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[PDF] कबीर के 100 बेहतरीन दोहे : in Hindi [2023]

Kabir ke dohe : संत कबीर दास जी के 100 प्रसिद्ध दोहे

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में कबीर के दोहे दिए जा रहे हैं। भक्तिकाल के कवियों में कबीरदास का नाम शीर्ष स्थानों में लिया जाता है। विभिन्न परीक्षाओं में भी कबीर के दोहे से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। कभी-कभी किसी बड़ी बात का उदाहरण देने के लिए भी कबीर के दोहे उपयोग किया जाता है। कबीर के दोहे जीवन की वास्तविकता को प्रदर्शित करते हैं। क्यूंकि ये दोहे कबीर ने अपने जीवन के अनुभवों को लेकर लिखे हैं।




Kabir ke dohe in Hindi


बचपन से ही मुझे दोहा पढना बहुत पसंद हैं क्या आपको भी दोहा पढ़ना अच्छा लगता हैं - आज की इस कबीर के दोहे में मैंने अपने पसंदीदा दोहे को भी सामिल किया हैं आशा करता हु आपको भी जरुर पसंद आयेगा - 

कबीर के दोहे (Kabir ke dohe in Hindi) 


1. बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
    पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥

2 . गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय ।
     बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥


3.  यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान ।
     शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥


4.  माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे ।
     एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे॥


5.  दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करै न कोय।
     जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे होय॥


6.  तिनका कबहूँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय ।
     कबहूँ उड़ आँखों मे पड़े, पीर घनेरी होय॥ 


7. करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
    पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥


8.  माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।
     कर का मन का डार दें, मन का मनका फेर॥


9.  जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए ।
     यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए॥


10. कबीर माला मनहि कि, और संसारी भीख ।
      माला फेरे हरि मिले, गले रहट के देख॥


11. जाति न पुछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान ।
      मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥


12. जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप ।
      जहाँ क्रोध तहाँ काल है, जहाँ क्षमा तहाँ आप॥


13. सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज ।
      सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाए॥


14.  ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।
       औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए॥


15. बुरा देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।
      जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय॥


16. कबीरा ते नर अन्ध हैं, गुरु को कहते और हरि को कहते और  ।
      हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥


17. चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये ।
      दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए॥


18.  माया मरी न मन मरा, मर-मर गया शरीर ।
      आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर॥


19. मालिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार ।
      फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार॥


20. माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय ।
      इक दिन ऐसा आएगा, मै रौंदूंगी तोय॥


21. नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग ।
      और रसायन छांड़ि के, नाम रसायन लाग॥


22. दुर्लभ मानुष जनम है, देह न बारम्बार ।
      तरुवर ज्यों पत्ती झड़े, बहुरि न लागे डार॥


23. माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख ।
      माँगन ते मरना भला, यही सतगुरु की सीख॥


24. आया था किस काम को, तू सोया चादर तान ।
      सूरत सम्हाल ऐ गाफिल, अपना आप पहचान॥


25. गारी हीं सों उपजे, कलह, कष्ट और मींच ।
      हारि चले सो साधु है, लागि चले सो नीच ॥


26.  अवगुण कहूँ शराब का, आपा अहमक़ साथ ।
       मानुष से पशुआ करे, दाय गाँठ से खात ॥


27.  अटकी भाल शरीर में, तीर रहा है टूट ।
       चुम्बक बिना निकले नहीं, कोटि पट्ठ्न को फूट॥


28. कबीरा जपना काठ कि, क्या दिखलावे मोय ।
      हृदय नाम न जपेगा, यह जपनी क्या होय ॥


29. वैद्य मुआ रोगी मुआ, मुआ सकल संसार ।
      एक कबीरा ना मुआ, जेहि के राम अधार ॥


30. राम रहे वन भीतरे, गुरु की पूजी न आस ।
      कहे कबीर पाखंड सब, झूठे सदा निराश ॥


31. तीरथ गए थे एक फल, संत मिले फल चार ।
      सतगुरु मिले अनेक फल, कहें कबीर विचार ॥


32. सुमरण से मन लाइए, जैसे पानी बिन मीन ।
      प्राण तजे बिन बिछड़े, संत कबीर कह दिन ॥ 


33. कामी, क्रोधी, लालची इनसे भक्ति न होय ।
      भक्ति करे कोई सूरमा, जाति, वरन, कुल खोय ॥


34.  अंतर्यामी एक तुम, आत्मा के आधार ।
       जो तुम छोड़ो हांथ तो, कौन उतारे पार ॥


35.  प्रेम न बाड़ी उपजै, प्रेम न हाट बिकाय ।
       राजा प्रजा जेहि रुचें, शीश देई ले जाय ॥.


36. प्रेम प्याला जो पिये, शीश दक्षिणा देय ।
      लोभी शीश न दे सके, नाम प्रेम का लेय ॥ 


37. जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान।
      मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥


38. जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
      मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥


39. कागा का को धन हरे, कोयल का को देय ।
      मीठे वचन सुना के, जग अपना कर लेय॥ 


40. नहीं शीतल है चंद्रमा, हिंम नहीं शीतल होय ।
      कबीरा शीतल सन्त जन, नाम सनेही सोय ॥

इन्हें भी पढ़े - 
41.  आये है तो जायेंगे, राजा रंक फ़कीर ।
       इक सिंहासन चढी चले, इक बंधे जंजीर ॥


42. साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुंब समाय ।
       मैं भी भूखा न रहूँ, साधु भी भूखा ना जाय ॥


43. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
      ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥


44. कुटिल वचन सबसे बुरा, जा से होत न चार। 
       साधू वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार ॥


45. पढ़े गुनै सीखै सुनै मिटी न संसै सूल।
      कहै कबीर कासों कहूं ये ही दुःख का मूल ॥


46. ज्ञान रतन का जतन कर, माटी का संसार।
       हाय कबीरा फिर गया, फीका है संसार॥


47. मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई।
      पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई॥


48. कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी 
      एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पांव पसारी ॥


49. जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही ।
      सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही॥


50. जल ज्यों प्यारा माहरी, लोभी प्यारा दाम ।
      माता प्यारा बारका, भगति प्यारा नाम॥


51. जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही।
      ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही॥


52. ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग। 
      प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत॥


53. फूटी आँख विवेक की, लखे ना सन्त-असन्त ।
      जाके संग दस-बीस हैं, ताको नाम महन्त॥


54. जहाँ काम तहाँ नाम नहिं, जहाँ नाम नहिं वहाँ काम ।
      दोनों कबहुँ नहिं मिले, रवि रजनी इक धाम॥


55. बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि।
      हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि॥

56. अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
      अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥


57. दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार।
      तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार॥


58. हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
      आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना॥


59. जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई।
      जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई॥


60. मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई।
      पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई॥


कबीर के दोहे पीडीऍफ़ डाउनलोड -  Kabir ke dohe

इस पीडीऍफ़ में 900 से अधिक कबीर के दोहे के समावेश हैं जिन्हें आप कभी भी कही भी पढ़ सकते हैं -  PDF का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक निचे दिया गया हैं - 

Top 10 Kabir ke Dohe in Hindi कबीर के बेहतरीन दोहे

निचे हमने आपको कबीर  सबसे अधिक प्रसिद्ध दोहे को बताया हैं साथ आपको सभी दोहों के अनुवाद भी दिए गए हैं आपके लिए इनमे से कौन सा दोहा एकदम नया जिसे आपने कभी नही. सुना या पढ़ा था हमे कमेंट के माध्यम से जरुर बताएं - 

कबीर दास के 10 दोहे अर्थ सहित -

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय

अनुवाद - हम सभी परेशानियों में फंसने के बाद ही ईश्वर को याद करते हैं. सुख में कोई याद नहीं करता. जो यदि सुख में याद किया जाएगा तो फिर परेशानी क्यों आएगी.


जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग
तेरा साईं तुझ में है, तू जाग सके तो जाग

अनुवाद -जिस तरह तिल में तेल होने और चकमक में आग होने के बाद दिखलाई नहीं पड़ता. ठीक उसी तरह ईश्वर को खुद के भीतर खोजने की जरूरत है. बाहर खोजने पर सिर्फ निराशा हाथ लगेगी.

पोथि पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोए
ढाई आखर प्रेम के, पढ़ा सो पंडित होए

अनुवाद -कबीर कहते हैं कि किताबें पढ़ कर दुनिया में कोई भी ज्ञानी नहीं बना है. बल्कि जो प्रेम को जान गया है वही दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञानी है.

चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाए
वैद बिचारा क्या करे, कहां तक दवा लगाए

अनुवाद -चिंता रूपी चोर सबसे खतरनाक होता है, जो कलेजे में दर्द उठाता है. इस दर्द की दवा किसी भी चिकित्सक के पास नहीं होती.

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर
आशा, तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर

अनुवाद -इच्छाएं कभी नहीं मरतीं और दिल कभी नहीं भरता, सिर्फ शरीर का ही अंत होता है. उम्मीद और किसी चीज की चाहत हमेशा जीवित रहते हैं.

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय
जो मन खोजा आपना, तो मुझसे बुरा न कोय

अनुवाद -जब मैं पूरी दुनिया में खराब और बुरे लोगों को देखने निकला तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला. और जो मैंने खुद के भीतर खोजने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं मिला.

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर

अनुवाद -इस दोहे के माध्यम से कबीर कहना चाहते हैं कि सिर्फ बड़ा होने से कुछ नहीं होता. बड़ा होने के लिए विनम्रता जरूरी गुण है. जिस प्रकार खजूर का पेड़ इतना ऊंचा होने के बावजूद न पंथी को छाया दे सकता है और न ही उसके फल ही आसानी से तोड़े जा सकते हैं.

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होएगी, बहुरी करोगे कब

अनुवाद -कल का काम आज ही खत्म करें और आज का काम अभी ही खत्म करें. ऐसा न हो कि प्रलय आ जाए और सब-कुछ खत्म हो जाए और तुम कुछ न कर पाओ.

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोए
अपना तन शीतल करे, औरन को सुख होए


अनुवाद -हमेशा ऐसी बोली और भाषा बोलिए कि उससे आपका अहम न बोले. आप खुद भी सुकून से रहें और दूसरे भी सुखी रहें.

धीरे-धीरे रे मन, धीरे सब-कुछ होए
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए

अनुवाद -दुनिया में सारी चीजें अपनी रफ्तार से घटती हैं, हड़बड़ाहट से कुछ नहीं होता. माली पूरे साल पौधे को सींचता है और समय आने पर ही फल फलते हैं.

साईं इतनी दीजिए, जा में कुटुंब समाए
मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाए

अनुवाद -यहां कबीर ईश्वर से सिर्फ उतना ही मांगते हैं जिसमें पूरा परिवार का खर्च चल जाए. न कम और न ज्यादा. कि वे भी भूखे न रहें और दरवाजे पर आया कोई साधू-संत भी भूखा न लौटे.

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आशा करता हूँ कि  कबीर के दोहे (Kabir ke dohe in Hindi) का यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आये तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें।

भारतीय दर्शन Top 10 MCQ - Indian Philosophy MCQs in Hindi [2023]

भारतीय दर्शन MCQ (Indian Philosophy MCQs) 

हेलो दोस्तों, आपका studypointandcareer.com में स्वागत है। इस लेख में हम भारतीय दर्शन MCQ ( Indian Philosophy MCQs) के बारे में जानेंगे। भारत में दर्शन उस विद्या को कहा जाता है जिससे तत्व का ज्ञान हो सके। मानव के दुखों की निवृत्ति करने और  तत्व का ज्ञान कराने  के लिए भारत में दर्शन का जन्म हुआ। 

भारतीय दर्शन का आरंभ वेदों से होता है। हिन्दू धर्म में दर्शन अत्यंत प्राचीन परंपरा रही है। विभिन्न परीक्षाओं में भी दर्शन से जुड़े सवाल पूछे जाते रहें हैं । इन्हीं  परीक्षाओं को ध्यान में रखकर भारतीय दर्शन का MCQ इस लेख में दिया जा रहा है ,जिससे कम समय में अधिक से अधिक जानकारी आपको मिल सके।
Indian Philosophy MCQs in Hindi

Indian Philosophy mcq in Hindi | भारतीय दर्शन MCQ

प्रश्न: वैशेषिक दर्शन के प्रणेता कहे जाते है। 

उत्तर:- कणाद 

प्रश्न: कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक प्रणाली है-

उत्तर:- सांख्य दर्शन 

प्रश्न: पतंजलि का संम्बन्ध है -

उत्तर:- योग दर्शन से 

प्रश्न: रामानुजाचार्य किससे संम्बन्धित है?

उत्तर:- विशिष्टाद्वैत 

प्रश्न: महर्षि गौतम का संम्बन्ध किस दर्शन से है ?

उत्तर:- न्याय दर्शन से 

प्रश्न: भारत का प्राचीनतम दर्शन है 

उत्तर:- सांख्य 

प्रश्न: अष्टांगिक मार्ग किस धर्म से संम्बन्धित है ?

उत्तर:- बौद्ध दर्शन 

प्रश्न: कर्म का सिद्धांत संबंधित है –

उत्तर:- मीमांसा से 

प्रश्न: द्वैतवाद सिद्धांत के प्रतिपादक हैं

उत्तर:- माधवाचार्य 

प्रश्न: द्वैताद्वैत सिद्धांत के प्रवर्तक हैं-

उत्तर:- निम्बकाचार्य 

प्रश्न: भक्ति को दार्शनिक आधार प्रदान करने वाले प्रथम आचार्य कौन थे?

उत्तर:- रामानुज 

प्रश्न: महर्षि कपिल का नाम दर्शन की किस विधि से जुड़ा हुआ है?

उत्तर:- सांख्य दर्शन 

प्रश्न: लोकायत दर्शन का प्रतिपादक कौन हैं?

उत्तर:- चार्वाक 

प्रश्न: शून्यवाद के प्रतिपादक कौन माने जाते हैं

उत्तर:- नागार्जुन 

प्रश्न: अद्वैतवाद सिधांत के प्रतिपादक कौन हैं?

उत्तर:- शंकराचार्य 

प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन भारतीय दर्शन की अपेक्षा पाश्चात्य दर्शन से कहीं अधिक प्रभावित थे ?

उत्तर:- राजा राममोहन राय 

प्रश्न: पुष्टि मार्ग के दर्शन की स्थापना किसने की थी?

उत्तर:- बल्लभाचार्य 

प्रश्न: कर्म का सिद्धांत संबंधित है -

उत्तर:- मीमांसा से 

प्रश्न: आजीवक सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे ?

उत्तर:- मक्खली गोपाल 

प्रश्न: जब तक जीवित रहो सुखी रहो सुख से से जीवित रहो, चाहे इसके लिए ऋण ही लेना पड़े,क्यूंकि शरीर के भस्मीभूत हो जाने पर पुनरागमन नहीं हो सकता |पुनर्जन्म का निषेध करने वाली यह युक्ति किसकी है?

उत्तर:-  चार्वाकों की 

प्रश्न: आदिशंकर को बाद में शंकराचार्य बने,उनका जन्म हुआ था-

उत्तर:- केरल में 

प्रश्न: भाग्य ही सब कुछ निर्धारित करता है, मनुष्य असमर्थ होता है ऐसा किसका मानना  है 

उत्तर:- आजीवकों का 

प्रश्न: कौन सा दर्शन व्यक्तिवाद को बढ़ावा देता है 

उत्तर:- जैन दर्शन 

प्रश्न:  जैन धर्म में शिक्षा का अंतिम लक्ष्य क्या है 

उत्तर:- मानव कल्याण के स्वैच्छिक 

प्रश्न: जैन धर्म का क्या मंत्र है 

उत्तर:- सभी पाप कृत्य जीवन भर के लिए त्यागना 

प्रश्न:निम्नलिखित मे से कौन-सा दर्शन भागवत धर्म का प्रमुख आधार है ?

उत्तर:- विशिष्टाद्वैत 

philosophy multiple choice questions and answers in hindi | दर्शनशास्त्र के प्रश्न उत्तर | शिक्षा से संबंधित प्रश्न और उत्तर

Indian Philosophy MCQs in Hindi

इस लेख में हमने भारतीय दर्शन से सम्बंधित महत्वपूर्ण  प्रश्नो के बारे में जाना । विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में  भारतीय दर्शन से जुड़े  सवाल पूछे जाते हैं । 

आशा करता हूँ कि भारतीय दर्शन का यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा , अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इस लेख को शेयर जरूर करें। 

बौद्ध धर्म क्या है?(Buddhism) सिद्धांत, संप्रदाय,चार आर्य सत्य [2022] Buddhism in Hindi

बौद्ध धर्म (Buddhism) | बौद्ध धर्म के सिद्धांत, संप्रदाय, चार आर्य सत्य

हेलो दोस्तों इस आर्टिकल में हम बौद्ध धर्म क्या है, बौद्ध धर्म की स्थापना किसने की? बौद्ध धर्म के सिद्धांत क्या हैं? इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप में जानेंगे। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध थे। बौद्ध धर्म में कर्मवाद को अधिक महत्व दिया जाता है। विभिन्न प्रतियोगी प्रतियोगी परीक्षा जैसे-UPSC,STATE PCS, RRB, NTPC, RAILWAY, BANKING PO, BANKING CLERK इत्यादि में बौद्ध धर्म से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। बौद्ध धर्म से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ें।

Buddhism

बौद्ध धर्म क्या है ? (What is Buddhism)

बौद्ध धर्म की उत्पत्ति भारत के श्रमण परम्परा से हुई है प्रारंभ में बौद्ध धर्म एक दर्शन के रूप में उभरा बाद में यह एक धर्म के रूप में परिवर्तित हो गया बुद्ध के सिद्धांतों को मानने वाले बौद्ध धर्म में सम्मिलित हो गए। धीरे- धीरे इनकी संख्या बढ़ती गयी और आज के समय में इनकी संख्या करोड़ों में है। 

बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध थे। शुद्धोधन इनके पिता (शाक्यगण के प्रधान) थे तथा महामाया (कोलियागण की राजकुमारी) माता थीं। 563 ई.पू. में लुम्बिनी(वर्तमान- नेपाल) में इनका जन्म हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था तथा कौडिन्य ने भविष्यवाणी की थी आगे चलकर यह बालक संन्यासी अथवा सम्राट बनेगा। 29 वर्ष की अवस्था में इन्होंने गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) किया। आलार कालाम इनके प्रथम गुरू थे तथा द्वितीय गुरू रूद्रक रामपुत्त थे। गया के निरंजना नदी के तट पर वट वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा के दिन इन्हें निर्वाण ज्ञान प्राप्त हुआ। 

ज्ञान प्राप्ति के बाद सुजाता नामक स्त्री द्वारा लाया गया खीर खाये। बुद्ध ने प्रथम उपदेश ऋषिवन (सारनाथ) में दिया (धर्मचक्रप्रवर्तन ) । 483 ई.पू. में कुशीनगर में चंद के घर इनका महापरिनिर्वाण (मृत्यु) हुआ।

इन्होंने सर्वप्रथम उपदेश मृगदाव (सारनाथ) में उपालि, आनंद, अश्वजीत, मोगल्लना एवं श्रेयपुत्रा को दिया । " बुद्ध ने सर्वाधिक उपदेश श्रावस्ती में दिये । प्रथम महिला भिक्षु प्रजापति गौतमी थीं।

बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य-

  1. दुःख - विश्व में सर्वत्रा दुःख ही दुःख है ।
  2. दुःख का कारण - दुःख उत्पन्न होने का मूल कारण तृष्णा 
  3. दुःख निरोध - दुःख निवारण के लिए तृष्णा को नष्ट करना अनिवार्य है। दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा दुःख के मूल अविद्या के नाश के लिए  
  4. दुःख निरोध का मार्ग :- तृष्णा से मुक्त होने के अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है- निर्वाण की प्राप्ति, जो कि इसी जन्म में प्राप्त किया जा सकता है। बौद्ध धर्म पर सांख्य दर्शन का प्रभाव है। कर्मवाद की मान्यता है तथा तर्क को प्रधानता प्राप्त है। बुद्ध आत्मा व ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं रखते थे। परंतु पुनर्जन्म में विश्वास था ।

बौद्ध का सिद्धांत (Buddhist doctrine)

  1. अष्टांगिक मार्ग- सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति एवं सम्यक् समाधि ।   
  2. प्रतीत्य समुत्पाद- प्रतीत्य समुत्पाद ही बुद्ध की संपूर्ण शिक्षाओं का सार एवं आधार स्तंभ है। इसका अर्थ है किसी वस्तु के होने पर किसी अन्य वस्तु की उत्पत्ति होना । 
  3. मध्यम प्रतिपदा - बुद्ध ने अति का निषेध करते हुए मध्यम मार्ग को अपनाने की सलाह दी । 
  4. जरामरण- विश्व के प्रत्येक प्रकार के दुःख का . सामूहिक नाम जरामरण है। 
  5. क्षणिकवाद - विश्व का प्रत्येक वस्तु निरंतर परिवर्तनशील है अर्थात् क्षणभुंगर है। 
  6. अनात्मवाद- बौद्ध धर्म आत्मा पर विश्वास नहीं करता है।
  7. अनीश्वरवाद- बौद्ध धर्म में इश्वर के अस्तित्व को नकारा गया है।  
  8. यथार्थवाद- बौद्ध धर्म में यथार्थ को महत्व दिया जाता है।

बौद्ध धर्म के संप्रदाय

हीनयान:- हीनयान अर्थात् छोटा वाहन । ये लोग बुद्ध के मौलिक सिद्धांतों पर विश्वास करने वाले रूढ़ीवादी थे। मूर्तिपूजा एवं भक्ति में विश्वास नहीं रखते थे। वे बुद्ध को केवल मार्गदर्शक स्वीकार करते थे ईश्वर नहीं।

महायान:- महायान अर्थात् बड़ा वाहन । ये लोग बुद्ध को ईश्वर मानते थे। ये मूर्तिपूजा एवं भक्ति में विश्वास रखते थे।इसमें बोधसत्व की अवधारणा है। महासंघिक सप्रदाय से प्रभावित इस मत की स्थापना प्रथम सदी में हुई।

  • इनकी प्रसिद्ध रचना माध्यमिक कारिका है। इन्होंने कश्मीर में संस्कृत में ग्रन्थ लिखे। वैभाषिक . प्रचलित इस मत के प्रमुख आचार्य वसुमित्रा एवं बुद्धदेव थे । 
  • शुन्यवाद या माध्यमिक इसके प्रवर्तक नागार्जुन थे। 
  • वज्रयान सातवीं सदी में तंत्र- मंत्र के प्रभाव से वज्रयान संप्रदाय का उद्भव हुआ। इसमें तारा क देवी को प्रमुख स्थान प्राप्त था। 

आज के इस पोस्ट में हमने बौद्ध धर्म के बारे में विस्तार से जाना। बौद्ध धर्म के अनुयायी पुरे विश्व में पाए जाते हैं बौद्ध धर्म से संबंधित प्रश्न प्रतियोगी परीक्षा में पुछे जाते रहते हैं ।

उम्मीद करता हूँ कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।  

  1. भौतिकी सम्बन्धी महत्वपूर्ण खोज
  2. वर्तमान भारतीय मुख्यमंत्रियों की सूची 2022
  3. भारतीय राज्यों के राज्यपालों की सूची 2022
  4. स्पूतनिक वी क्या है, कैसे काम करती है

1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी (Revolution of 1857 or The Indian rebellion in Hindi)

1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी (Special information about the Revolt of 1857 or the Indian Rebellion)

नमस्कार दोस्तों, आज के इस पोस्ट में हम 1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी  के बारे में जानेंगे। 1857 की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहते हैं।  1857 की क्रांति अंग्रेजी शासन को हटाने का भारतीयों का प्रथम संगठित प्रयास था। इस समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग एवं मुख्य सेनापति ऐनसन था। यह विद्रोह उपनिवेशवादी नीतियों एवं शोषण का परिणाम था। इस विद्रोह के कई कारण थे, जिनमें राजनीतिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सैनिकसामाजिक एवं धार्मिक कारण सभी थे। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- upsc,state psc,rrb, ntpc, railway, banking po, banking clerk इत्यादि में 1857 की क्रांति से जुड़े प्रश्न  पूछे जाते हैं।

Revolution of 1857 (The Indian rebellion)

इस विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बीयुक्त कारतूसों का प्रयोग था। 1857 का विद्रोह 29 मार्च 1857 को बैरकपुर (प.बंगाल) की छावनी से प्रारंभ हुआ तथा मई, 1857 में मेरठ के सैनिकों ने भी अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा दिया। मेरठ छावनी के सैनिक मंगल पांडे ने नये कारतूसों के विरुद्ध आवाज उठायी तथा 8 अप्रैल, 1857 को उन्हें फाँसी दे दी गई मंगल पांडे 34 इन्फैन्ट्री राइफल के जवान थे। इसके बाद यह विद्रोह तेजी से पूरे देश में फैल गया तथा अलग-अलग स्थानों पर इसे अलग-अलग लोगों ने नेतृत्व प्रदान किया।

1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी -

  • इस विद्रोह की वास्तविक शुरुआत 10 मई 1857 ईको मेरठ से हुई थी। 
  • अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की नींव साल 1857 में सबसे पहले मेरठ के सदर बाजार में भड़की, जो पूरे देश में फैल गई थी।
  • इस विद्रोह के शुरू होने की पूर्व निर्धारित तिथि 31 मई, 1857 थी।
  • 10 मई 1857 में शाम पांच बजे जब गिरिजाघर का घंटा बजा, तब लोग घरों से निकलकर सड़कों पर एकत्रित होने लगे थे।
  • 9 मई 1857 को कोर्ट मार्शल में चर्बीयुक्त कारतूसों को प्रयोग करने से इंकार करने वाले 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया था।
  • 10 मई 1857 की शाम को ही इस जेल को तोड़कर 85 सैनिकों को आजाद करा दिया था।
  • दिल्ली के सम्राट बहादुरशाह जफर कर रहे थे परन्तु यह नेतृत्व औपचारिक एवं नाममात्र का था।
  • 1857 विद्रोह के अन्नेय तृत्वकर्ता - जनरल बख्त खां (सैनिक नेतृत्व ) एवं बहादुरशाह जफर (असैनिक नेतृत्व), बेगम हजरत महल एवं विरजिस कादिर, नाना साहब (अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र), रानी लक्ष्मीबाई (राजा गंगाधरराव की विधवा), तात्या टोपे, मौलवी अहमद उल्ला (मूलत: मद्रास के बाद में फैजाबाद आ गए), खान बहादुर, कुंवर सिंह (जगदीशपुर की आरा रियासत के शासक), राव तुला राम 
  • 1857 विद्रोह के केंद्र - दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, झाँसी, ग्वालियर, फैजाबाद, बरेली, बिहार और फरीदाबाद।
  • 1857 के विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों के कई प्रमुख सेनापतियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ये इस प्रकार थे- 
    • 1.दिल्ली (लेफ्टिनेंट हडसन, लेफ्टिनेंट विलोवी, जॉन निकोलसन), 
    • 2. लखनऊ (जेम्स आउट्रम, हेनरी लारेंस, ब्रिगेडियर इंग्लिशहेनरी हैवलॉक, सर कोलिन कैम्पवेल), 
    • 3. झाँसी (सर ह्यू रोज), 
    • 4. कानपुर (कोलिन कैम्पबेल, सर ह्यू व्हीलर) एवं 
    • 5. बनारस (कर्नल जेम्स नील)। 
  • 1857 के इस विद्रोह की असफलता का प्रमुख कारण विद्रोहकर्ताओं में योग्य नेतृत्व एवं सामंजस्य का अभाव था। 
  • इस विद्रोह में सिंधिया, निजाम, भोपाल के नवाब आदि ने अंग्रेजों का साथ दिया था। 
  • इस विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत हो गया एवं ताज का शासन प्रारंभ हो गया।
  • सेना का पुनर्गठन एवं उसमें भारतीयों की संख्या में कमी की गई।
  • अंग्रेजों ने फूट डालो एवं राज करो की नीति अपना ली। 
  • इस विद्रोह के बारे में वीर सावरकर ने कहा कि "1857 का विद्रोह स्वधर्म और राजस्व के लिए लड़ा गया राष्ट्रीय संघर्ष था।" आर. सी. मजूमदार ने कहा कि "यह न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और यह स्वतंत्रता के लिए संग्राम भी नहीं था।"
  • जॉन लारेंस एवं सीले ने कहा कि "1857 का विद्रोह सिपाही विद्रोह मात्र था।"
  • जेम्स आउटूम एवं डब्ल्यू. बी. टेलर ने कहा कि "यह अंग्रेजों के विरुद्ध हिंदू एवं मुसलमानों का षड्यंत्र था।" •एल. आर. रीज ने कहा कि "यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध षडयंत्र था।"
  • बेंजामिन डिजरैली ने कहा कि "1857 का विद्रोह सचेत संयोग से उपजा राष्ट्रीय विद्रोह था।"
  • जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि "सन् सत्तावन का विद्रोह सिपाही विद्रोह नहीं, अपितु स्वतंत्रता प्राप्ति के निमित्त भारतीय जनता का संगठित संग्राम था।"
  • विपिन चंद्र ने कहा कि "1857 का विद्रोह विदेशी शासन से राष्ट्र को मुक्त कराने का देशभक्तिपूर्ण प्रयास था।"
इस पोस्ट में हमने 1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी के बारे में जाना। 1857 की क्रांतिभारतीय स्वतंत्रता की सबसे बड़ी लड़ाई थी, इसलिए 1857 की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहते हैं। 1857 की क्रांति से जुड़े प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाते हैं।


आशा करता हूँ की 1857 की क्रांति की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें। 

इन्हें भी पढ़ें -

    40+ Major Historical Place of India | भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल 2023

    भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल – Major Historical Place of India 

    नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल के बारे में जानेंगे। भारत के ये ऐतिहासिक स्थल भारत की संस्कृति तथा सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं। इसलिए इन ऐतिहासिक स्थलों के बार एमे हमें जरुर पता होना चाहिए।अगर आप सभी प्रमुख ऐतिहासिक स्थल के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट में शेयर किये गए पीडीऍफ़ नोट्स को डाउनलोड करके अध्ययन अवश्य करें।

    आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल  (Major Historical Place of India)  नोट्स शेयर करेंगे।

    Major Historical Place of India 


    भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल PDF

    भारतीय के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल का नाम और उसका वर्तमान स्थान-
     
    ऐतिहासिक स्थल का नामवर्तमान स्थान
    इंडिया गेट नई दिल्ली
    काँचीपुरम का मंदिर चेन्नई (तमिलनाडु)
    अजंता की गुफाएं औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
    गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई (महाराष्ट्र)
    मदन महल जबलपुर (मध्यप्रदेश)
    धार का किला धार (मध्यप्रदेश)
    चरार-ए-शरीफ श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)
    राष्ट्रपति भवन दिल्ली
    तुगलकाबाद दिल्ली
    नाहरगढ़ फोर्ट जयपुर (राजस्थान)
    मृगनयनी का महल ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
    सहेलियों की बाड़ी उदयपुर (राजस्थान)
    कोचीन का किला एर्नाकुलम (केरल)
    लाल किला दिल्ली
    चश्माशाही श्रीनगर (उत्तर प्रदेश)
    ताजमहल आगरा (उत्तर प्रदेश)
    सांची का स्तूप रायसेन (मध्यप्रदेश)
    उम्मेद भवन जोधपुर (राजस्थान)
    आगरा फोर्ट आगरा (उत्तर प्रदेश)
    जहाँगीर महल आगरा (उत्तर प्रदेश)
    शालीमार बाग श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)
    सुख निवास बूंदी (राजस्थान)
    जामा मस्जिद दिल्ली
    मक्का मस्जिद दिल्ली
    हावड़ा ब्रिज कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
    नटराज मंदिर चेन्नई (तमिलनाडु)
    हैंगिंग गार्डन मुंबई (महाराष्ट्र)
    टावर ऑफ लाइसेंस मुंबई(महाराष्ट्र)
    रणथम्भौर का किला सवाईमाधोपुर (राजस्थान)
    द्वारका काठियावाड़ (गुजरात)
    बोटनिकल गार्डन शिवपुर (पश्चिम बंगाल)
    काँचीपुरम का मंदिर चेन्नई (तमिलनाडु)
    हज़रत बल मस्जिद श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)
    फतह सागर उदयपुर (राजस्थान)
    जय समंद उदयपुर (राजस्थान)
    डीग महल डीग (राजस्थान)
    विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
    नाखुदा मस्जिद कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
    छत्र महल बूंदी (राजस्थान)
    रानी की बाड़ी बूंदी (राजस्थान)
    टीपू का महल बैंगालुरू (कर्नाटक)
    लाल बाग़ बैंगालुरू (कर्नाटक)
    बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
    छोटा इमामबाड़ा लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
    पंचमहल फतेहपुर सीकरी (उ. प्र.)
    जलमिन्दर पावापुरी (बिहार)
    महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन (मध्यप्रदेश)
    हवामहल जयपुर (राजस्थान)
    आमेर का किला जयपुर (राजस्थान)
    वेलूर मठ कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

    Major Historical Place of India | भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल 2022


    1.इण्डिया गेट-  इण्डिया गेट (मूल रूप से अखिल भारतीय युद्ध स्मारक कहा जाता है), नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित ४२ मीटर ऊँचा विशाल means है। यह स्वतन्त्र भारत का राष्ट्रीय स्मारक है, जिसे पूर्व में किंग्सवे कहा जाता था। इसका डिजाइन सर एडवर्ड लुटियन्स ने तैयार किया था। यह स्मारक पेरिस के आर्क डे ट्रॉयम्फ़ से प्रेरित है। इसे सन् १९३१ में बनाया गया था।

    भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल – Major Historical Place of India PDF


    ऐतिहासिक स्थल कौन कौन से हैं?

    भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल- 
    • ताज महल, आगरा
    • कुतुब मीनार, दिल्ली
    • लाल किला, दिल्ली
    • हुमांयू का मकबरा
    • फतेहपुर सीकरी
    • हवा महल, जयपुर
    • खजुराहो मंदिर
    • सांची स्तूप

    भारत का क्या ऐतिहासिक महत्व है?

    यहां मध्य कालीन भारत से जुड़े अनको स्थल है फिर चाहें वह दिल्ली का कुतुबमीनार, हुमायु तुंब एवं लालकिला हो या आगरा का ताजमहल, अंजता की प्राचीन गुफाओं से लेकर वर्तमान के इंडिया गेट तक ऐसी कई प्राचीन और नवीनतम ऐतिहासिक इमारतें, झरने, मंदिर एवं गुफाएं भारत में स्थित हैं जो भारत को एक अतुल्य भारत का दर्जा प्रदान करती हैं।

    Your Queries Solve in This Page

    1. भारत के मानचित्र में ऐतिहासिक स्थल
    2. भारत के पर्यटन स्थल PDF
    3. ऐतिहासिक स्थल के नाम
    4. भारत के विभिन्न राज्यों के ऐतिहासिक स्थलों के नाम
    5. 20 इमारतों के नाम
    6. ऐतिहासिक स्थल का वर्णन
    7. प्रमुख स्थलों के नाम
    8. प्राचीन स्थलों के नाम

    Major Historical Place of India 

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    70+ Mughal Empire GK in Hindi | मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण जीके 2023

    मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण जीके | मुगल साम्राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

    हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण जीके के बारे में जानेंगे। मुगल काल के परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न | मुगल साम्राज्य के इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न- Mughal Empire मुग़ल काल को भारत के इतिहास का सबसे लंबा और सबसे जटिल काल कहा जाना कोई गलत नहीं होगा. मुग़ल काल में कई ऐसी घटनाएं घटी जिसने पूरा इतिहास की बदल कर रख दिया.

     और उन्ही  | मुगल साम्राज्य के इतिहास  से जुडी कई महत्वपूर्ण और रोचक प्रश्नोत्तर आज भी कई परीक्षाओ में पूछा जाता हैं. Mughal Empire पर बनी कई फिल्मे व कहानियां भी आपने पढ़ी या सुनी होगी और उनमे से कई सवाल भी आपके मन में होंगे. आज के इस लेख में हम Mughal Empire gk से जुडी कुछ महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान को जानने वाले हैं. 

    Mughal Empire GK in Hindi

    मुगलकाल (1526 ई.-1857 ई.) | Mughal Empire GK Questions in Hindi

    1. 📌 'जाब्ती प्रणाली' किसकी उपज थी? -शेरशाह की

    2. 📌 ईरान के शाह और मुगल शासकों के बीच झगड़े को जड़ क्या थी? -कंधार

    3. 📌 मुमताज महल का असली नाम था -अर्जुमन्द बानो बेगम

    4. 📌 किस मुगल बादशाह को 'जिन्दा पीर' कहा जाता था?-औरंगजेब को

    5. 📌 अकबर द्वारा बनाई गई कौन-सी इमारत का नक्शा बौद्ध विहार की तरह 8? -पंचमहल

    6. 📌 अन्तिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर थे। उनके पिता का नाम था -अकबर शाह

    7. 📌 अकबर ने सर्वप्रथम वैवाहिक संबंध राजपूतों के जिस गृह से स्थापित किये, वह था -कछवाहों से

    8. 📌 औरंगजेब ने दक्षिण में जिन दो राज्यों को विजित किया था, वे थे -गोलकुंडा एवं बीजापुर

    9. 📌 किस मुगल बादशाह ने अपनी आत्मकथा फारसी में लिखी?-जहाँगीर

    10. 📌 मुगलों ने नवरोज/नौरोज का त्योहार लिया -पारसियों से

    11. 📌 कौन-सा मकबरा द्वितीय ताजमहल' कहलाता है? -बिया-उद्दीरानी का मकबरा/बीबी का मकबरा

    12. 📌 किस बादशाह के अन्तर्गत मुगल सेना में सर्वाधिक हिन्दू सेनापत्ति थे? -औरंगजेब के

    13. 📌 किस इतिहासकार ने अकबर द्वारा प्रतिपादित 'दीन-ए-इलाही' को एक धर्म कहा? -अबुल फजल ने

    14. 📌 'अनवार-ए-सुहैलो' ग्रन्थ किसका अनुवाद है? -पंचतंत्र का

    15. 📌 धरमत का युद्ध (अप्रैल 1658) किनके बीच लड़ा गया? -औरंगजेब और दारा शिकोह के

    16. 📌 जहाँगीर के दरबार में पक्षियों का सबसे बड़ा चित्रकार था -मंसूर

    17. 📌 किसने मुगलकाल में ऐतिहासिक विवरण लिखा? -गुलबदन बेगम ने

    18. 📌 प्रसिद्ध संगीतज्ञ तानसेन का मकबरा स्थित है -ग्वालियर में

    19. 📌 गुलबदन बेगम पुत्री थी -बाबर की

    20. 📌 मुगल प्रशासन में जिले को किस नाम से जाना जाता था? –सरकार

    21. 📌 किस सिक्ख गुरु की मृत्यु के लिए औरंगजेब जिम्मेदार है? -गुरु तेग बहादुर

    22. 📌 दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद का निर्माण किसने किया?-शाहजहाँ

    23. 📌 किस मुसलमान विद्वान का हिन्दी साहित्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण योगदान -अब्दुर्रहीम खानखाना का

    24. 📌 अकबर द्वारा बनाई गई श्रेष्ठतम इमारतें पायी जाती है -फतेहपुर सीकरी में

    25. 📌 हल्दीघाटी युद्ध (1576) के पीछे अकबर का मुख्य उद्देश्य था -राणाप्रताप को अपने अधीन लाना

    26. 📌 मुगल सम्राट अकबर के समय का प्रसिद्ध चित्रकार था -दशवंत

    27. 📌 अकबर के शासनकाल में पुनर्गठित केन्द्रिक प्रशासन तंत्र के अन्तर्गत सैनिक भाग का प्रमुख या -मीर बख्शी

    28. 📌 किसने अकबर की कब्र को खोदकर उसकी हड्डियों को जला दिया? -राजाराम ने

    29. 📌 अकबर का सबसे अन्तिम विजय अभियान था -असीरगढ़ विजय

    30. 📌 अकबर के 'नवरत्न में से एक बीरबल किस अभियान के समय मारे गये? -युसूफजाइयों के विद्रोह को दबाते समय

    31. 📌 अकबर ने किसे' कविराय'/ कविराज' की उपाधि दी? -बीरबल को

    32. 📌 जहाँगीर के निर्देश पर किसने अबुल फजल की हत्या कर दी? -वीरसिंह बुंदेला ने

    33. 📌 मेवाड़ से युद्ध तथा चित्तौड़ को संधि किसके शासनकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि है? -जहाँगीर की

    34. 📌 अन्तिम रूप से जजिया कर समाप्त करने वाला मुगल बादशाह था -मुहम्मदशाह 'रंगीला'

    35. 📌 'अकबरनामा' किसने लिखा? -अबुल फजल ने

    36. 📌 एतमाद-उद्-दौला का मकबरा आगरा में किसने बनवाया?-नूरजहाँ ने

    37. 📌 राजपूताना के राज्यों में से किस एक ने अकबर की सम्प्रभुता स्वीकार नहीं की थी? -मेवाड़ने

    38. 📌 किस मध्यकालीन भारतीय शासक ने 'पट्टा' एवं 'कबूलियत' की प्रथा आरम्भ की थी? -शेरशाह ने

    39. 📌 मुगल सम्राट् औरंगजेब कौन-सा वाद्य-यंत्र बजाते थे? -वीणा

    40. 📌 जहाँगीर को कहाँ दफनाया गया? -लाहौर में

    41. 📌 प्रसिद्ध जैन आचार्य कौन थे जिनको अकबर ने बहुत सम्मानित किया था? -हरिविजय सूरी

    42. 📌 लंदन में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के गठन के समय भारत का कौन बादशाह था? -अकबर

    43. 📌 शाहजहाँ के काल में कान यूरोपीय यात्री भारत आया? -पीटर मुण्डी

    44. 📌 अकबर ने दीन-ए-इलाही' प्रारम्भ किया -1582 में दिल्ली का पुराना किला किसके द्वारा बनवाया गया? -शेरशाह के

    45. 📌 अपने पूर्वजों की उपाधि मिर्जा को त्यागकर बावर ने कौन-सी उपाधि धारण की? -पादशाह की

    46. 📌 अफगानों की शक्ति को बाबर ने किस युद्ध में कुचला-घाघरा युद्ध में

    47. 📌 बाबर की उदारता के कारण उसे कौन-सी उपाधि दी गई? -कलन्दर की

    48. 📌 भारत विजय के उपलक्ष्य में बाबर से कोहेनूर हीरा किसे प्राप्त हुआ? -हुमायूँ को

    49. 📌 हुमायूँ से सहायता की याचना हेतु किसने उसे राखौं भेजी? -राजमाता कर्णवती (चित्तौड़) ने

    50. 📌 अबुल फजल ने हुमायूँ को क्या कहकर सम्बोधित किया? -इंसान-ए-कामिल

    51. 📌 किस शासक ने स्वयं ही सुल्तान-उल-अदल की उपाधि धारण की थी? -शेरशाह ने

    52. 📌 शेरशाह ने कौन सा नया सिक्का प्रचलित किया? -रुपया

    53. 📌 सिक्कों पर शेरशाह का नाम और पद किस लिपि में लिखे गए हैं? -देवनागरी में

    54. 📌 शेरशाह द्वारा बनवाई गई 1700 सरायों का प्रबन्ध कौन करता था? -शिकदार

    55. 📌 अकबर की माता का नाम क्या था? -हमीदा बानू बेगम

    56. 📌 अकबर के राजकवि तथा प्रसिद्ध संगीतकार कौन थे? -तानसेन

    57. 📌 अकबर ने मालवा पर विजय कब प्राप्त की? -1561 ई. में

    58. 📌 1561 ई. में मालवा का शासक कौन था? -बाज बहादुर

    59. 📌 शाहजहाँ का रत्नजड़ित सिंहासन किस नाम से जाना जाता है? -तख्ने ताऊस

    60. 📌 तख्ते ताऊस में कौन-सा हीरा जुड़ा हुआ था? -कोहेनूर

    61. 📌 सिक्कों पर कलमों का लिखा जाना किसने बन्द कराया?-औरंगजेब ने

    62. 📌 मुसलमानों पर लगने वाले किस कर को बाबर ने समाप्त कर दिया? -तमगा मुवइयान नामक

    63. 📌 पद्य शैली का विकास किसने किया था? -बाबर ने

    64. 📌 हुमायूँ जीवन भर लड़खड़ाता रहा और लड़खड़ाते हुए जान दे दी, किसने कहा? -लेनपूल ने

    65. 📌 नुशरत शाह को पराजित करने के पश्चात् शेरखाँ ने कौन-से उपाधि धारण की? -हजरतेआला की

    66. 📌 शेरशाह के मकबरे को ताजमहल से भी सुन्दर किसने कहा? -कनिंघम ने

    67. 📌 बुद्धिमत्ता और अनुभव में वह दूसरा हैदर था - शेरशाह के बारे में किसने में कहा? -अब्बास खां ने

    68. 📌 गुजरात विजय को स्मृति में अकबर ने किस इमारत का निर्माण करवाया? -बुलंद दरवाजा (फतेहपुर सीकरी)

    69. 📌 दक्षिण का प्रवेश द्वार किसे माना जाता है? -खान देश को

    70. 📌 औरंगजेब ने सती प्रथा पर कब प्रतिबन्ध लगाया? -1663 ई. में

    71. 📌 अकबर के शासनकाल में प्रधानमंत्री को किस नाम से जाना जाता था? -वकील

    72. 📌 सैट निकालिया कौन होता था? -मीर बख्शी

    73. 📌 शाल किला कहाँ स्थित है? -इलाहाबाद में

    दोस्तों उम्मीद हैं की इस  मुग़ल काल GK प्रश्नोत्तरी से आपने बहुत कुछ सिखा होगा और कई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियों को भी जाना होगा जो की आपको परीक्षा की दृष्टि से भी मदद करती हैं. 

    आशा करता हूँ कि यह लेख आपके लिए मदद गार साबित होगी,अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें।


    मुगलकाल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (Important facts related to Mughal period in Hindi)

    📌GK Question about Mughal Empire in Hindi (मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य)

    नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम मुगलकाल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जानेंगे। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं  जैसे- UPSC, STATE PCS,SSC,RRB,NTPC,RAILWAY, BANKING PO, BANKING CLERK, NET /JRF,CDS.S.I..POLICE इत्यादि में मुगलकाल से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। मुगलकाल भारतीय इतिहास में अपनी एक अलग ही पहचान बनाये हुए हैं। मुग़ल काल प्रतापी राजाओं का काल था। मुग़ल काल में ही कला संस्कृति के विकास को फिर से बढ़ावा मिलने लगा।

    Mughal Empire GK Questions In Hindi

    मुगलकाल (1526 ई.-1857 ई.) | Mughal Empire GK Questions In Hindi

    1. 📌 मुगल वंश का संस्थापक कौन था? -बाबर

    2. 📌 1526 ई. में बाबर ने किस वंश के शासक को परास्त कर मुगल साम्राज्य की नींव डाली? -लोदी वंश के

    3. 📌 पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ? -21 अप्रैल, 1526

    4. 📌 भारत में ग्रांड ट्रंक रोड बनवाई थी -शेर शाह

    5. 📌 सूरी ने गुजरात विजय की यादगार में अकबर ने किसका निर्माण कराया था? -बुलंद दरवाजा

    6. 📌 'आइन-ए-अकबरी' एक महान् ऐतिहासिक कृति किसके द्वारा लिखी गई थी? -अबुल फजल के

    7. 📌 अप्रैल, 1956 को पानीपत की दूसरी लड़ाई किसके बीच हुई थी? -अकबर और हेमू के

    8. 📌 'दीन-ए-इलाही' नामक नया धर्म किसके द्वारा शुरू किया गया था? -अकबर के द्वारा

    9. 📌 मुगल प्रशासन व्यवस्था में मनसबदारी प्रणाली को किसने प्रारम्भ किया ? -अकबर ने

    10. 📌 अपने काल का महान् संगीतज्ञ तानसेन किसके दरबार में थे?-अकबर

    11. 📌 मुगलकाल की राजभाषा कौन थी? -फारसी

    12. 📌 मुगल चित्रकारी ने किसके शासनकाल में पराकाष्ठा/चरमोत्कर्ष प्राप्त किया? - जहाँगीर के

    13. 📌 किसने अकबर की जीवन-कथा लिखी थी? -अबुल फजल ने

    14. 📌 किस मुगल शासक ने भारत की वनस्पतियों और प्राणी जगत्, ऋतुओं और फलों का विशद् विवरण अपनी दैनन्दिनी (डायरी) में दिया है? -बाबर ने

    15. 📌 शेरशाह की महानता का द्योतक क्या है? -प्रशासनिक सुधार

    16. 📌 'हुमायूँनामा' किसने लिखा था? -गुलबदन बेगम ने

    17. 📌 अकबर के शासन में 'महाभारत' का फारसी भाषा में अनुवाद किया गया था, वह किस नाम से जाना जाता है? -रज्पनामा (जंग की किताब)

    18. 📌 किस मुगल सम्राट् ने सैय्यद भाइयों को गिराया? -मुहम्मदशाह ने

    19. 📌 कौन अन्तिम मुगल सम्राट् थे? - बहादुर शाह जफर

    20. 📌 अकबर के शासनकाल में भूराजस्व सुधारों के लिए कौन उत्तरदायी था? - टोडरमल

    21. 📌 अकबर द्वारा बनवाए गए उपासना-भवन/पूजा-गृह का क्या नाम था? - इबादतखाना

    22. 📌 सुप्रसिद्ध संगीतज्ञद्वय तानसेन और बैजू बावरा किसके शासनकाल में सुविख्यात थे? -अकबर के

    23. 📌 'रामचरितमानस' के लेखक तुलसीदास किसके शासनकाल से सम्बन्धित थे? -अकबर के

    24. 📌 बाबर मूल रूप से कहाँ का शासक था? -फरगना का

    25. 📌 किसने मुगल साम्राज्य की राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानान्तरित की? -शाहजहाँ ने अकबर के युवावस्था में उसका संरक्षक था -बैरम खाँ

    26. 📌 किस स्थान पर नादिरशाह ने चढ़ाई नहीं की थी? -कन्नौज

    27. 📌 किसने ऐसे बाग-बगीचे, जिसमें बहता पानी हो, के निर्माण को परम्परा की शुरुआत की थी? -बाबर ने

    28. 📌 राजा बीरबल की उपाधि किसे दी गई थी? -महेश दास को

    29. 📌 औरंगजेब ने ज्यादा भवनों का निर्माण नहीं करवाया क्योंकि -उसे अपने शासनकाल में निरन्तर युद्ध करने पड़े

    30. 📌 किस मुगल शासक का दो बार राज्याभिषेक हुआ? -औरंगजेब का

    31. 📌 ग्रांड ट्रंक सड़क जोड़ती है -कोलकाता व अमृतसर को

    32. 📌 वर्ष 1526 ई. में लड़ी गई पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर से कौन पराजित हुआ था? -इब्राहिम लोदी

    33. 📌 शेरशाह सूरी का मकबरा कहाँ स्थित है? -सासाराम में (बिहार)

    34. 📌 अकबर का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था? -कालानौर में

    35. 📌 गुरु अर्जुनदेव (सिखों के 5वें गुरु) समकालीन थे -जहाँगीर के

    36. 📌 किस राजपूत वंश ने अकबर के सामने समर्पण नहीं किया था? -सिसोदिया वंश ने

    37. 📌 किस मुगल शासक को 'आलमगीर' कहा जाता था? -औरंगजेब को

    38. 📌 सम्राट अकबर द्वारा किसको 'जरीकलम' की उपाधि से अलंकृत किया गया था? -मोहम्मद हुसैन को

    39. 📌 बाबर ने पहली बार पश्चिम से कहाँ होकर भारत में प्रवेश किया?-पंजाब

    40. 📌 हल्दीघाटी का युद्ध कब लड़ा गया? -1576 ई. में

    41. 📌 फैजी किसके दरबार में रहा? -अकबर के

    42. 📌 किसके समय में मलिक मोहम्मद जायसी ने 'पद्मावत' की रचना की? -शेरशाह के

    43. 📌 किसने चौसा की लड़ाई (1539 ई.) में हुमायूँ को पराजित किया था? -शेरशाह ने

    44. 📌 हुमायूँ का मकबरा कहाँ है? -दिल्ली में

    45. 📌 किस मुगल शासक ने दो बार शासन किया? -हुमायूँ ने

    46. 📌 भारत में बीबी का मकबरा स्थित है -औरंगाबाद में

    47. 📌 फतेहपुर सीकरी स्थित लाल पत्थर से निर्मित शेख सलीम चिश्ती के मकबरे को किसने संगमरमर का करवाया? -जहाँगीर ने

    48. 📌 किस मुगल शासक को पहले आगरा में दफनाया गया बाद में उसकी एक अफगान विधवा शव को काबुल ले गयी और वहीं एक बाग में दफनाया? -बाबर को

    49. 📌 किस युद्ध को जीतने के बाद शेरशाह ने दिल्ली में अफगान सत्ता की स्थापना की? -बिलग्राम का युद्ध

    50. 📌 शाहजहाँ ने किस शहर में मोती मस्जिद बनवाई थी? -आगरा में

    51. 📌 किस मुगल बादशाह ने जजिया नामक कर पुनः लगाया? -औरंगजेब

    52. 📌 अकबर के शासनकाल में 'अमलगुजार' नामक अधिकारी का कार्य था -भूमि राजस्व का मूल्यांकन और संग्रह करना

    53. 📌 शिवाजी ने मुगलों को किस संधि के द्वारा किलों को हस्तान्तरित किया? -पुरंदर की संधि

    54. 📌 मुगल प्रशासन में 'मुहसिब' था -लोक आचरण अधिकारी

    55. 📌 कौन-सा मुगल बादशाह पहले तो अंग्रेजों का कैदी रहा और बाद में जीवनपर्यन्त मराठी का पेंशनभोगी रहा? -शाहआलम ॥

    56. 📌 दक्षिण में किसके शासन में मुगल साम्राज्य तमिल राज्य-क्षेत्र तक फैला? -औरंगजेब के

    57. 📌 किस मुगल बादशाह की मृत्यु दीनपनाह पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरने के कारण हुई? - हुमायूँ की

    58. 📌 'दास्तान-ए-अमीर हम्जा' का चित्रांकन किसके द्वारा किया गया? -अब्दुस् समद द्वारा

    59. 📌 किस सुल्तान ने पहले 'हजरत-ए-आला' की उपाधि अपनाई और बाद में -शेरशाह सूरी ने

    60. 📌 किस मुगल बादशाह को वजीर गाजीउद्दीन ने दिल्ली में दाखिल नहीं होने दिया? -शाह आलम द्वितीय को

    61. 📌 मसनवी जो बाबर द्वारा मुस्लिम कानून नियमों का संग्रह है- मुवायीन

    62. 📌 औरंगजेब द्वारा चलाये जिहाद का अर्थ है -दार-उल-इस्लाम (दारूल इस्लाम)

    63. 📌 दिल्ली के लाल किले का निर्माण किसने करवाया था? -शाहजहाँ ने

    64. 📌 किस इतिहासकार ने शाहजहाँ के शासनकाल को 'मुगलकाल का स्वर्णयुग' कहा है? -ए. एल. श्रीवास्तव ने

    65. 📌 पटना को प्रान्तीय राजधानी बनाया था -शेरशाह ने

    66. 📌 मयूर सिंहासन ('तख्त-ए-ताऊस') पर बैठने वाला अन्तिम मुगल बादशाह कौन था? -मुहम्मद शाह रंगीला

    67. 📌 किसमें हिन्द तथा ईरानी वास्तुकला का सर्वप्रथम समन्वय देखने को मिलता है? -शेरशाह के मकबरे में

    68. 📌 शेर शाह के बचपन का नाम था -फरीद खाँ

    69. 📌 शेर शाह को उसके पिता हसन खाँ ने एक जागीर के प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया था, वह जागीर थी -सहसराम/सासाराम

    70. 📌 पानीपत के युद्ध में बाबर की जीत का मुख्य कारण क्या था? -उसकी सैन्य कुशलता

    आज के इस लेख में हमने मुगलकाल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जाना। यह लेख कम शब्दों में महत्वपूर्ण प्रश्नों को संग्रित करता है जिससे कम समय में आपकी तयारी अधिक हो सके।

    आशा करता हूँ कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगी अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें।

    प्राचीन भारत GK One Liner questions and answers

    प्राचीन भारत GK One Liner questions and answers


    हेलो दोस्तों, आज के इस पोस्ट में हम प्राचीन भारत के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण वन लाइनर प्रश्नों के बारे में जानेंगे। इस पोस्ट के माध्यम से आपको कम शब्दों में प्राचीन भारत के इतिहास से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकरी प्राप्त हो जाएगी। प्राचीन भारत से जुड़े प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- UPSC,STATE PCS, RRB, NTPC, SSC RAILWAY, BANKING PO, IBPS इत्यादि में पूछे जाते हैं। 
    प्राचीन भारत GK One Liner


    India Gk One Liner questions and answers

    • किस विदेशी यात्री ने भारत का दौरा सबसे पहले किया था?- मेगस्थनीज 

    • शून्य की खोज किसने की? - आर्यभट्ट 

    • किस पुस्तक का 15 भारतीय और 40 विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है? - पंचतंत्र 

    • न्यूमिसमेटिक्स (Nurmismatics) क्या है? -सिक्कोंय 

    • धातुओं का अध्ययन 'हितोपदेश' के लेखक है -नारायण पंडित 

    • नाट्यशास्त्र की रचना किसने की? -भरत मुनि 

    • 'इतिहास के पिता' (The Father of History) की पदवीं सही अर्थों में किससे सम्बन्धित है? -हेरोडोट्स 

    • प्राचीन नगर तक्षशिला किसके बीच स्थित था? -सिन्धु व झेलम

    • >>विश्व की प्राचीन सभ्यताएं कौन-कौन है?
    • वह अंग्रेज कौन था जिसने सर्वप्रथम 'भगवद्गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया था? -चार्ल्स विल्किन्स

    • पुरापाषाण काल में आदिमानव के मनोरंजन के साधन थे -शिकार

    • किसको चाल्कोलिथिक एज (ChaleolithicAge) कहा जाता है? -ताम्रपाषाण युग

    • 'स्वप्नवासवदत्ता' के लेखक है - भास 

    • नालंदा विश्वविद्यालय किसलिए विश्व प्रसिद्ध था? - तकशास्त्र के लिए 


    • उस स्रोत का नाम बतलाएँ जो प्राचीन भारत के व्यापारिक मार्गों पर मौन है -मिलिंदपण्डो 

    • आधुनिक मानव के हाल का पूर्वज है - को-मैग्नन मनुष्य

    • ईसा की प्रारम्भिक सदियों में भारत तथा रोम के बीच पनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्धों की सूचना किस पुरास्थल की खुदाई से प्राप्त होती है? -अरिकमेडू 

    • आधुनिक देवनागरी लिपि का प्राचीनतम रूप है -ग्राही मानव द्वारा 

    • सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज था -चावल - काव्य शैली का प्राचीनतम नमूना किसके अभिलेख में मिलता है? -रुददमन के 

    • कौन-सा बंदरगाह पोडके' नाम से 'दी पेरिप्लस ऑफ द इरिथियन सी' लाल सागर का भ्रमण) के अज्ञातनामा लेखक को ज्ञात था?-अरिकमेडु

    • ताम्राश्म/ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age) में महाराष्ट्र के लोग मृतकों के घर के फर्श के नीचे किस तरह रखकर दफनाते थे? -उत्तर से दक्षिण की ओर 

    • भीमबेटका किसके लिए प्रसिद्ध है? -गुफाओं के शैलचित्र प्राचीन भारत में कौन-सौ लिपिदायों और से बायर्स और लिखी जाती थी? -खरोष्ठी 

    • 'मालती माधव' के लेखक थे -भवभूति 

    • 'मुद्राराक्षस' नामक पुस्तक का लेखक कौन था? विशाखदत्त 

    • किस वंश के राजाओं ने खजुराही स्थित मन्दिरों का निर्माण करवाया था? चंदेल वंश के आबू का 

    • जैन मन्दिर किससे बना है? संगमरमर से 

    • एलीफेंटा की गुफाएँ मुख्यतः किस धर्म के मतावलंबियों के उपयोग के लिए काटकर बनाई गई थी? शैव धर्म के 

    • एलीफेंटा के प्रसिद्ध शैल को काटकर बनाए गए मन्दिरों का श्रेय दिया जाता है? राष्ट्रकूटों को अर्जता और 


    • एलोरा की गुफाएँ किस नगर में स्थित है? औरंगाबाद में 

    • कोणार्क का सूर्य मन्दिर किसने बनवाया था?  नरसिंहदेव वर्मन ने 

    • किस मन्दिर को काला पैगोडा के नाम से जाना जाता है?  कोणार्क का सूर्य मन्दिर

    • कदम्ब वंश की स्थापना किसने की? राजा मयूर शर्मा ने

    • बौध्द धर्म की एनसाइक्लोपीडिया कहा जाता है? महाविभाष को

    • रंगीन ग्रे वेयर संस्कृति किस काल की थी?  उत्तरवैदिक काल की

    • ‘जोरवे संस्कृति’ कब की थी? ताम्र काल की

    • मयूर शर्मा ने किस वंश की स्थापना की?  कदम्ब  वंश के

    • किस राजा ने पेशावर में बौद्ध मठ का निर्माण कराया?  कनिष्क ने

    • सिंधु घाटी सभ्यता का कौन सा क्षेत्र समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध था?  लोथल

    • कौन सा काल गुप्त काल के समान था?  वल्लभी काल

    • ‘भारत का नेपोलियन’ किसे कहा जाता है?   समुद्र गुप्त को

    • किस युग में मानव जनसंख्या में निश्चित वृद्धि हुई? मध्य पाषाण काल में

    • गुप्त वंश के राजाओं की राजधानी का नाम क्या था? पाटलीपुत्र

    • शकों ने भारत में आने के लिए किसका इस्तेमाल किया? बोलन दर्रा

    • मौर्य साम्राज्य में बाजार की देखभाल कौन करता था? समस्ताध्यक्ष
    आज के इस पोस्ट के माध्यम से हमने प्राचीन भारत के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण वन लाइनर प्रश्नों के बारे जाना। भारत के इतिहास को तीन भागों में बांटा गया है। उसमे से एक भाग प्राचीन भारत का इतिहास है।

    उम्मीद करता हूँ कि प्राचीन भारत की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी, अगर पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें। 

    पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence in Hindi)

    पूर्ण स्वराज्य के बारे में जानकारी | Complete Independence in Hindi - pdf download

    आज के इस आर्टिकल में हम भारत के स्वतंत्रता के इतिहास के बारे में जानेंगे। पूर्ण स्वराज्य के लिए किये अथक प्रयासों के बारे में विस्तार से जानेंगे। पूर्ण स्वराज्य की लड़ाई बहुत ही लम्बी और चुनौती पूर्ण रही। इसके लिए भारत के अनेक महापुरुषों द्वारा अलग अलग नीतियाँ अपनाई गयीं। बहुत सारे विरोध प्रदर्शन हुए। बहुत सारे वीरों ने अपने प्राण गंवा दिए। तब जाकर 15 अगस्त 1947 को भारत को पूर्ण स्वराज्य की प्राप्ति हुई पूर्ण स्वराज्य से जुड़े प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- UPSC, STATE PCS, RRB, SSC, NTPC, RAILWAY, BANKING PO, BANKING CLERK, IBPS इत्यादि में पूछे जाते हैं।


    पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) : 9 दिसम्बर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। जवाहरलाल नेहरू 31 दिसम्बर 1929 अध्यक्ष चुने गये थे।

    उस दौरान कुछ घटनाएँ हुई थी, जिसके बारे में संक्षिप्त जानकारी हम आपको दे रहे है-

    पूर्ण स्वराज्य Complete Independence


      कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज्य की मांग-

      • कांग्रेस ने 31 दिसम्बर, 1929 को लाहौर अधिवेशन में रावी नदी के तट पर पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव स्वीकार किया।
      • इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ने का निश्चय किया गया। कांग्रेस ने प्रथम गोल मेज सम्मेलन (1930) में भी भाग न लेने का निश्चय किया।

      सविनय अवज्ञा आंदोलन-

      • इस समय भारत में भयंकर आर्थिक मंदी का प्रकोप हुआ जिससे देश में बेरोजगारी फैली और छंटनी आदि के कारण देश के मजदूर भी सरकार के विरुद्ध आंदोलन में कूद पड़े।
      • सन् 1930 में देश में चारों ओर उत्तेजना का वातावरण था। नेहरू रिपोर्ट को सरकार ने नामंजूर कर दिया और अपनी हठधर्मी पर अड़ी रही।
      • ऐसी स्थिति में कांग्रेस ने गांधी जी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू करने का विचार बनाया। 
      • फरवरी 1930 में साबरमती सम्मेलन में आंदोलन छेड़ने के लिए गांधी जी को समस्त अधिकार प्रदान कर दिए गए फिर भी गांधी जी ने वायसराय को एक मौका और दिया।

      डांडी मार्च-

      • 12 मार्च, 1930 को गांधी जी तथा अन्य नेताओं ने डांडी की ओर प्रस्थान किया।
      • यही उनका प्रसिद्ध डांडी मार्च था। 6 अप्रैल, 1930 को गांधीजी ने स्वयं नमक कर कानून तोड़ कर नमक बनाया।
      • यह आंदोलन सगुणा देश में फैल गया।
      • सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए बल प्रयोग किया।
      • इस आंदोलन में लगभग हजार सत्याग्रहियों को जेलों में लूंसा गया।
      • जनता ने भी हिंसा का आश्रय लिया, पुलिस ने 25 व्यक्तियों को गोली से मार कर इसका बदला लिया। 
      • पेशावर में तो 24 अप्रैल से4 मई, 1930 तक अंग्रेजी शासन नहीं रहा।
      • वहां सीमान्त गांधी (बादशाह खान) के खुदाई खिदमतगारों ने व्यवस्था कायम रखी।
      • बाद में सेना ने पेशयम में पहुंचकर मशीन गनों से खुदाई खिदमतगारों को भून दिया।
      • इसी समय एक गढ़वाली प्लाटून ने अपने पाय भाइयों पर गोली चलाने से इन्कार कर दिया।

      1935 का गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट-

      • इस एक्ट के तहत प्रान्तों में द्वैध शासन समाप्त करके उत्तरदायी शासन की स्थापना की गई। लेकिन प्रान्तीय गवर्नरों को स्वविवेक से काम करने के व्यापक अधिकार दिए गए।
      • एक्ट के तहत चुनाव हुए और कांग्रेस को 11 में से 6 प्रान्तों में स्पष्ट बहुमत मिला।
      • 1937 में कांग्रेस के मंत्रिमंडल प्रान्तों में तब बने जब गवर्नरों ने इस बात का आश्वासन दे दिया कि वे दिन-प्रतिदिन के शासन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
      • पंजाब, सिन्ध और बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकारें बनी। कांग्रेस के मंत्रिमंडलों ने जन हित के अनेक कार्य किये।

      द्वितीय विश्व युद्ध-

      • सितम्बर 1939 में यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध आरंभ हो गया।
      • वायसराय ने भारतीयों की सहमति लिए बिना भारत को इस युद्ध में शामिल घोषित कर दिया।
      • इसके विरोध में प्रान्तों के कांग्रेसी मंत्रिमंडलों ने अक्टूबर में त्यागपत्र दे दिए।
      • कांग्रेस ने मांग की कि ब्रिटिश सरकार युद्ध के उद्देश्यों तथा भारत संबंधी नीति के बारे में स्पष्ट घोषणा करे। 
      • कांग्रेसी मंत्रिमंडलों के त्यागपत्र देने पर मुस्लिम लीग को खुशी हुई और उसने 22 दिसम्बर को देश में 'मुक्ति दिवस' मनाया।

      सशर्त सहयोग का प्रस्ताव-

      • कांग्रेस ने जुलाई 1940 में युद्ध के बाद पूर्ण स्वतंत्रता और केन्द्र में सर्वदलीय राष्ट्रीय सरकार के गठन की शर्तों के आधार पर सरकार को युद्ध में पूर्ण सहयोग देने का प्रस्ताव पारित किया।
      • किन्तु ब्रिटिश प्रधान मंत्री चर्चिल ने 8 अगस्त, 1940 को भारत के संबंध में अपनी नीति स्पष्ट करते हुए घोषणा की कि अटलांटिक चार्टर (प्रत्येक राष्ट्र के आत्मनिर्णय का अधिकार) केवल यूरोप के देशों पर ही लागू होता है।
      • भारत और बर्मा (म्यांमार) पर नहीं। उन्होंने कहा, "मैं ब्रिटिश साम्राज्य का प्रधान मंत्री ब्रिटिश साम्राज्य को छिन्न-भिन्न करने (दिवाला निकालने) के लिए नहीं बना हूं।"
      • उन्होंने कहा कि भारत को उपनिवेश का दर्जा देने का लक्ष्य है।
      • उन्होंने भारतीयों से सहयोग की अपील की लेकिन कांग्रेस और लीग दोनों ने प्रस्ताव ठुकरा दिया।
      • उधर कांग्रेस ने देशी रियासतों के जन आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय किया।

      क्रिप्स मिशन-

      • युद्ध क्षेत्र में अंग्रेजों की निरन्तर हार से चिंतित होकर चर्चिल ने भारत का गतिरोध दूर करने के लिए 22 मार्च, 1942 को सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा।
      • क्रिप्स ने 20 दिन तक भारत में रह कर सभी दलों एवं सभी विचारधाराओं के व्यक्तियों से विस्तृत वार्ता की। 
      • क्रिप्स ने अपने प्रस्ताव में कहा कि युद्ध समाप्त होने के पश्चात् भारत को उपनिवेश का दर्जा दिया जाएगा 
      • भारत चाहे तो राष्ट्रमंडल से अलग हो सकेगा। युद्ध के बाद भारत में संविधान सभा का चुनाव हो और संविधान सभा भारत के लिए नया संविधान बनाये।
      • क्रिप्स प्रस्तावों में अंतरिम व्यवस्था के रूप में रक्षा और विदेशी मामलों को छोड़ कर शेष सभी विभाग भारतीयों को दिये जाने की व्यवस्था भी की गई।
      • इस प्रकार वाइसराय की कार्यकारिणी में उक्त दो विभाग छोड़ कर शेष सभी विभागों हेतु भारतीय नियुक्त किए जाने थे।
      • क्रिप्स प्रस्तावों को गांधी जी ने, "एक दिवालिया बैंक के नाम भविष्य की तिथि का चैक बताया।
      • कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग दोनों ने ही क्रिप्स प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया।

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      आज के इस आर्टिकल में हमने पूर्ण स्वराज्य के लिए जो लड़ाई हमारे वीरों द्वारा लड़ी गयीं और पूर्ण स्वतंत्रता के जो अथक प्रयास किये उसके बारे में विस्तार से जाना।

      उम्मीद करता हूँ कि पूर्ण स्वराज्य की यह पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी , यदि आपको पोस्ट उपयोगी लगी हो तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें।

      मगध साम्राज्य के राजवंश | Dynasties of Magadha Empire in Hindi।

      मगध साम्राज्य के राजवंश | Dynasties of Magadha Empire।

      मगध साम्राज्य में बहुत से वंशो ने राज किया. मगध साम्राज्य में चन्द्र गुप्त और अशोक जैसे  प्रतापी और विख्यात राजा हुए। आज के पोस्ट में मगध साम्राज्य के राजवंश के बारे में विस्तार से जानेंगे। मगध साम्राज्य के राजवंश से सम्बंधित सवाल अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे- UPSC, STATE PCS,IBPS,SSC,RRB,NTPC,RAILWAY, BANKING PO,BANKING CLERK इत्यादि में पूछे जाते हैं।अगर आप मगध साम्राज्य के राजवंश से जुड़ी पूरी जानकारी चाहते हैं तो इस पोस्ट को पूरा जरुर पढ़ें।

       मगध साम्राज्य - मगध एक क्षेत्र था. और सोलह महाजनपदों में से एक, दूसरे शहरीकरण  के 'महान राज्य' जो अब दक्षिण बिहार (विस्तार से पहले) पूर्वी गंगा मैदान, उत्तर भारत में है।  छठी शताब्दी ईसा पूर्व में वृहद्रथ ने मगध साम्राज्य की स्थापना की। जिसकी राजधानी गिरिव्रज को बनाया और बार्हद्रथ वंश (वृहद्रथ वंश) की नींव रखी।  मगही या मगधी मगध की भाषा है जो अभी भी दक्षिणी बिहार में बोली जाती है। मगध साम्राज्य में समय समय पर अनके वंश हुए और अपना शासन काल पूर्ण किया.

      Dynasties of Magadha Empire in Hindi



        मगध साम्राज्य में राज करने वाले वंशो के बारे में संक्षिप्त जानकारी -

        1. बृहद्रथ वंश (3168 ई.पू. - 543 ई.पू.)

        • बृहद्रथ वंश की स्थापना 3168 ई. पू. में बृहद्रथ के द्वारा की गई।
        • बृहद्रथ वंश पौराणिक कथाओं के अनुसार मगध पर शासन करने एक राजवंश था।
        • महाभारत तथा पुराणों के अनुसार जरासंध के पिता तथा चेदिराज वसु के पुत्र बृहद्रथ ने बृहद्रथ वंश की स्थापना की।
        • इस वंश में दस राजा हुए जिसमें बृहद्रथ के पुत्र जरासंध एवं प्रतापी सम्राट था।

        2. हर्यक वंश (बिम्बिसार वंश) (544 ई.पू. 412 ई.पू.) 

        • हर्यक वंश की स्थापना 544 ई. पू. में बिम्बिसार के द्वारा की गई।
        • बिम्बिसार हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था।
        • जैन साहित्य में बिम्बिसार का नाम 'श्रेणिक' मिलता है।
        • छठी सदी ईसा पूर्व में सोलह महाजनपदों में से एक मगध महाजनपद का उत्कर्ष एक साम्राज्य के रूप में हुआ।
        • हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने गिरिब्रज (राजगृह) को अपनी राजधानी बनाकर मगध साम्राज्य की स्थापना की।

        3. शिशुनाग वंश (412 ई.पू. - 344 ई.पू.) 

        • हर्यक वंश के शासक के बाद मगध पर शिशुनाग वंश (412 ई. पू.)का शासन स्थापित हुआ। 
        • शिशुनाग नामक एक अमात्य हर्यक वंश के अंतिम शासक नागदशक को पदच्युत करके मगध की गद्दी पर बैठा और शिशुनाग नामक नए वंश की नींव डाली। 
        • शिशुनाग ने अवन्ति तथा वत्स राज्य पर अधिकार करके उसे मगध साम्राज्य में मिला लिया। 
        • शिशुनाग ने वज्जियों को नियंत्रित करने के लिए वैशाली को अपनी दूसरी राजधानी बनाया।
        • शिशुनाग ने 412 ई. पू. से 394 ई. पू. तक शासन किया। 
        • शिशुनाग वंश का अंतिम राजा नंदिवर्धन था।

        4. नंद वंश (344 ई.पू. - 322 ई.पू.) 

        • शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक की मृत्यु के बाद मगध पर नंद वंश नामक एक शक्तिशाली राजवंश की स्थापना हुई। 
        • पुराणों के अनुसार इस वंश का संस्थापक महापद्म नंद एक शूद्र शासक था। उसने 'सर्वअभावंक' की उपाधि धारण की।
        • महापद्म नंद ने कलिंग के कुछ लोगों पर अधिकार कर लिया था। वहां उसने एक नहर का निर्माण कराया।
        • महापद्म नंद ने कलिंग के गिनसेन की प्रतिमा उठा ली थी। उसने एकराट की उपाधि धारण की। 
        • नंद वंश का अतिम शासक घनानंद था, जिसे ग्रीक लेखकों ने 'अग्रमीज' कहा है। 
        • घनानंद के शासन काल में 325 ई. पू. में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था।

        5. मौर्य वंश (321 ई.पू. – 185 ई.पू.)

        • मौर्य राजवंश प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली राजवंश था।
        • मौर्य राजवंश ने 137 वर्ष भारत में राज्य किया।
        • इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मन्त्री चाणक्य (कौटिल्य) को दिया जाता है।
        • सम्राट अशोक के कारण ही मौर्य साम्राज्य सबसे महान एवं शक्तिशाली बनकर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ।
        • चक्रवर्ती सम्राट अशोक के राज्य में मौर्यवंश का वृहद स्तर पर विस्तार हुआ।

        6. शुंग वंश (185 ई.पू. – 75 ई.पू.)

        • शुंग वंश की स्थापना 544 ई. पू. में पुष्यमित्र शुंग के द्वारा की गई थी।
        • शुंग वंश प्राचीन भारत का एक ब्राह्मण वंश था जिसने मौर्य राजवंश के बाद शासन किया।
        • इसका शासन उत्तर भारत में 185 ई.पू. से 73 ई.पू. तक यानि 112 वर्षों तक रहा था।

        7. कण्व वंश (75 ई.पू. – 30 ई.पू.)

        • कण्व वंश की स्थापना राजा वसुदेव ने 75 ई. पू. में की थी।
        • वसुदेव अंतिम शुंग वंश के अंतिम सम्राट देवभूति का मंत्री था।
        • वसुदेव ने आपने राजा की हत्या करके कण्व वंश की स्थापना की।
        • वैदिक धर्म एवं संस्कृति संरक्षण की जो परम्परा शुंगो ने प्रारम्भ की थी उसे कण्व वंश ने जारी रखा।

        8. सातवाहन वंश (30 ई. – 320 ई.)

          • सीमुक ने सातवाहन वंश की स्थापना की था। 
          • पुराणों में वह सिशुक या सिन्धुक नाम से वर्णित है।
          • सातवाहन राजाओं ने 300 वर्षों तक शासन किया।

          9. गुप्त वंश (321 ई. – 550 ई.)

              • गुप्त वंश की स्थापना श्री गुप्त ने की थी।
              • इतिहासकार इस समय को भारत का स्वर्णिम युग मानते हैं।
              • मौर्य वंश के पतन के पश्चात नष्ट हुई राजनीतिक एकता को पुनः स्थापित करने का श्रेय गुप्त वंश को है।
              • गुप्त वंश का अस्तित्व इसके 100 वर्षों बाद तक बना रहा पर यह धीरे धीरे कमजोर होता चला गया।
              • गुप्त वंश का अंतिम शासक विष्णुगुप्त था।

              10. पाल वंश (780 ई. – 1162 ई.)

                    • राजा गोपाल को पाल वंश का संस्थापक तथा पहला स्वतंत्र राजा माना जाता है।
                    • पाल साम्राज्य मध्य कालीन "उत्तर भारत" का सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण साम्राज्य माना जाता है।
                    • पाल राजाओं के काल मे बौद्ध धर्म को बहुत बढ़ावा मिला।
                    • पाल वंश का अंतिम राजा गोविन्द पाल को माना जाता है।

                    आज के इस पोस्ट में मगध साम्राज्य के राजवंश के बारे में विस्तार से जाना जो प्रायः प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। मगध साम्राज्य इतिहास का एक  विशाल साम्राज्य माना जाता  है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इसके बारे में जरुर जानना चाहिए ।

                    उम्मीद करता हूँ कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित  होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें। 

                    सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य |40 Interesting Facts About Emperor Ashoka in Hindi ।

                    सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य | 40 Interesting Facts About Emperor Ashoka

                    आज के इस पोस्ट में सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य के बारे में जानेंगे। चक्रवर्ती सम्राट अशोक (संस्कृत: अशोकः ) (ईसा पूर्व 304 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक से सम्बंधित प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे-UPSC,STATE PCS,RRB,NTPC,RAILWAY,BANKING PO, BANKING CLERK इत्यादि में पूछा जाता है। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य जानने के लिए पोस्ट को पूरा जरुर पढ़ें ।

                    सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य |40 Interesting Facts About Emperor Ashoka in Hindi ।

                    सम्राट अशोक (273 ई.पू.-232 ई.पू.)

                    Emperor Ashoka Interesting Facts 

                    1. अशोक का जन्म 304 ई.पू. मे पाटलिपुत्र में हुआ था। 

                    2. चक्रवर्ती अशोक सम्राट बिन्दुसार तथा रानी सुभद्रंगी का पुत्र था।

                    3. बिन्दुसार की मृत्यु के उपरान्त अशोक मौर्य साम्राज्य का शासक बना। 

                    4. एक शासक के रूप में सम्राट अशोक विश्व इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है। 

                    5. सिंहली अनुश्रुति के अनुसार अशोक ने अपने 99 भाईयों का वध करके मौर्य साम्राज्य का सिंहासन प्राप्त किया था। 

                    6. बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक का राज्याभिषेक बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 218 वर्ष बाद हुआ था। 

                    7. अभिलेखों एवं साहित्यिक ग्रंथों में सम्राट अशोक को 'देवनाम प्रियदर्शी' कहा गया है। 

                    8. अशोक ने अपने राज्याभिषेक के नवें वर्ष (260 ई. पू.) में कलिंग पर आक्रमण करके उस पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। 

                    9. कुछ इतिहासकारों के अनुसार कलिंग को जीतना आवश्यक था, क्योंकि दक्षिण के साथ सीधे संपर्क के लिए एक स्वतंत्र राज्य के समुद्री और स्थल मार्ग पर नियंत्रण होना जरूरी था।

                    10. कौटिल्य (चाणक्य) के अनुसार कलिंग साम्राज्य हाथियों के लिए प्रसिद्ध था। इन्हीं हाथियों को प्राप्त करने के लिए अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया था। 

                    11. कलिंग के हाथी गुफा अभिलेख से प्रकट होता है कि अशोक के कलिंग आक्रमण के समय कलिंग पर 'नन्दराज' नाम का कोई राजा राज्य कर रहा था। 

                    12. कलिंग युद्ध तथा उसके परिणामों के विषय में अशोक के तेरहवें शिलालेख में विस्तृत जानकारी दी गई है। 

                    13. अशोक के अभिलेखों से यह स्पष्ट होता है कि उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (अफगानिस्तान), दक्षिण में कर्नाटक, पश्चिम में काठियावाड़ और पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत था। 

                    14. पुराणों में सम्राट अशोक को 'अशोक वर्द्धन' कहा गया है। राजगद्दी पर बैठने के समय अशोक अवन्ती का राज्यपाल था। 

                    15. हेनसांग के अनुसार अशोक ने श्रीनगर की स्थापना की, जो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर की राजधानी है। 

                    16. अशोक ने नेपाल में ललितपाटन नामक नगर का निर्माण करवाया था। दिव्यावदान से पता चलता है कि अशोक के समय तक बंगाल मौर्य साम्राज्य का अंग था। 

                    17. ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा के दौरान बंगाल में अशोक द्वारा निर्मित स्तूप देखा था। 

                    18. कल्हण द्वारा रचित ग्रंथ राजतरंगिणी के अनुसार अपने जीवन के प्रारंभ में अशोक शैव धर्म का उपासक था। 

                    19. बौद्ध ग्रंथों के अनुसार कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया।

                    20. बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान के अनुसार उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया। 

                    21. अशोक का बौद्ध होने का प्रमाण उसके (वैराट-राजस्थान) लघु शिला लेख से प्राप्त होता है, जिसमें अशोक ने स्पष्टत : बुद्ध, धम्म और संघ का अभिवादन किया है।


                    22. Ashok Smrat One liner Gk in Hindi

                    23. अशोक के शासनकाल में 250 ई. पू. में बौद्ध धर्मावलम्बियों को पुनर्गठित करने के लिए बौद्ध परिषद् का तीसरा महासम्मेलन आयोजित किया गया।

                    24. कलिंग युद्ध की विभीषिका(आतंक) ने अशोक के मन को बुरी तरह झकझोर दिया क्योंकि इस युद्ध का कलिंग के लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा।

                    25. युद्ध की नृशंसता और व्यापक हिंसा को देखकर अशोक हदय पश्चाताप से भर गया। परिणामस्वरूप उसने आक्रमण और विजय की नीति त्याग कर धर्मघोष की नीति का अनुसरण किया। 

                    26. अशोक के धर्म का उद्देश्य एक ऐसी मानसिक प्रवृत्ति की आधारशिला रखना था, जिसमें सामाजिक उत्तरदायित्व की एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति के प्रति व्यवहार को अत्यधिक महत्वपूर्ण समझा गया। 

                    27. अशोक के धर्म में महिमा को स्वीकृति प्रदान करने और समा के क्रियाकलापों में नैतिक उत्थान की भावना का संचार करने का आग्रह था। 

                    28. अशोक का धर्म वस्तुतः विभिन्न धर्मों का समन्वय है। वह नैतिक आचरणों का एक संग्रह है, जो 'जियो और जीने दो' की मूल पद्धति पर आधारित था। 

                    29. इसमें कोई सन्देह नहीं है कि अशोक का व्यक्तिगत धर्म बौद्ध धर्म ही था। लेकिन यह भी सच है कि अशोक सभी धर्म का आदर करता था और सभी पंथों एवं संप्रदायों के नैतिक मूल्यों के बीच पायी जाने वाली एकता में विश्वास करता था। 

                    30. रोमिला थापर ने अशोक के धर्म की तुलना अकबर के 'दीन-ए-इलाही' से की है। उनके शब्दों में, अशोक का धर्म औपचारिक धार्मिक विश्वासों पर आधारित सद्कार्यों से प्रसूत नैतिक पवित्रता तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह सामाजिक दायित्व बोध से भी प्रेरित था।

                    31. वस्तुतः यह कहा जा सकता है कि अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए अशोक ने जिन आचारों की संहिता प्रस्तुत की उसे उसके अभिलेखों में धर्म कहा गया है । 
                    32. अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर ऐसे अनेक कमजोर शासक आसीन हुए, जो मौर्य साम्राज्य की प्रतिष्ठा को बचा पाने में असमर्थ सावित हुए। 

                    33. अशोक के बाद मौर्य साम्राज्य के उत्तराधिकारियों का क्रम इस प्रकार है- मुजाल, दशरथ, संप्रति, शलिशुक, देववर्मन और सतधनवा। 

                    34. मौर्य साम्राज्य का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या करने के पश्चात् उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ई.पू में शुंग वंश की स्थापना की।

                    35. सम्राट अशोक को शासन में सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रिपरिषद् को व्यवस्था थी। प्रमुख मंत्रियों को तीर्थ कहा जाता था। 

                    36. कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार 18 तीर्थ थे। सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ या महामात्य, मंत्री और पुरोहित थे। 

                    37. कौटिल्य ने मौर्य प्रशासन के लिए संप्रग सिद्धांत का प्रतिपादन किया था, जिसमें राजा, अमात्य, मित्र, कोष, दुर्ग, सेना तथा देश शामिल थे। 

                    38. मौर्य शासन राजतंत्रात्मक, वंशानुगत, ज्येष्ठाधिकारिता देव के ग्रथों तथा निरंकुशता पर आधारित था। 

                    39. मौर्य साम्राज्य में केन्द्रीय शासन की व्यवस्था की। 

                    40. अशोक के अभिलेखों से साम्राज्य के पांच प्रान्तों में विभक्त होने का संकेत मिलता है एवं केन्द्रीय प्रशासन का प्रांतों पर नियंत्रण होने का उल्लेख मिलता है।

                    41. मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और वाणिज्य पर आधारित थी, जिन्हें सम्मिलित रूप से 'वार्ता' के नाम से जाना जाता था।

                    FAQs:-

                    1.दुनिया का सबसे बड़ा सम्राट कौन था?
                    उत्तर:- सम्राट अशोक को ही भारत का सबसे शक्तिशाली और महान सम्राट माना जाता है । 

                    2. अशोक की मृत्यु कब हुई ?
                    उत्तर:- अशोक की मृत्यु  232 ईसा पूर्व में हुई।

                    आज के इस में  सम्राट अशोक के बारे में 40 रोचक तथ्य के बारे में जाना ,जो अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं मे पूछे जाते हैं। सम्राट अशोक, Samrat Ashok Gk in Hindi, rochak-tathya-emperor-ashoka-hindi, Emperor Ashoka Interesting Facts In Hindi

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