राजधानी है। जहाँ से सरकार अपना प्रशासन चलाती है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। 



 

List of Indian States, Union Territories and Capitals

List of Indian States, Union Territories and Capitals in Hindi

S.N.राज्य (State)राजधानी (Capital)
1आंध्रप्रदेशअमरावती
2अरुणाचल प्रदेशईटानगर
3असमदिसपुर
4बिहारपटना
5छत्तीसगढ़रायपुर
6गोवापणजी
7गुजरातगांधी नगर
8हरियाणाचण्डीगढ़
9हिमाचल प्रदेशशिमला
10झारखंडरांची
11कर्नाटकबेंगलुरु
12केरलतिरुवनंतपुरम
13मध्य प्रदेशभोपाल
14महाराष्ट्रमुंबई
15मणिपुरइम्फाल
16मेघालयशिलोंग
17मिज़ोरमआइज़ोल
18नागालैंडकोहिमा
19ओडिशाभुवनेश्वर
20पंजाबचण्डीगढ़
21राजस्थानजयपुर
22सिक्किमगैंगटोक
23तमिलनाडुचेन्नई
24तेलंगानाहैदराबाद
25त्रिपुराअगरतला
26उत्तरप्रदेशलखनऊ
27उत्तराखंडदेहरादून
28पश्चिम बंगालकोलकाता
भारत के केंद्र शासित प्रदेश और राजधानी
S.N.केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory)राजधानी (Capital)
1अंडमान और निकोबार द्वीपपोर्ट ब्लेयर
2चंडीगढ़चंडीगढ़
3दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीवदमन
4दिल्लीदिल्ली
5लद्दाखNA
6लक्षद्वीपकवरत्ती
7जम्मू और कश्मीरNA
8पुडुचेरीपुडुचेरी

भारतीय राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और राजधानियों की सूची 2022 हिंदी में

इस पोस्ट में हमने भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी के बारे में जाना। शासन अपने क्षेत्र में प्रशासन को चलाने के लिए एक स्थान का चयन करती है जहाँ से सभी प्रशासनिक कार्य संपन्न कराये जाते हैं, जिसे राजधानी कहा जाता है।

उम्मीद करता हूँ कि भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।

bharat ke rajya kendra shasit pradesh ki rajdhani | भारत के राज्य और राजधानी | भारत के केंद्र शासित प्रदेश और राजधानी | States and Capitals of India | Union Territories and Capitals of India

इंडियन आर्मी में पद और रैंक ( Posts and ranks in the Indian Army) 2023

इंडियन आर्मी में पद और रैंक ( Posts and ranks in the Indian Army)

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में इंडियन आर्मी में पद और रैंक के बारे में जानेंगे। भारत में आर्मी में भर्ती होने को लेकर युवाओं में एक अलग ही जूनून है। इंडियन आर्मी में भर्ती होने के लिए हर साल लाखो परीक्षार्थी तैयारी करते हैं। इंडियन आर्मी में पदोन्नति या भर्ती के माध्यम से अलग-अलग पद और रैंक दिए जाते हैं जिनकी शक्ति और वेतनमान में भी अंतर होता है। 

Posts and ranks in the Indian Army



TABLE OF CONTENT:-
  • भारतीय सेना की कमानें
  • नेशनल केडिट कोप्स  (N.C.C.-National Cadet Corps)
  • थल सेना प्रशिक्षण केंद्र
  • एअर फोर्स प्रशिक्षण केन्द्र
  • जल सेना प्रशिक्षण केन्द्र
  • हॉस्पिटल शिप्स
  • भारतीय वायुसेना के विमान 
  • भारतीय जहाजी बेड़े के जलयान
  • भारतीय सेना के टैंक 

 भारतीय सेना के तीनों अंगों के कमीशण्ड ऑफीसरों की पद श्रेणी

थल सेना- जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल, मेजर जनरल, ब्रिगेडियर, कर्नल, लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर, केप्टन, लेफ्टिनेंट ग्रुप 

वायु सेना- एअर चीफ मार्शल, एअर मार्शल, एअर वाइस मार्शल, एअर कमोडोर, केप्टन, विंग कमांडर, स्क्वाड्रन लीडर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट, फ्लाइंग ऑफीसर.

जल सेना- एडमिरल, वाइस एडमिरल, रीयर एडमिरल, कमोडोर, केप्टन, कमांडर, लेफ्टिनेंट कमांडर, लेफ्टिनेंट, सब-लेफ्टिनेंट.

पढ़ें- भारत के राष्ट्रपति।

भारतीय सेना की कमानें

भारतीय सेना की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है, यद्यपि सुरक्षा का उत्तरदायित्व मंत्रिमण्डल का है. संगठन की दृष्टि से निम्नलिखित प्रकार भारतीय सेना विभिन्न कमानों संगठित है-

थल सेना (Army)- थल सेना सात कमानों में संगठित है- पश्चिमी, पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी केन्द्रीय प्रशिक्षण और दक्षिणी-पश्चिमी. प्रत्येक कमान लेफ्टिनेंट जनरल की हैसियत के जनरल ऑफीसर कमाडिंग-इन-चीफ के अधीन होती है.

जल सेना (Navy)- यह सेना तीन कमानों में संगठित है- (1) वेस्टर्न नेवल क मुम्बई, (2) ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापत्तनम् तथा (3) सदर्न नेवल कमांड, कोचीन. - Official Website

वायु सेना (Air Force )- इसकी स्थापना सन् 1932 में हुई थी तथा आधुनिकीकरण सन् 1948 में प्रारम्भ हुआ. यह सात कमानों में संगठित है- 

  • वेस्टर्न कमांड, 
  • सेंट्रल एअर कमांड, 
  • ईस्टर्न एअर कमांड, 
  • ट्रेनिंग कमांड तथा
  • में कमांड, 
  • दक्षिण कमांड, 
  • दक्षिण-पश्चिम कमांड

Official Website 

नेशनल केडिट कोप्स  (N.C.C.-National Cadet Corps)

एन.सी.सी. का संगठन सन् 1948 में युवक-युवतियों में भारतीय प्रतिरक्षा में रुचि जाग्रत करने के लिए किया गया था. इसके तीन विभाग हैं :

(1) सीनियर विभाग, 

(2) जूनियर सामान्य ज्ञान 131 विभाग,

(3) लड़कियों के विभाग का संगठन पृथक् है. एन. सी. सी. के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

i) नौजवानों के व्यक्तित्व का विकास करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, 

ii) नौजवानों में भारतीय प्रतिरक्षा के प्रति रुचि पैदा करना,

iii) उनमें आत्मसंयम और अनुशासन पैदा करना, 

iv) आपातकालीन स्थिति में नागरिक सुरक्षा के लिए दल का निर्माण करना.


जानें- IPC की धाराओं का पूरा लिस्ट।

प्रादेशिक सेना

इसका संगठन प्रतिरक्षा की द्वितीय पंक्ति के रूप में सन् 1949 में किया गया. यह नागरिकों की सेना है और 18 से 35 वर्ष के शारीरिक रूप से स्वस्थ लोगों को इसमें भर्ती किया जाता है. प्रादेशिक सेना नागरिकों को पार्टटाइम में सैनिक शिक्षा प्रदान करने और -आपातकालीन परिस्थिति में देश की सेवा करने का अवसर प्रदान करती है. इसकी आर्मड् कोर, आर्टीलरी, इंजीनियर्स, सिगनल्स, इन्फेंटरी एवं मेडिकल कोर में वेतन और भत्ते मिलते हैं.

होमगार्डस्

अक्टूबर 1962 में चीनी आक्रमण के बाद इस संगठन का निर्माण किया गया. इसके कार्य हैं : (1) प्रतिरक्षा से सम्बन्धित आपातकालीन कार्य करना, (2) आन्तरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस की सहायता करना, (3) हवाई हमले, आग लगने व महामारी की हालत में नागरिकों की सहायता करना अनिवार्य सेवाओं, जैसे मोटर यातायात, इंजीनियरिंग, > आग बुझाना, ब्लैक आउट का संचालन करना। 

सीमा सुरक्षा बल (B.S.F.)

 इसे 1 दिसम्बर, 1965 में स्थापित किया गया था. यह सेना तथा पुलिस के बीच का संगठन है, जो संकट की स्थिति में सेना को सहायता प्रदान करता है। 


थल सेना प्रशिक्षण केंद्र (Army Training Center)

(1) नेशनल डिफेंस अकेडमी, खड़गवासला. 

(2) इण्डियन मिलिट्री अकेडमी, देहरादून. 

(3) राष्ट्रीय इण्डियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून 

(4) नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली. 

(5) डिफेंस सर्विसेज स्टॉफ कॉलेज, वैलिंगटन (तमिलनाडु).

(6) आर्मड् फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे. 

(7) ऑफीसर्स ट्रेनिंग स्कूल, चेन्नई (मद्रास).

(8) कॉलेज ऑफ काम्बैट, महून

(9) आर्मड् कोर सेंटर एण्ड स्कूल, अहमदनगर 

(10) इनफेंटरी स्कूल, महू व बेलगाम.

(11) स्कूल ऑफ आर्टीलरी, देवलाली 

(12) कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, किर्की.

(13) मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, महू. 

(14) इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मेनेजमेंट, सिकन्दराबाद

 (15) आर्मी केडेट कॉलेज, देहरादून

(16) आर्मी आर्डिनेन्स कोर स्कूल, जबलपुर.

(17) हाई आलटीट्यूड वारफेयर स्कूल, गुलमर्ग.

(18) आर्मी सर्विस कोर स्कूल, बरेली.

(19) ई. एम. ई. स्कूल, वड़ोदरा.

(20) मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिकन्दरावाद

(21) रिमाउण्ट एण्ड वेटेनरी कोर सेंटर एण्ड

पढ़ें- भारत के 20 राष्ट्रीय प्रतीकों की जानकारी।

एअर फोर्स प्रशिक्षण केन्द्र (air force training center)

(1) एअर फोर्स एडमिनिस्ट्रेटिव कॉलेज, कोयम्बटूर, 

(2) एअर फोर्स अकेडमी, हैदराबाद 

(3) एअर फोर्स टेक्निकल कॉलेज, जलाहली,

 (4) एअर फोर्स स्कूल सांबरा, वेलगाम,

 (5) फ्लाइंग इंस्पेक्टर्स स्कूल, तांबरम,

 (6) ऐलीमेंटरी फ्लाइंग स्कूल, बीदर,

 (7) फाइटर ट्रेनिंग एण्ड ट्रांसपोर्ट ट्रेनिंग विंग्स ऑफ दि एअर फोर्स, हाकिमपेट एवं येलहांका,

 (8) इंस्टी ट्यूट ऑफ एवीएशन मेडिसिन, बंगलुरू,

 (9) पैराटुपर्स ट्रेनिंग स्कूल, आगरा,

 (10) नेवीगेशन सिकन्दराबाद. एण्ड सिगनल्स स्कूल, हैदराबाद, 

(11) कॉलेज ऑफ एअर वारफेयर,सिंकदराबाद 

जल सेना प्रशिक्षण केन्द्र (Navy Training Center)

 (1) इण्डियन नेवल अकेडमी, कोचीन

 (2) आई. एन. एस. आंग्रे, मुम्बई.

 (3) आई. एन. एस. बलसुरा, जामनगर (गुजरात).

(4) नेवल एअर स्टेशन गरुड़, कोचीन.

(5) आई. एन. एस. वेन्दुरुथी, कोचीन. 

(6) आई. एन. एस. हमला, मुम्बई.

(7) आई. एन. एस. कुण्जली, मुम्बई. 

(8) आई. एन. एस. सिरकार्स, विशाखापत्तनम् (9) आई. एन. एस. शिवाजी, लोनावला (महाराष्ट्र).

(10) आई. एन. एस. चिलका, भुवनेश्वर.

(11) सेलर्स ट्रेनिंग एस्टेब्लिसमेंट डेबोलिम, गोआ. .

हॉस्पिटल शिप्स (hospital ships)

(1) आई. एन. एच. एस. संजीवनी, कोचीन. 

(2) आई. एन. एच. एस. अश्विनी, मुम्बई.

(3) आई. एन. एच. एस. कल्याणी, विशाखापत्तनम् 

(4) आई. एन. एच. एस. जीवन्ती, आ.

इन्हें भी पढ़ें - 

  1. भारत की प्रथम महिला लिस्ट
  2. पूर्व मध्यकालीन भारत की 33 खास बातें

भारतीय सेना के टैंक (Indian army tanks)

अस्त्र-शस्त्र वायुयान तथा जलयान भारतीय वायुसेना के पास भिन्न-भिन्न प्रकार के आधुनिकतम हथियार हैं, जिनमें बहुत से तो देश में ही बनाये जाते हैं. विजयन्त नामक टैंक, जिसका निर्माण स्थल आवडी है, भारत-पाक युद्ध (1971) में बहुत खरा उतरा. इसकी गति 65 किमी प्रति घंटा है और इसकी मारक क्षमता 67.2 किमी की है. दूसरे प्रकार का टैंक विकर्स (Vickers) है, जिसका निर्माण भारत में किया गया है.

अन्य प्रकार के टैंक जो भारतीय सेना के पास हैं, वे हैं (1) ए. एम. एक्स. 13 (फ्रेंच), (2) सेन्चूरियन (ब्रिटिश), . (3) पी. टी. -76 (रूसी), (4) टी-54 तथा 'टी-55 अर्जुन अर्जुन टैंक तैयार हैं. 8 अर्जुन टैंक वर्ष 2003-04 में सेना को आपूर्त कर दिए गए. इसके अतिरिक्त करना शुरू कर दी है. DRDO ने हल्के टैंक करण के उत्पादन हेतु कार्यवाही शुरू कर दी। 

अर्जुन टैंक- यह भारत का प्रमुख युद्धक टैंक है, जिसके निर्माण की योजना 1974 में बनाई गयी थी. यह 1400 अश्वशक्ति के टर्बो इंजन द्वारा चालित है. जनवरी 1996 में इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया.

 टी-90 एस भीष्म टैंक - यह एक अत्याधुनिक और तीसरी पीढ़ी का युद्धक टैंक है, जिसे 7 जनवरी, 2004 को चेन्नई में राष्ट्र को समर्पित किया गया. 

टैंक आधारित स्वचालित तोप 'भीम' - यह अर्जुन टैंक पर आधारित स्वचालित तोप है, जिसे डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है. इस पर बोफोर्स तोपों की तरह 155 मिमी की 52 कैलिबर वाली आर्टिलरी गन लगाई गई है, जो 20 सेकण्ड में तीन गोले 40 और 52.5 किमी दूर तक फेंक सकती है.

 अर्जुन मार्क-2 - रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन मार्क-1 में सुधार करके एमबीटी अर्जुन मार्क-2 विकसित किया है. पूर्णतया स्वदेशी युद्धक टैंक अपने नए अवतार के साथ और मजबूत हो गया है. इस नए अवतार में मिसाइल फायरिंग और सर्च लेजर प्रणाली को मजबूत किया गया है। 

भारतीय वायुसेना के विमान (Indian Air Force aircraft)

भारतीय वायुसेना के पास निम्नलिखित प्रकार के सैनिक विमान हैं

हंटर विमानों की भारतीय वायुसेना से विदाई 8 अक्टूबर, 2001 को हो गई है. फ्रांस से प्राप्त किए गए इन विमानों की भारतीय वायुसेना में अंतिम उड़ान 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में हुई. इन विमानों को 1957 में भारतीय में शामिल किया गया था. " 

(1) मिग-21 - रूसी डिजाइन का इंटरसेप्टर,

(2) सुखोई-7 - रूसी डिजाइन का इंटरसेप्टर बमवर्षक,

(3) नेट-भारत में ही बना हल्का लड़ाकू विमान, 

(4) एच. एफ. 24 ( मारूप ) - भारत में ही निर्मित 

(5) एचपी. टी- 2 - भारत में ही बना प्रशिक्षण विमान,

(6) पुष्पक--भारत में ही निर्मित अति हल्का विमान,

(7) कृषक - भारत में ही निर्मित 4 सीटों का विमान, 

(8) अलूउट- भारत में ही निर्मित हैलीकोप्टर,

(9) एच.जे.टी. - 16- बेसिक जैट ट्रेनर 

(10) एच. एस748- परिवहन विमान (भारत में ही निर्मित),

(11) अजीत - भारतीय लड़ाकू हवाई विमान नेट में संशोधन कर नए विमान का नाम अजीत रखा गया है, (12) मिराज-2000- फ्रांस से प्राप्त लड़ाकू विमान, जिसे बाद में भारत में ही तैयार किया जाएगा,

(13) जगुआर - यह भारत ने ब्रिटेन से खरीदे हैं,

(14) मिग-29 - ये विमान रूस के बने हैं, 

(15) गजराज - यह वायुसेना के भीमकाय नए ट्रांसपोर्ट विमान हैं,

(16) सुखोई-30 - रूसी डिजाइन का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, 

(17) लसर (हेलीकॉप्टर),

(18) तेजस (LCA)- स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान.

रुद्र - हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अपने ध्रुव हेलीकॉप्टर का आवश्य कतानुसार प्रोन्नयन कर तथा इसमें शस्त्र तैनात कर इसे भारतीय सेना की आवश्यकतानुसार बनाया गया है. हथियारों से लैस इन हेलीकॉप्टर को 'रुद्र' नाम दिया गया है. हाल (HAL) ने इसे 8 फरवरी, 2013 को थल सेना को सौंपा है.

 चालक रहित विमान - भारत द्वारा निर्मित 'निशांत' नाम के चालकरहित विमान को भी विकसित किया गया है, जिसका सफल परीक्षण भी कर लिया गया है. एक अन्य चालकरहित विमान 'लक्ष्य', जिसका निर्माण भारत में ही किया गया है, का सफल परीक्षण 2 नवम्बर, 2000 को किया गया. 'लक्ष्य' का एक और सफल परीक्षण ओडिशा के चाँदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण (ITR) केन्द्र से 3 जनवरी, 2007 एवं 5 मार्च, 2007 को किया गया। 

पढ़ें- भारत में प्रथम पुरुषों की सूची।

भारतीय जहाजी बेड़े के जलयान (Ships of the Indian Fleet)

(1) एअरक्राफ्ट कैरियर- आई. एन. एस. विराट, जोकि ब्रिटेन से क्रय किया गया है, विमानवाहक पोत है. भारत का दूसरा विमानवाहक जहाज रूस से प्राप्त किया जा रहा है। रूसी विमानवाहक जहाज ‘एडमिरल गोर्शकोव’ के क्रय हेतु भारत और रूस के बीच समझौता हो चुका है।

 (2) क्रूजर- आई. एन. एस. मैसूर, आई. एन. एस. दिल्ली, आई. एन. एस. मुम्बई. 

(3) विध्वंसक - आई. एन. एस. राजपूत, रणजीत, गोमती, गोदावरी, गंगा. – 

(4) पनडुब्बियाँ - खंधेरी, करंज, कलवेरी, कुरसुरार. ये सब रूस से प्राप्त की गई थीं. आई. एन. एस. शिशुमार पनडुब्बी पश्चिमी जर्मनी से प्राप्त की गई है. पोतरोधी क्लब प्रक्षेपास्त्रों से युक्त किलो क्लास पनडुब्बी आई. एन. एस. 'सिंधु शस्त्र' को 19 जुलाई, 2000 को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया है. आई.एन.एस. कुरसुगा पनडुब्बी को अब संग्रहालय में बदला जा रहा है.

 (5) फ्रिगेट्स- आई.एन.एस. मैसूर, आई.एन.एस. हिमगिरि, आई.एन.एस. ब्रह्मपुत्र, व्यास, बेतवा, कृपाण, कटार, तल्खार, त्रिशूल, आई.एन.एस. उदयगिरि, आई.एन.एस. दूनागिरि एवं आई.एन.एस. तारागिरि पाँचवीं लीडर क्लास फ्रिगेट हैं. इनका निर्माण मझगाँव डॉक्स में हुआ है. खुखरी भारत-पाक युद्ध 1971 में नष्ट हो गई.

 (6) माइन स्वीपर्ज- आई. एन. एस. भतकल, आई. एन. एस. कोंकन, करवर, काकीनाडा, कन्नानोर, कुदालोर, बसीन और बिमलीपटम, आई. एन. एस. बुल्सर..

(7) सर्वे-शिप्स- आई.एन. दर्शक, इनवेस्टीगेटर, जमुना, सतलज, आई.एन. एस. सर्वेक्षक. अन्य पोतों के नाम, जो भारतीय जल सेना के पास हैं आई. एन. एस. अजय, अभय, अक्षय, ध्रुवक, सिन्धुध्वज, मगर, सिन्धुराज, सिन्धुघोष, निर्भीक, आई.एन. एस. कोरा इत्यादि. प्रक्षेपास्त्रयुक्त नौका आई. एन. एस. विभूति, आई. एन. एस. विपुल व मिसाइलवाहक नौका 'नाशक' को नौसेना में शामिल किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त आई. एन. एस. आदित्य, जोकि टैंकर है, को भी 11 अप्रैल, 2000 को सेना में शामिल कर लिया गया है. भारतीय नौसेना के विशाखापत्तनम् स्थित तकनीकी प्रतिष्ठान आई. एन. एस. इकशिला को 26 अगस्त, 2000 को राष्ट्र को समर्पित किया गया. आई. एन. एस. मुम्बई का जलावतरण 25 नवम्बर, 2000 को किया गया. इसके अतिरिक्त एस्कोर्ट शिप आई. एन. एस. क्रिच भी नौसेना में 22 जनवरी, 2001 को शामिल कर लिया गया है. अगस्त 2001 में विभिन्न खूबियों वाले दो अत्याधुनिक युद्धपोतों आई. एन. एस. कुलिश व आई. एन. एस. तरासा को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है.

आई. एन. एस. सर्वेक्षक का 14 जनवरी, 2002 को लोकार्पण किया गया. अभी 11 अप्रैल, 2002 को स्वदेश निर्मित मिसाइल पोत आई. एन. एस. प्रबल को मुम्बई में भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है. butiraआई. एन. एस. सर्वेक्षक का 14 जनवरी, 2002 को लोकार्पण किया गया. अभी 11 अप्रैल, 2002 को स्वदेश निर्मित मिसाइल पोत आई. एन. Q. प्रबन को मुम्बई में भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है.

इस आर्टिकल में हमने इंडियन आर्मी में विभिन्न पद और रैंक के बारे में जाना। भारतीय युवाओं में आर्मी में भर्ती होने का अलग ही जूनून है। इसलिए इस क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्द्धा भी है। भारतीय सेना में भर्ती होना अपने आप में गर्व की बात है।

उम्मीद करता हूँ कि यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,अगर आपको आर्टिकल अच्छी लगी हो तो आर्टिकल को शेयर जरुर करें।

  1. सामान्य ज्ञान के प्रश्नोत्तरी
  2. भारत का भूगोल सामान्य ज्ञान
  3. भारत में विधायकों की सैलरी
  4. सामान्य ज्ञान महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी


भारत में मिसाइल टेक्नोलॉजी (Missile Technology in India in Hindi)

भारत में मिसाइल टेक्नोलॉजी (Missile Technology in India)

हेलो दोस्तों ,आज के इस आर्टिकल में हम भारत में मिसाइल टेक्नोलॉजी के बार मे विस्तृत रूप से जानेंगे। भारत को स्वतंत्रता के समय ही यह आभास हो गया था कि जल्द ही भारत को आने वाले समय के युद्ध में टेक्नोलॉजी का उपयोग करना पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय शासन ने  मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम करना शुरू कर दिया था। वर्त्तमान में भारत के पास सबसे शक्तिशाली मिसाइलों का भंडार है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भारत में मिसाइल टेक्नोलॉजी  से जुड़े प्रश्न जाते हैं।
Defence- Missile Technology in India

मिसाइल टेक्नोलॉजी (भारत)

भारत की सतह से सतह पर मार करने वाली नई मिसाइल 'प्रगति' भी सामरिक दृष्टि से अहम है जिसका अभी हाल ही में परीक्षण हुआ। प्रगति रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा सेना के लिए तैयार की गई प्रहार मिसाइल पर आधारित इस मिसाइल को सिओल (दक्षिण कोरिया) में चल रही 'सियोल इंटरनेशनल एअरोस्पेस एंड डिफेंस एक्जीबिशन (एडीईएक्स-2013)' में भी पेश किया गया था जिसमें 33 देशों से 300 कंपनियों ने भाग लिया था। 

संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है कि जब भारत ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर भागीदारी की है। अग्नि श्रेणी की मिसाइलों का निर्माण भारत के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक है। उल्लेखनीय है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अग्नि-5 मिसाइल की सफलता के बाद अब परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि-6 विकसित कर रहा है। 

अंतर्महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-6 की मारक क्षमता 6000 से 10000 किलोमीटर की दूरी तक की होगी। यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) मिसाइल है जो एक साथ अनेक परमाणु हथियार ले जा सकेगी। इससे हमारी रक्षा ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। हालांकि अग्नि 5, 1000 किलोग्राम से अधिक का परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम होगी। यह पहली ऐसी मिसाइल है जिसकी मारक सीमा में आने वाले चीन के सभी इलाके, पूरा एशिया, अधिकांश अफ्रीका व आधा यूरोप आ जाएंगे। यद्यपि अग्नि-5 मिसाइल की मारक सीमा में भले ही पूरा चीन आता हो लेकिन उसके विमानवाही पोत जो कि चीन से दूर प्रशांत महासागर व अटलांटिक महासागर में तैनात हैं, वहां से भी वे भारत पर मिसाइल दाग सकते हैं। 

सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस को भी इस श्रृंखला में शामिल किया जा सकता है जिसे भारत ने चीन-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तैनात करने का निर्णय लिया है जबकि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत के नाम से पुकारता है। ब्रह्मोस के तीन स्वरूप विकसित किए जा रहे हैं। अब पानी के अंदर व हवा में प्रक्षेपित किए जाने वाले संस्करणों पर काम जारी है। ब्रह्मोस ब्लॉक-2 से आतंकवादी शिविरों समेत बेहद सटीक लक्ष्यों को भेदा जा सकता है और यह सर्जिकल स्ट्राइक करने में पूरी तरह से सक्षम है। भारत की प्रमुख मिसाइलें भारत की विभिन्न मिसाइलें उसकी सुरक्षा प्रणाली का बेहद अहम हिस्सा हैं जिनमें कुछ जमीन से जमीन पर मार करने वाली हैं और कुछ जमीन से हवा में। भारत के पास समुद्र से दागी जा सकने वाली मिसाइलें भी हैं।

इनमें से कुछ प्रमुख हैं : -

अग्नि-1 (Agni-I)

Agni-I

अग्नि-1 पर काम 1999 में शुरू हुआ था, लेकिन परीक्षण 2002 में किया गया। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था। यह 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। भारत ने परमाणु क्षमता संपन्न अग्नि-1 प्रक्षेपास्त्र का दिसंबर 2011 में फिर से सफल परीक्षण किया। इसे को पहले ही भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है, लेकिन सेना से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसका समय-समय पर प्रायोगिक परीक्षण किया जाता है।

अग्नि-2 (Agni-II)

Agni-II

जमीन से जमीन पर मार करने वाली अग्नि-2 का वर्ष 2009 में परीक्षण असफल हो जाने के पश्चात पुनः व्हीलर आईलैंड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया गया। इसकी मारक क्षमता दो हजार किलोमीटर है और यह एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है। इसमें अति आधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक है। सितंबर 2011 में एक बार फिर अग्नि-2 का सफल परीक्षण किया गया जिसके बाद यह भारतीय सेना में शामिल कर ली गयी।

अग्नि-3 (Agni-III)

Agni-III

भारत ने परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली मिसाइल अग्नि-3 का पहले 2006 में परीक्षण किया जिसे आंशिक रूप से ही सफल बताया गया। वर्ष 2007 एवं 2008 में इसका पुनः सफल परीक्षण किया। इसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है और यह सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। यह 1.5 टन का पेलोड ले जा सकती है और इसमें अति आधुनिक कंप्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम है। 

अग्नि-4 (Agni-IV)

Agni-IV

ओडिशा के व्हीलर द्वीप से करीब तीन हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण नवंबर 2011 को किया गया। यह पहले तीन मिसाइलों के मुकाबले काफी हल्की है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लगभग एक हजार किलोग्राम के पेलोड क्षमता वाली अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है। पहली बार इसका प्रक्षेपण 2010 में दिसंबर में हुआ था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से ये सफल नहीं हो पाया था। 

अग्नि 5 (Agni-V)

अग्नि-5 भारत का पहली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। अग्नि-5 की मारक क्षमता के दायरे में यूरोप के कई देशों के साथ-साथ चीन भी शामिल है। अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के बाद भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश है, जिसके पास अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इस मिसाइल का वजन 50 टन और इसकी लंबाई 17.5 मीटर है और यह एक टन का परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। अग्नि-5 20 मिनट में 5000 किमी की दूरी तय कर सकती है। इसके लॉचिग सिस्टम में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसके चलते इस मिसाइल को कहीं भी बड़ी आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। अग्नि-5 तीन स्तरीय, पूरी तरह से ठोस ईधन पर आधारित मिसाइल है जिसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री वेहिकल (एमआरटीआरवी) विकसित किया गया है। बनाने के लिए भारत ने माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम, कार्बन कंपोजिट मैटेरियल से लेकर कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर तक ज्यादातर चीजें स्वदेशी तकनीक से विकसित कीं। यही नहीं इसका प्रयोग छोटे सैटेलाइट लांच करने और दुश्मनों के सैटेलाइट नष्ट करने में भी किया जा सकता है। फिलहाल भारत को चीन और पाकिस्तान की तरफ से जिस तरह की चुनौती मिल रही है, उसे देखते हुए यह जरूरी है कि भारत इस प्रकार की क्षमता संपन्न हो। उल्लेखनीय है कि चीन ने कुछ वर्ष पहले ही 12 हजार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली तुंगफंग-31 ए बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास करने में सफल | हो चुका है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अग्नि 1, अग्नि 2, अग्नि 3 और अग्नि 4 का सफल प्रक्षेपण | किया जा चुका है जिसकी मारक क्षमता क्रमशः 700 किमी, 2000 किमी, 2500 किमी और 3500 किमी थी। जबकि रूस के पास आर-36एम है जिसकी मारक क्षमता 16000 किमी, अमेरिका के पास यूजीएम-133 एवं ट्राइडेंट 2 मिसाइले हैं जिनकी मारक क्षमता 11300 किमी है। ब्रिटेन के ट्राइटेंड 2, चीन के पास टीएफ-31ए और फ्रांस के पास एम-51 है जिनकी मारक क्षमताएं क्रमशः 11300 किमी, 11270 किमी और 10,000 किमी है।

पृथ्वी मिसाइलें (Prithvi)

Prithvi Missile

वर्ष 2011 में ओडिशा के चांदीपुर से पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था जिसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है जिसमें किसी भी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल को झांसा देकर निशाना साधने की क्षमता है। पृथ्वी रेंज की मिसाइलें भारत ने स्वदेशी तकनीक से विकसित की है और भारतीय सेना में इसे शामिल किया जा चुका है। भारत के एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत पृथ्वी पूर्ण रूप से स्वदेश में निर्मित पहला बैलेस्टिक मिसाइल है। इसके माध्यम से 500 किलोग्राम तक के बम गिराए जा सकते हैं और यह द्रवित इंजन से संचालित होती है।

धनुष मिसाइल

धनुष मिसाइल को नौसेना के इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है और यह 350 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है। यह पृथ्वी मिसाइल का नौसनिक (नेवल) संस्करण है जो 500 किलोग्राम तक के हथियार ढो सकती है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और निर्माण भारत डाइनेमिक्स लिमिटिड ने किया है।

ब्रहमोस मिसाइल 

28 अप्रैल, 2002 को भारत ने ध्वनि की गति से भी तेज चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परिक्षण किया था और इसे ब्रहमोस का नाम दिया गया। भारत ने इसका निर्माण रूस के सहयोग से किया। दोनों देशों के बीच 1998 में ये ज्वाइंट वेंचर हुआ था। ब्रहमोस 290 किलोमीटर तक की मार करने की क्षमता रखती है। यह जहाज, पनडुब्बी और हवा समेत कई प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है और यह मिसाइल ध्वनि की गति से 2.8 गुना ज्यादा गति से उड़ान भर सकती है। मार्च 2012 को हुए अभ्यास परीक्षण के बाद ब्रहमोस मिसाइल प्रणाली अब सेना की दो रेजीमेंट में पूरी तरह ऑपरेशनल हो गई हैं। सागरिका मिसाइल भारत के पास सागरिका नाम की ऐसी मिसाइल भी है जो समुद्र में से दागी जा सकती है और जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। सबमरीन लांच्ड बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) सागरिका को 2008 में विशाखापत्तनम के तटीय क्षेत्र से छोड़ा गया था। यह मिसाइल 700 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। इस तरह की मिसाइलें कुछ ही देशों के पास हैं। 

आकाश मिसाइल 

2003 में भारत ने जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल का परीक्षण किया। 700 किलोग्राम के वजन वाली यह मिसाइल 55 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है। इसकी गति 2.5 माक है। यह मिसाइल प्रणाली कई निशानों को एक साथ भेद सकती है और मानवरहित वाहन, युद्धक विमान और हेलीकॉप्टरों से दागी मिसाइलों को नष्ट कर सकती है। इस प्रणाली को भारतीय पैट्रियट कहा जाता है। आकाश मिसाइल प्रणाली 2030 और उसके बाद तक भारतीय वायु सेना का अहम हिस्सा रहेगी।

प्रहार मिसाइल 

प्रहार जमीन से जमीन तक मार करने वाली मिसाइल है जिसका जुलाई 2011 में परीक्षण किया गया। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है। ये कई तरह के वारहेड (मुखास्त्र) ले जाने की क्षमता रखती है। 200 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाली इस मिसाइल का रिएक्शन टाइम काफी कम है यानी प्रतिक्रिया काफी जल्दी होती है। यह मल्टी बैरल रॉकेट और मध्यम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के बीच की खाई को कम करती है।

जानिए भारतीय सेना के बारे में जानकारी -Know information about Indian Army in Hindi।

भारतीय  सेना के बारे में जानकारी-Know information about Indian Army in Hindi। 

आज के इस पोस्ट में भारतीय सेना के बारे में जानेंगे जैसे -भारतीय सेना कैसे बनी ?,भारतीय सेना का उद्देश्य क्या है ?.भारतीय सेना का इतिहास क्या है। भारत का एक आम नागरिक होने कारण हमें अपनी सेना के बारे में जरुर जानना चाहिए क्योंकि  भारतीय सेना की वजह से ही हम चैन की साँस ले पा रहे हैं और भारतीय सेना विश्व की सर्वोच्च सेनाओं में से एक मानी जाती जाती है ।भारतीय सेना में पूरी जानकारी के इस पोस्ट को पूरा अवश्य पढ़ें।

हमारी भारतीय थलसेना, सेना भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह भारतीय सशस्त्र बल का सबसे बड़ा अंग माना जाता है। अब सवाल आता है की इतनी बड़ी सेना का नेतृत्व आखिर करता कौन है तो इसका जवाब है - भारत का राष्ट्रपति, थलसेना का प्रधान सेनापति होता है, और इसकी कमान भारतीय थलसेना सेना अध्यक्ष के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा जनरल स्तर के अधिकारी होते हैं। पाँच-सितारा रैंक के साथ फील्ड मार्शल की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक केवल दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है।

Table of Content  :-

  • भारतीय सेना बनी कैसे ? 
  • भारतीय सेना का उद्देश्य क्या है ?
  • भारतीय सेना का इतिहास क्या है ? 

भारतीय सेना बनी कैसे ? 

भारतीय सेना का उद्भव ईस्ट इण्डिया कम्पनी, जो कि ब्रिटिश भारतीय सेना के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो स्वतन्त्रता के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का इतिहास अलग अलग रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में युद्ध सम्मान अर्जित किये, जिसकी वजह से दुनिया भर  में भारतीय सेना का बोलबाला रहां है और यह भारत को गौरान्वित कराते आया है.

पढ़ें- भारत में मिसाइल टेक्नोलॉजी ।

भारतीय सेना का उद्देश्य क्या है ?

भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना होता है, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आन्तरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शान्ति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, आज तक हुए कई प्रकृतिक और जैविक आपदाओं में भी कमान सम्हाले होते है, जैसे ऑपरेशन सूर्य आशा, और आन्तरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। 

यह भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है। 

इसके साथ ही भारतीय सेना के कुछ और उद्द्येश्य है जैसे की -

1.बाहरी खतरों के विरुद्ध शक्ति सन्तुलन के द्वारा या युद्ध छेड़ने की स्थिति में संरक्षित राष्ट्रीय हितों, सम्प्रभुता की रक्षा, क्षेत्रीय अखण्डता और भारत की एकता की रक्षा करना।

2.सरकारी तन्त्र को छाया युद्ध और आन्तरिक खतरों में मदद करना और आवश्यकता पड़ने पर नागरिक अधिकारों में सहायता करना।"

3. दैवीय आपदा जैसे भूकम्प, बाढ़, समुद्री तूफान ,आग लगने ,विस्फोट आदि के अवसर पर नागरिक प्रशासन की मदद करना।

नागरिक प्रशासन के पंगु होने पर उसकी सहायता करना।

पढ़ें- इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करें।

भारतीय सेना का इतिहास क्या है ? 

ये समय था आजादी और देश के बटवारे की थी सन 1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना को नये बने राष्ट्र भारत और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर हिस्सों को भारत के पास रखा गया। 

चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानान्तरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया। जैसा कि ज्ञात है, भारतीय सेना में ब्रिटिश भारतीय सेना से व्युत्पन्न हुयी है तो इसकी संरचना, वर्दी और परम्पराओं को अनिवार्य रूप से विरासत में ब्रिटिश से लिया गया हैं|

विडियो देखें - क्लिक करें

भारतीय सेना में कैसे जाएँ - विडियो देखें


आज के इस पोस्ट में अपने भारतीय सेना का  इतिहास, सेना का  निर्माण और इसके उद्देश्य के बारे में विस्तार से जाना ।भारतीय सेना के बारे में जानने की इच्छा रखने वालों के लिए यह पोस्ट बहुत ही उपयोगी है ।\

आशा करता हूँ कि  यह पोस्ट आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।

इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे - how to join indian army in Hindi।

इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे - how to join indian army in Hindi।

आज के इस पोस्ट में इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करें ,इसके बारे में जानेंगे। जवानी की उम्र में भारत के नौजवानों में अधिकतम इंडियन आर्मी का क्रेज  होता है ।  इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करें ये सवाल उनके में जरुर उठता है तो आज के इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आयें है इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे की पूरी जानकारी । इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे की पूरी जानकारी के लिए पोस्ट को पूरा जरुर पढ़ें ।

 इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे  यह सवाल हर उस नौजवान का सवाल है जो इंडियन आर्मी ज्वाइन करना चाहता है.दोस्तों इंडियन आर्मी ज्वाइन करना लगभग हर भारतवासी का सपना होता है। भारत के नौजवान, आर्मी में शामिल होकर देश की रक्षा  करने को हमेशा तैयार रहते हैं।

इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे - how to join indian army in Hindi।
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इंडियन आर्मी हर हाल में देश की सेवा में तत्पर रहते है चाहे बात हो आग सी जलती गर्मी की या फिर खून जमा देने वाली कड़ाके की ठण्ड इंडियन आर्मी हर जगह हमेशा तैनात रहती है, इंडियन आर्मी में भर्तियां भी समय-समय पर निकलती ही रहती है। इंडियन आर्मी ज्वाइन करने के इक्छुक उम्मीदवार इन भर्तियों में शामिल हो सकते हैं और देश की सेवा में जा सकते है।


Table of Content:-  

  • इंडियन आर्मी ज्वाइन कैसे करे ?
  • इंडियन आर्मी ज्वाइन प्रक्रिया क्या है ?
  • भारतीय रक्षा से जुड़े सभी अधिकारिक वेबसाइट

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इंडियन आर्मी ज्वाइन कैसे करे ?

इंडियन आर्मी ज्वाइन करने के लिए अलग अलग लेवल के आवेदन समय-समय पर जारी किये जाते हैं। आर्मी में शामिल होने के इक्छुक उम्मीदवार दसवीं, बारहवीं या ग्रेजुएशन(स्नातक) के बाद आवेदन कर सकते हैं। उम्र सीमा , शैक्षणिक योग्यता, फिजिकल और मेडिकल के सभी माप दण्डो को पूरा करने वाला उम्मीदवार ही भारतीय सेना में भर्ती होने योग्य होता है।

इंडियन आर्मी कैसे ज्वाइन करे - विडियो देखें - क्लिक करें

इंडियन आर्मी ज्वाइन प्रक्रिया क्या है ?

इंडियन आर्मी ज्वाइन करने के लिए सामान्यतः नीचे दी गयी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

  1. सबसे पहले उम्मीदवारों को मापदंडों के अनुसार आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर जाकर आवेदन करना होता है।
  2. इसके बाद आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों / सर्टिफिकेट की जाँच की जाती है।
  3. इसके बाद फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया जाता है।
  4. अब इस टेस्ट को पास करने के बाद शारीरिक मापन परीक्षण ली जाती है।
  5. इसमें उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए बुलाया जाता है। जिसमे उम्मीदवार की अंगो  की जांच प्रक्रिया शामिल होती है
  6. मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा ली जाती है।
  7. सभी चरणों को पूरा करने के बाद चुने हुए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट बनायीं जाती है ।
  8. इसके बाद प्रशिक्षण केंद्रों के लिए चुने गए उम्मीदवारों का नामांकन कर लिया जाता है और उन्हें अपने केंद्रों में रिपोर्ट करने के लिए भेज दिया जाता है।

भारतीय रक्षा से जुड़े सभी अधिकारिक वेबसाइट-

आये दिन हमे ऑफिसियल वेबसाइट की जरूरत पडती रहती हैं ऐसे में जब भी search करते है तो लाखो वेबसाइट सामने आती हैं जहाँ हम ऑफिसियल वेबसाइट को नहीं पहचान पाते हैं | रोजगार सहायता डॉट कॉम आपके लिए आज के इस आर्टिकल में रक्षा से जुड़े सभी अधिकारिक वेबसाइट के लिस्ट देने जा रहा हैं आप सिर्फ एक क्लिक में ही अधिकारिक वेबसाइट में पहुच जायेंगे |

FAQS 

  • फौजी बनने के लिए क्या करना पड़ता है?
उत्तर: भारतीय सेना नियमित तौर पर 10वीं और 12वीं पास विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर भर्ती रैली का आयोजन करती है। इसके लिए फिजिकल और लिखित परीक्षा भी देने पढ़ती है
  • फौजी कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: भारत  में तीन प्रकार की सेनाएं हैं-थल सेना ,जल सेना और वायु सेना। 

आज के इस पोस्ट में आपने इडियन अरमे कैसे ज्वाइन करे के बारे में विस्तार से जाना ,जो भी नौजवान इंडियन आर्मी  में जाने की इच्छा रखते हैं ,उनके लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है । 

आशा करता हूँ कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी अगर आपको पोस्ट पसंद  आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।