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RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की पूरी जानकारी

RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009

इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकरआये हैं RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जैसे की RTE Act 2009 क्या है ? RTE Act का फुल फॉर्म क्या हैं और RTE Act 2009 में कब किस दिन लागु हुआ था ? RTE Act 2009 के क्या उदेश्य हैं और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का इतिहास क्या हैं | 

RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की पूरी जानकारी

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से जुडी इन सभी बिन्दुओ की जानकारी विस्तार पूर्वक निचे दिया गया है आपके जानकारी के लिए बता की RTE Act 2009 से जुड़े कई प्रश्न सेट्रल गवर्मेंट के परीक्षा में कई बार पूछे जा चुके हैं जैसे की RTE Act 2009 कब लागु हुआ था RTE Act 2009 के क्या उद्देश्य हैं | 

“हर घर में हो साक्षरता का वास, तभी तो होगा देश का विकास” किसी भी विकसित या विकासशील देश की सबसे बड़ी ताकत होते है उस देश के युवा और बच्चे। इसलिए भारत में शिक्षा के विकास के लिए RTE Act यानि राइट टू एजुकेशन एक्ट लाया गया। RTE Act के तहत 6-14 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के लिए क़ानूनी अधिकार प्राप्त है। पर बहुत ही कम लोग होंगे जिन्हें ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009’ (RTE Act 2009 in Hindi) के बारे में विस्तृत जानकारी होगी।

RTE Act 2009 के 38 अनुच्छेद

  • संक्षिप्त नाम और विस्तार
  • परिभाषा
  • निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा
  • प्रवेश ना दिए गए बालकों को या जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की है के लिए विशेष उपबंध
  • अन्य विद्यालय में स्थानांतरण का अधिकार
  • राज्य सरकारों और स्थानीय पदाधिकारियों को विद्यालय स्थापित करने के कर्तव्य
  • वित्तीय तथा अन्य उत्तरदायित्व में हिस्सा बांटना
  • राज्य सरकारों के कर्तव्य
  • स्थानीय पदाधिकारियों के कर्तव्य
  • माता पिता और संरक्षक का कर्तव्य
  • राज्य सरकारों का विद्यालय पूर्व शिक्षा के लिए व्याख्या करना
  • निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिए विद्यालय के उत्तर की सीमा
  • एडमिशन या प्रवेश के लिए किसी प्रति व्यक्ति फीस और अनुवीक्षण प्रक्रिया का ना होना
  • प्रवेश के लिए आयु का सबूत
  • एडमिशन से इंकार ना करना
  • रोकने और निष्कासन का प्रावधान
  • बालक को शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न का प्रतिषेध
  • मान्यता प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना किसी विद्यालय का स्थापित ना किया जाना
  • विद्यालय के मान और मानक
  • अनुसूची का संशोधन करने की शक्ति
  • विद्यालय प्रबंधन समिति
  • विद्यालय विकास योजना
  • शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यतायें और सेवा के निबंधन और शर्तें
  • छात्र शिक्षक अनुपात
  • शिक्षकों की रिक्तियों का भरा जाना
  • गैर शैक्षिक प्रयोजनों के लिए शिक्षकों को अभिनियोजित किए जाने का प्रतिषेध
  • पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रक्रिया
  • परीक्षा और समापन प्रमाण पत्र
  • बालक के शिक्षा के अधिकार को मॉनिटर करना
  • शिकायतों को दूर करना
  • राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन
  • राज्य सलाहकार परिषद का गठन
  • निर्देश जारी करने की शक्ति
  • अभिनियोजन नियोजन के लिए पूर्व मंजूरी
  • सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण
  • राज्य सरकारों के नियम बनाने की शक्ति

RTE Full Form in Hindi

RTE Ka Full Form – Right To Education Act / शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right Of Children To Free And Compulsory Education Act) है। हिंदी में RTE Full Form – “निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009” के नाम से भी जाना जाता है।

तो यहाँ हमने जाना की RTE Ka Full Form – Right To Education Act हैं आगे आपको बताया गया हैं की RTE एक्ट कब लागु हुआ था |

RTE Act Kab Lagu Hua

शिक्षा का अधिकार अधिनियम भारतीय संसद द्वारा 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था तथा जो 1 अप्रैल 2010 से सम्पूर्ण भारत में प्रभावी हुआ।

राइट टू एजुकेशन इन इंडिया

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लचीला और विस्तृत संविधान है। Right To Education Act के लागू होने के बाद भारत भी उन 135 देशों की सूची में सम्मिलित हो गया है। जहां बच्चो के लिए अनिवार्य तथा मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है।

अधिनियम का इतिहास

दिसंबर 2002 को भाग-3 के अनुच्छेद 21(a) के माध्यम से 86वें संशोधन विधेयक के तहत 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त, नियमित एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया।

इस पोस्ट में हमने जानना की  RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जैसे की RTE Act 2009 क्या है ? RTE Act का फुल फॉर्म क्या हैं और RTE Act 2009 में कब किस दिन लागु हुआ था ? RTE Act 2009 के क्या उदेश्य हैं और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का इतिहास क्या हैं | 

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  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 जम्मू-कश्मीर में कब लागू हुआ

आप से निवेदन है की इस RTE Act 2009 in Hindi – शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से जुडी इस जानकारी को सोशल मीडिया में अपने उन दोस्तों के साथ शेयर जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहें हो | 

GK

  1. मुगल काल से संबंधित महत्वपूर्ण जीके
  2. राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण तिथियां
  3. एशिया - एक नजर में
  4. 1-100 हिन्दी English Ordinal and Roman गिनती Chart List
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1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी | Revolution of 1857 (The Indian rebellion)

1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी (Special information about the Revolt of 1857 or the Indian Rebellion)

1857 की क्रांति अंग्रेजी शासन को हटाने का भारतीयों का प्रथम संगठित प्रयास था। इस समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग एवं मुख्य सेनापति ऐनसन था। यह विद्रोह उपनिवेशवादी नीतियों एवं शोषण का परिणाम था। इस विद्रोह के कई कारण थे, जिनमें राजनीतिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सैनिकसामाजिक एवं धार्मिक कारण सभी थे।

Revolution of 1857 (The Indian rebellion)

इस विद्रोह का तात्कालिक कारण चर्बीयुक्त कारतूसों का प्रयोग था। 1857 का विद्रोह 29 मार्च 1857 को बैरकपुर (प.बंगाल) की छावनी से प्रारंभ हुआ तथा मई, 1857 में मेरठ के सैनिकों ने भी अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा दिया। मेरठ छावनी के सैनिक मंगल पांडे ने नये कारतूसों के विरुद्ध आवाज उठायी तथा 8 अप्रैल, 1857 को उन्हें फाँसी दे दी गई मंगल पांडे 34 इन्फैन्ट्री राइफल के जवान थे। इसके बाद यह विद्रोह तेजी से पूरे देश में फैल गया तथा अलग-अलग स्थानों पर इसे अलग-अलग लोगों ने नेतृत्व प्रदान किया।

1857 की क्रांति या भारतीय विद्रोह की खास जानकारी -

  • इस विद्रोह की वास्तविक शुरुआत 10 मई 1857 ईको मेरठ से हुई थी। 
  • अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की नींव साल 1857 में सबसे पहले मेरठ के सदर बाजार में भड़की, जो पूरे देश में फैल गई थी।
  • इस विद्रोह के शुरू होने की पूर्व निर्धारित तिथि 31 मई, 1857 थी।
  • 10 मई 1857 में शाम पांच बजे जब गिरिजाघर का घंटा बजा, तब लोग घरों से निकलकर सड़कों पर एकत्रित होने लगे थे।
  • 9 मई 1857 को कोर्ट मार्शल में चर्बीयुक्त कारतूसों को प्रयोग करने से इंकार करने वाले 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया था।
  • 10 मई 1857 की शाम को ही इस जेल को तोड़कर 85 सैनिकों को आजाद करा दिया था।
  • दिल्ली के सम्राट बहादुरशाह जफर कर रहे थे परन्तु यह नेतृत्व औपचारिक एवं नाममात्र का था।
  • 1857 विद्रोह के अन्नेय तृत्वकर्ता - जनरल बख्त खां (सैनिक नेतृत्व ) एवं बहादुरशाह जफर (असैनिक नेतृत्व), बेगम हजरत महल एवं विरजिस कादिर, नाना साहब (अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र), रानी लक्ष्मीबाई (राजा गंगाधरराव की विधवा), तात्या टोपे, मौलवी अहमद उल्ला (मूलत: मद्रास के बाद में फैजाबाद आ गए), खान बहादुर, कुंवर सिंह (जगदीशपुर की आरा रियासत के शासक), राव तुला राम 
  • 1857 विद्रोह के केंद्र - दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, झाँसी, ग्वालियर, फैजाबाद, बरेली, बिहार और फरीदाबाद।
  • 1857 के विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों के कई प्रमुख सेनापतियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ये इस प्रकार थे- 
    • 1.दिल्ली (लेफ्टिनेंट हडसन, लेफ्टिनेंट विलोवी, जॉन निकोलसन), 
    • 2. लखनऊ (जेम्स आउट्रम, हेनरी लारेंस, ब्रिगेडियर इंग्लिशहेनरी हैवलॉक, सर कोलिन कैम्पवेल), 
    • 3. झाँसी (सर ह्यू रोज), 
    • 4. कानपुर (कोलिन कैम्पबेल, सर ह्यू व्हीलर) एवं 
    • 5. बनारस (कर्नल जेम्स नील)। 
  • 1857 के इस विद्रोह की असफलता का प्रमुख कारण विद्रोहकर्ताओं में योग्य नेतृत्व एवं सामंजस्य का अभाव था। 
  • इस विद्रोह में सिंधिया, निजाम, भोपाल के नवाब आदि ने अंग्रेजों का साथ दिया था। 
  • इस विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत हो गया एवं ताज का शासन प्रारंभ हो गया।
  • सेना का पुनर्गठन एवं उसमें भारतीयों की संख्या में कमी की गई।
  • अंग्रेजों ने फूट डालो एवं राज करो की नीति अपना ली। 
  • इस विद्रोह के बारे में वीर सावरकर ने कहा कि "1857 का विद्रोह स्वधर्म और राजस्व के लिए लड़ा गया राष्ट्रीय संघर्ष था।" आर. सी. मजूमदार ने कहा कि "यह न तो प्रथम था, न ही राष्ट्रीय था और यह स्वतंत्रता के लिए संग्राम भी नहीं था।"
  • जॉन लारेंस एवं सीले ने कहा कि "1857 का विद्रोह सिपाही विद्रोह मात्र था।"
  • जेम्स आउटूम एवं डब्ल्यू. बी. टेलर ने कहा कि "यह अंग्रेजों के विरुद्ध हिंदू एवं मुसलमानों का षड्यंत्र था।" •एल. आर. रीज ने कहा कि "यह धर्मांधों का ईसाइयों के विरुद्ध षडयंत्र था।"
  • बेंजामिन डिजरैली ने कहा कि "1857 का विद्रोह सचेत संयोग से उपजा राष्ट्रीय विद्रोह था।"
  • जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि "सन् सत्तावन का विद्रोह सिपाही विद्रोह नहीं, अपितु स्वतंत्रता प्राप्ति के निमित्त भारतीय जनता का संगठित संग्राम था।"
  • विपिन चंद्र ने कहा कि "1857 का विद्रोह विदेशी शासन से राष्ट्र को मुक्त कराने का देशभक्तिपूर्ण प्रयास था।"

ग्रह (Planets) | Planets of Solar System in Hindi | सौरमंडल के ग्रह

सौरमंडल के ग्रह (planets of solar system) | What is the planet in Hindi

सौरमंडल के ग्रहों और ग्रह क्या होतें है, इनके बारे में जानकारी आपको इस पोस्ट में मिल जाएगी। General Knowledge of Planets of Solar System in Hindi

आपको जानकर हैरानी होगी कि प्लानेट नाम का अर्थ बहुत ही अजीब है- Planet एक लैटिन का शब्द है, जिसका अर्थ होता है इधर-उधर घूमने वाला।

Planets of Solar System in Hindi



हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण। इनके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं - सीरीस, प्लूटो और एरीस।


ग्रहों के नाम हिंदी और इंग्लिश में (Planets Name In Hindi-English)

Planet English Name Planet Hindi Name
Mercury (मर्करी) बुध (Budh)
Venus (वेनस) शुक्र (Shukra)
Earth (अर्थ) पृथ्वी (Prithvi)
Mars (मार्स) मंगल (Mangal)
Jupiter (जुपिटर) बृहस्पति (Brahspati)
Saturn (सैटर्न) शनि (Shani)
Uranus (युरेनस) अरुण (Arun)
Neptune (नेप्‍च्‍यून) वरुण (Varun)

ग्रह क्या होते है? (What are planets in hindi?)

ग्रह (प्लानेट- Planet)

  • सौर मंडल के ग्रह (Planets of Solar System)
  • वे आकाशीय पिंड जो सूर्य या अन्य किसी तारे का चक्कर लगाते हैं तथा जो तारों के प्रकाश से चमकते हैं, उन्हें ग्रह कहते हैं। 
  • सूर्य की तुलना में ग्रहों का आकार छोटा और तापमान कम होता है।
  • प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों और एक दीर्घवृत्तीय कक्षा में चक्कर लगाता है। 
  • मुख्य ग्रहों के अलावा हमारे सौरमंडल में 5 बौने (Dwary Planets) है यथा प्लूटो, सीरस, ट्राईस, मेकमेक और होमीया ) (Pluto, Ceres, Tris, ´Makemake, Haumea). 
  • यम (Pluto) को सन् 2006 से ग्रहों की सूची से बाहर निकाल दिया गया है। 
  • सभी ग्रह घड़ी की उल्टी दिशा में चक्कर लगाते हैं, जबकि शुक्र और अरुण घड़ी की सीधी दिशा में चक्कर लगाते हैं। 
  • सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर 8 ग्रह चक्कर लगाते हैं। इनमें से छह ग्रह पृथ्वी, बुध, मंगल, बृहस्पति, शुक्र और शनि प्राचीनकाल से ही ज्ञात थे तथा अन्य तीन-अरुण, वरुण तथा यम की खोज दूरबीन के आविष्कार के बाद हुई।
  • सूर्य से बढ़ती दूरी के क्रम में ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण तथा यम यम की कक्षा सर्वाधिक दीर्घवृत्तीय (elliptical) है। सूर्य से इसकी कक्षा की निकटतम दूरी 4.4 बिलियन किलोमीटर और अधिकतम दूरी 7.3 बिलियन किलोमीटर है। 
  • सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर वामावर्त दिशा में शु घूमते हैं। उनकी अपनी अक्षीय गति भी वामावर्त दिशा में ही होती है, लेकिन शुक्र और अरुण इसके अपवाद हैं। शुक्र की अक्षीय गति अन्य ग्रहों की तुलना में उल्टी होती है, जबकि अरुण अपने किनारों के गिर्द घूमता है। 
  • बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण विशाल ग्रह हैं। 
  • केवल पाँच ग्रह ऐसे हैं, जिन्हें नग्न आँखों से (पृथ्वी के अलावा) देखा जा सकता है- बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि। 
  • ग्रह दो प्रकार के होते हैं-स्थलीय तथा जोवियन । 
  • जिन ग्रहों की रचना पृथ्वी के समान होती है, उन्हें स्थलीय या पार्थिव ग्रह कहते हैं। ये चार हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल।
  • मंगल ग्रह की कक्षा के बाहर स्थित ग्रह, जोवियन ग्रह कहलाते हैं। ये भी चार ग्रह हैं- बृहस्पति, शनि, अरुण तथा वरुण । यम इन दोनों श्रेणियों में से किसी में भी नहीं आता है। 
  • सूर्य से ग्रहों की दूरी के आधार पर सौरमंडल के ग्रहों को दो भागों में विभाजित किया जाता है-आंतरिक ग्रह तथा बाह्य ग्रह|
  • आंतरिक ग्रहों में बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल ग्रह आते हैं। 
  • बाह्य ग्रहों में बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण तथा यम आते हैं। 
  • सौरमंडल के बाह्य भाग वाले ग्रह आंतरिक भाग वाले ग्रहों की अपेक्षा काफी दूर हैं
  • आकार की दृष्टि से विभिन्न ग्रह (बड़े से छोटे ) इस प्रकार हैं- बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुणपृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध । 
  • सूर्य से बढ़ती दूरी के आधार पर विभिन्न ग्रह इस प्रकार हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण । 

बुध (मरकरी- Mercury) 

  • बुध ग्रह हमारे सौरमंडल का पहला ग्रह है।
  • यह सूर्य से सबसे पास स्थित है। 
  • इसका कोई उपग्रह नहीं हैं। यहाँ जीवन नहीं है। 
  • सूर्य का एक चक्कर लगाने में बुध को 88 दिन लगते है, जो सबसे कम है। 
  • इस ग्रह में चुंबकीय क्षेत्र नहीं पाया जाता है । 
  • इसका व्यास 4,849.6 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 5.76 करोड़ किलोमीटर है।


शुक्र (वीनस- Venus)

  • शुक्र ग्रह हमारे सौरमंडल का दूसरा ग्रह है।
  • यह सबसे चमकीला ग्रह है। इसका तापमान लगभग 500° सेंटीग्रेड है 
  • यह सबसे गर्म ग्रह है। 
  • यह एक शुष्क ग्रह है तथा यहाँ जीवन का अभाव है। 
  • इसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में 225 दिन लगते हैं। 
  • इस ग्रह में सल्फ्यूरिक अम्ल के घने बादल छाए रहते हैं। 
  • शुक्र के वायुमंडल का 96 प्रतिशत भाग कार्बन डाइ ऑक्साइड और 3.5 प्रतिशत भाग नाइट्रोजन है।
  • शुक्र ग्रह पूर्व से पश्चिम की तरफ अपने अक्ष पर घूर्णन करता है, अतः यहाँ सूर्योदय पश्चिम की तरफ होता है।
  • शुक्र को भोर का तारा (morning star), सांध्य का तारा (evening star), पृथ्वी का जुड़वाँ तारा, पृथ्वी की बहन आदि नामों से भी जाना जाता है। 
  • शुक्र का व्यास 12,032 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 10.75 करोड़ किमी. है।


पृथ्वी (अर्थ- Earth)

  • पृथ्वी सौरमंडल में सूर्य से तीसरा ग्रह है। 
  • यह एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। 
  • पृथ्वी की उत्पत्ति के संदर्भ में नवीनतम सिद्धांत, बिगबैंग या महाविस्फोट सिद्धांत है। 
  • अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी ग्रह, एक नीले तथा चमकीले गोले के समान दिखाई देता है। 
  • पृथ्वी गोलाकार है। इसके 71 प्रतिशत भाग पर जल एवं 29 प्रतिशत भाग पर स्थल है। 
  • पृथ्वी उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों पर चपटी है, इसलिए ध्रुवों पर लिये गए पृथ्वी के व्यास व भूमध्यरेखा पर लिये गए पृथ्वी के व्यास में अंतर है। पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। यह अवधि 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकेंड है। घूर्णन की इसी घटना के कारण दिन एवं रात होते हैं
  • विषुवत रेखा पर घूर्णन की यह गति 1610 किमी. प्रति घंटा, 60° पर 850 किमी प्रति घंटा तथा ध्रुवों पर शून्य होती है।
  • पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर एक निश्चित दीर्घवृत्ताकार पथ पर 29.72 किमी प्रति सेकेंड की दर से परिक्रमण करती है। इस परिक्रमण की अवधि 365 दिन, 5 घंटे एवं 48 मिनट और 46 सेकेंड अर्थात 3651/4 होती है। चौथाई दिवस प्रतिवर्ष फरवरी महीने में जुड़ जाता है, जिससे उस वर्ष फरवरी 29 दिनों की होती है। इसे लीप वर्ष कहते हैं
  • पृथ्वी के परिक्रमण तथा अक्ष पर झुकाव कारण ही ऋतु परिवर्तन होते हैं। 

मंगल (मार्स- Mars)

  • मंगल ग्रह हमारे सौरमंडल का चौथा ग्रह है।
  • मंगल अपने अक्ष पर पृथ्वी की तरह ही झुका हुआ है. इसी वजह से यहाँ पृथ्वी की तरह ही मौसम परिवर्तन की घटनायें होती हैं। इसका व्यास 6755.2 किमी. है तथा सूर्य से इसकी दूरी 22.56 करोड़ किमी. है। 
  • मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है। 
  • मंगल 687 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करता है। 
  • यहाँ भारी मात्रा में Feo पाया जाता है। 
  • मंगल पर सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलम्पस मोन्स (Olympus mons) है। मंगल के दो चंद्रमा भी हैं, जिन्हें फोमोस और डीमोस कहते हैं। 
  • मंगल में एवरेस्ट पर्वत से तीन गुनी ऊँची चोटी स्थित है, जिसका नाम निक्स ओलम्पिया है।


बृहस्पति (जुपिटर- Jupiter)

  • बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का पांचवां ग्रह है।
  • आकार की दृष्टि से वृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है, जो पृथ्वी से लगभग 1300 गुना बड़ा है। इसकी गति भी अन्य ग्रहों की तुलना में तीव्र है।
  • बृहस्पति का तापमान - 150°C है। 
  • बृहस्पति के वायुमंडल में हाइड्रोजन और हीलियम की प्रधानता है। इसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र भी पाया जाता है। 
  • इसका व्यास 1,41,968 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 77.28 करोड़ किमी. है। 
  • इसके 63 उपग्रह हैं जिनमें से गैनीमीड सबसे बड़ा है।


शनि (सैटर्न- Saturn)

  • शनि ग्रह हमारे सौरमंडल का छठां ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं।
  • शनि के चारो तरफ चक्र या छल्ले पायें जाते है, जिसे वलय (ring) कहतें है।
  • खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुना ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है।


अरुण (यूरेनस- Uranus)

  • अरुण ग्रह हमारे सौरमंडल का सातवाँ ग्रह है।
  • अरुण आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण ग्रह को "लेटा हुआ ग्रह" कहा जाता है, क्योंकि यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ दिखाई देता है।
  • अरुण ग्रह अकार में पृथ्वी से 63 गुना अधिक बड़ा है।
  • अरुण ग्रह को बिना दूरबीन के आँख से भी देखा जा सकता है।
  • युरेनस ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 14.5 गुना है।

वरुण (नॅप्चयून- Neptune)

  • वरुण ग्रह हमारे सौरमंडल का आठवाँ ग्रह है।
  • वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से 17 गुना अधिक है।
  • वरुण सूरज से बहुत ही ज्यादा दूर है, इसलिए इसका ऊपरी वायुमंडल बहुत ही ठंडा है और वहाँ का तापमान -128 C° (55 कैल्विन) तक गिर सकता है।

सौर मंडल ग्रह जीके हिंदी में (Solar System Planets GK in hindi)

1 सबसे चमकीला ग्रह शुक्र (Venus
2 सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
3 सबसे छोटा ग्रह बुध (Mercury)
4 सूर्य के सबसे पास स्थित ग्रह बुध (Mercury)
5 सूर्य के सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण (Neptune)
6 पृथ्वी के सबसे पास स्थित उपग्रह शुक्र (Venus)
7 पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा (Moon)
8 सबसे अधिक उपग्रहों वाला ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
9 सबसे ठंडा ग्रह वरुण (Neptune)
10 सबसे गर्म ग्रह बुध (Mercury)
11 सबसे भारी ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
12 सबसे चमकीला तारा साइरस (Dog star)
13 सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह डी मोस (Deimos)
14 सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह गैनिमेडे (Ganymede)
15 लाल ग्रह मंगल (Mars)
16 नीला ग्रह पृथ्वी ( Earth)
17 पृथ्वी की बहन भोर का तारा शुक्र (Venus)
18 साँझ का तारा शुक्र (Venus)
19 सुंदरता का देवता शुक्र (Venus)
20 हरा ग्रह वरुण (Neptune)

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य | Names and functions of nutrients plants

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य (Names and functions of nutrients essential for plants)

हम इस पोस्ट में पौधों में आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) एवं उनके कार्य की सूचि या लिस्ट दे रहें हैं। क्योंकि पौधों के सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिसके बारे में परीक्षा की दृष्टी से आपको जरुर जानना चाहिए।

Names and functions of nutrients essential for plants

पौधों के प्राथमिक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम हैं। परन्तु केवल तीन पोषक तत्वों की सहायता से पौधों का सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) नहीं हो सकता है। निचे आपको पौधों के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्यों के बारे में दिया गया है-

Names and functions of nutrients essential for plants in Hindi

  1. कार्बन (Carbon)
    • पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) लेते हैं।
    • प्रकाश को उपस्थिति में CO2 क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण में भाग लेती है।
    • इसके अलावा पौधों के अधिकांश भाग में कार्बन पाया जाता है।

  2. ऑक्सीजन (Oxygen)
    • ऑक्सीजन पौधों को जल वायु से मिलती है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में CO2 से मिलकर ऑक्सीजन (O2) निकालता है तथा शर्कराओं का निर्माण करता है।

  3. हाइड्रोजन (Hydrogen)
    • हाइड्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए जल से प्राप्त होती है।
    • हाइड्रोजन आक्सीजन से मिलकर पानी बनाती है तथा कार्बन के साथ मिलकर जटिल रासायनिक यौगिक बनाती है।

  4. नाइट्रोजन (Nitrogen)
    • नाइट्रोजन पौधों के पर्णहरित न्यूक्लियक अम्ल, विटामिन्स, प्रोटीन, एमाइड्सएल्केलाइड्स तथा प्रोटोप्लाज्म की संरचना में भाग लेती है।
    • पौधों में नाइट्रोजन नियन्त्रक का कार्य करती है।
    • नाइट्रोजन, एडीनोसीन, ट्राइफॉस्फेट (ATP) का एक अवयव है। नाइट्रोजन, पर्णहरित का एक मुख्य अवयव होता है, इससे पत्तियों का रंग गहरा हरा होता है।
    • पौधे मृदा से नाइट्रेट को अपनी जड़ों द्वारा अमोनियम आयन्स (NH4 +) व नाइट्रेट आयन्स (NO3-) के रूप में ग्रहण करते हैं।

  5. फॉस्फोरस (Phosphorus)
    • फॉस्फोरस न्यूक्लियो प्रोटीन,न्यूक्लियक अम्ल, फॉयटिन तथा फास्फोलिपिड्स का मुख्य अवयव फॉस्फोरस से फलीदार फसलों की जड़ों में स्थित ग्रंथियों की संख्या तथा आकार में वृद्धि होती है, जिससे वायुमण्डलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायता भी लेती है।
    • फॉस्फोरस से फल एवं बीज जल्दी बनता है जिससे पौधों एवं फलों में पूर्ण वृद्धि कम समय में हो जाती है अर्थात् फसल शीघ्र पक जाती है।
    • फॉस्फेट की उपस्थिति में पराग सेंचन (Pollination) अच्छा होता है, जो फसल की मात्रा एवं गुणों को प्रभावित करता है। यह नाइट्रोजन के प्रभाव को कम या उदासीन करती है।

  6. पोटैशियम (Potassium)
    • पोटैशियम कार्बोहाइड्रेट्स के स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा यह आयरन वाहक के रूप में कार्य करता है।
    • पोटैशियम पौधे में रोग तथा हानिकारक दशाओं से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। पोटैशियम नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की उपस्थिति में बीज के देरी या शीघ्रता से पकने के स्वभाव को सन्तुलित करता है।
    • यह वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि को रोकने में मदद करता है। पोटैशियम कोशिका विभाजन एवं निर्माण में सहायता करता है।
    • पोटेशियम के प्रभाव से धान्य एवं घास वाली फसलों के तने, भूसा एवं डण्ठल, प्रबल एवं कठोर बनते हैं, जिससे फसलों का गिरने का खतरा नहीं होता है।

  7. कैल्शियम (Calcium)
    • कैल्शियम पौधों के लिए अत्यन्त आवश्यक है।
    • यह पौधों को कोशिकाओं की दीवारों के निर्माण में आवश्यक है। कैल्शियम पौधों के मूलरोगों के विकास में सहायक है, जिससे पौधों की पोषण ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
    • कैल्शियम कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण में सहायक है तथा पौधों की मेटाबोलिज्म में स्वतन्त्र हुए कार्बनिक अम्लों को उदासीन करता है।
    • कैल्शियम फलीदार पौधों में पर्याप्त मात्रा में मिलती है और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता देते है।

  8. मैग्नीशियम (Magnisium)
    • मैग्नीशियम क्लोरोफिल का मुख्य अवयव है जिसके बिना कोई पौधा हरा नहीं रह सकता और पौधों के भाग पीलेपड़ जाते हैं।
    • मैग्नीशियम फॉस्फोरस को ग्रहण करने तथा इसके स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा वसीय अम्लों तथा तेलों के संश्लेषण में भी आवश्यक है।
    • मैग्नीशियम वायु से CO2 लेकर पत्तियों द्वारा शर्करा निर्माण में सहायक होता है।

  9. सल्फर (Sulphur)
    • सल्फर क्लोरोफिल के निर्माण में भी आवश्यक है।
    • यह प्रोटीन का एक मुख्य भाग होने के कारण अत्यंत आवश्यक है सल्फर (गन्धक) के ऑक्सीकरण से सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है।
    • इसके उपयोग से मृदा क्षारीयता दूर की जा सकती है।
    • सल्फर पौधों में सुगन्धित तेलों के निर्माण में सहायक है।
    • इसकी कमी से अनेकों रोग उत्पन्न हो जाते हैं सल्फर से एल्फा-एल्फा की जड़ों में ग्रंथियों का विकास अधिक होता है।

  10. आयरन (Iron)
    • यह भी क्लोरोफिल निर्माण में आवश्यक तत्व है, लेकिन फ्लोरोफिल का अंग नहीं है।
    • पादपों में होने वाले ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • आयरन पौधों द्वारा नाइट्रोजन के पोषण और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करता है।
    • कोशिका विभाजन में भी सहायक होता है।

  11. मैगजीन (Magnese)
    • मैगनीजकी मात्रा जलाक्रान्त व अम्लीय मृदाओं में उगने वाले पौधों में अपेक्षाकृत अधिक होती है।
    • मैगनीज पर्णहरिम निर्माण में सहायक होता है।
    • पौधों में नाइट्रोजन कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म तथा क्रेब चक्र की क्रियाओं में आवश्यक है।
    • यह ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • नाइट्रेट के स्वांगीकरण में सहायक होता है।

  12. जिंक (Zinc)
    • जिंक क्लोरोफिल निर्माण में एकउत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • प्रोटीन, केरोटिन तथा सिट्रिक के संश्लेषण में सहायक होता है।
    • जिंक कार्बोहाइड्रेट के रूपान्तरण में आवश्यक होता है तथा मृदा में जलशोषण को बढ़ाता है।

  13. कॉपर (Copper)
    • यह अप्रत्यक्ष रूप से क्लोरोफिल निर्माण तथा आयरन के उपयोग में सहायक होता है।
    • इससे श्वसन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
    • यह क्लोरोफिल के विनाश को रोकता है।
    • कॉपर पौधों में एसीनो अम्ल के साथ मिलकर अनेक एमिनोयौगिक और प्रोटीन बनाता है।
    • प्रोटीन मेटाबोलिज्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • कॉपर पौधों में इन्डोल एसीटिक अम्ल के संश्लेषण में सहायक होता है।

  14. बोरोन (Boron)
    • बोरोन पराग (Pollan) एवं प्रजनन क्रियाओं में सहायक होता है।
    • बोरोन कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण एवं प्रोटीन तथा पानी के उपापचयन में सहायक है।
    • बोरोन कोशिका विभाजन व कॉर्टेक्स के विकास के लिए आवश्यक है।
    • बोरोन पोटेशियम व कैल्शियम अनुपात को नियन्त्रित करता है।
    • पौधों में पानी के शोषण को नियन्त्रित करता है।
    • बोरोन ATP, DNA, RNA एवं पेक्टिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
    • यह पौधों में फल,फूल व बीज बनने को भी प्रभावित करते हैं।

  15. मॉलिब्डेनम (Molybdenum)
    • मॉलिब्डेनम (Molybdenum) एजोटोबैक्टर एवंराइजोबियम बैक्टीरिया द्वारा मुक्त नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिए आवश्यक है।
    • यह इट्रेट रिडक्टेज एन्जाइम का महत्त्वपूर्ण भाग है।

  16. क्लोरीन (Cblorin)
    • क्लोरीनवर्णक रंगीन(एन्थोसायनिन) का संघटक पदार्थ होता है तथा यह रसाकर्षण दाब को बढ़ाता है। क्लोरीन (कोशिका रस) cell sup में धनायन सन्तुलन बनाए रखता है।

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य | Names and functions of nutrients plants

विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग [2022] | Vitamin A deficiency diseases in Hindi

विटामिन 'ए' की कमी से होने वाले रोग |  Vitamin A ki Kami Se Hone Wale Rog

विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग के बारे में जानने के साथ-साथ आपको इस पोस्ट में विटामिन-A के कमी से होने वाले लक्षण, विटामिन-A की महत्वपूर्ण बातो के बारे में भी बताने वाले है-

Vitamin A deficiency diseases in Hindi

विटामिन- ए (Vitamin- A):

शरीर को स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए विटामिनो के महत्वपूर्ण योगदान से इंकार नही किया जा सकता है। शरीर के समुचित पोषण के लिए विटामिन अति आवश्यक सहायक तत्व हैं। आधुनिककाल में विटामिनो की खोज के बाद इनका प्रचलन तेजी से जोर पकड़ चूका हैं। सभी विटामिन जो अबतक चिकित्सा वैज्ञानिको ने खोज निकाले हैं एक दुसरे पर निर्भर है। यह हमारे भोजन में काफी मात्र में होकर भी हमारे शरीर को नई जीवन शक्ति देते हैं। इनकी कमी से शरीर रोगग्रस्त हो जाता हैं। जब विटामिनो को किसी कारणवश शरीर में पूर्ति हो पाना संभव नही होता। तब यह कमी मृत्यु का कारण बन जाती है। आगे हम सभी विटामिन-A का वर्णन कर रहे हैं। 

शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी से निम्नलिखित रोग उत्पन्न हो जाते हैं जो समुचित विटामिन ‘ए’ की चिकित्सा करने पर दूर हो जाते हैं।

विटामिन- A से सम्बंधित सवाल -

  1. विटामिन 'A' की कमी से होने वाले रोग?
  2. विटामिन ए की कमी से होने वाले रोग का नाम?
  3. विटामिन A की कमी से क्या होता है?
  4. विटामिन ए की कमी के लक्षण?
  5. विटामिन A की कमी से कौन सा रोग होता है?
विटामिन- ए से सम्बंधित इन सवालों के जवाब आपको निचे विस्तार से दिया गया है-

विटामिन-ए की कमी के लक्षण (Symptoms of Vitamin A Deficiency) :-

  • भूख की कमी, 
  • आंतो में गैस के विकार, 
  • गैस बनना
  • मूत्राशय की पथरी, 
  • दिल की कमजोरी, 
  • निमोनिया, 
  • सर्दी,खांसी, जुकाम, ज्वर, 
  • नजला,ब्रोंकाईटिस,
  • सुखी खांसी, 
  • त्वचा रोग, चर्म का सुख जाना, चर्म प्रदाह, चर्म शोथ, चर्म की सुजन, चर्म मोटी हो जाना, 
  • घाव, फोड़े, फुन्सिया, 
  • कारबंकल जैसे खतरनाक जहरीले घाव 
  • कील-मुहांसे झाइयाँ, चेहरे के दाग- धब्बे, 
  • बाल उड़ना, सर गंजा होना, बालो का रुखापन,
  • नाड़ी दुर्बलता, नाड़ी संस्थान की कमजोरी- हीनता,
  • स्तनों में दूध कम हो जाना, 
  • मासिक धर्म पूर्व के सभी विकार. 
  • बुढ़ापे में योनि शोथ, योनि प्रदाह, योनि की सुजन हो जाना, 
  • बच्चों  की दुर्बलता, 
  • रतौंधी. नेत्र विकार, नेत्र राग धुंधला दिखाई देना,अंधत्व, 
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का आभाव हो जाना, 
  • झागदार दस्त होना, 
  • देर से दांत निकलना, 
  • शरीर का वजन गिर जाना, 
  • अपचन संक्रमण, 
  • जीवनी शक्ति का अभाव हो जाना, 
  • बहरापन, 
  • पेंघा या गिल्हड, 
  • जननांगो के रोग एवं विकार आदि। 

विटामिन ‘ए’ (A) के जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य :-

  • यह हमारे शरीर को नई जीवन शक्ति देते हैं।
  • विटामिन ‘ए’ शरीर  को रोग प्रतिरोधक क्षमता देता हैं। 
  • नन्हे बच्चो को विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 
  • गर्भावस्था में विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 
  • संक्रामक रोगों से शरीर जब घिर गया हो तब विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग (Vitamin- A deficiency diseases) :-

  • विटामिन ‘ए’ की कमी से बहरापन  होता है। 
  • सर्दी खांसी, जुकाम, नजला विटामिन ‘A’ की कमी से होता है। 
  • फेफड़ो में संक्रमण विटामिन ‘ए’ की कमी से होता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से रोगों तेज प्रकाश सहन नही कर पता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से कील-मुंहासे आदि कई चर्म रोग हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से नेत्रों में आंसू सुख जाते है। 
  • विटामिन ‘ए’ का अविष्कार १९३१ में हुआ था। 
  • विटामिन ’A’ जल में घुल जाता है। 
  • विटामिन ’ए’ तेल और वसा में घुल जाता है। 
  • विटामिन ’A’ की कमी से नाख़ून आसनी से टूटने लगते है। 
  • विटामिन’ए’ की कमी से रतौंधी हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से अनेक नेत्र रोग स घेरते है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से रोगी अँधा हो जाता है। 
  • विटामिन’A’ की कमी से दांत कमजोर हो जाता है।  दांतों का एनामेल बनने में रूकावट हो जाती है।   
  • दांतों में गड्ढे विटामिन ‘ए’ की कमी से होते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से पुरुष के जननांगो पर प्रभाव डालता है। 
  • साइनस नथुने नक् कण और फले शिराओ पतली रक्त वाहिनियों माथे की रक्त वाहिनियों के संक्रमण विटामिन ‘ए’ कि पूर्ति करने से दूर हो  जाते है।
  • स्कारलेट फीवर विटामिन ‘ए’ देने से ठीक हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’  की कमी से बच्चो की बढ़त थम जाती है। 
  • बच्चो को एक हजार से लेकर तीन हजार यूनिट आई, प्रतिदिन विटामिन ‘इ’ की आवश्यकता होती है। 
  • विटामिन’ए’ की कमी दिमाग की 8वीं नाड़ी पर बुरा प्रभाव डालती है। 
  • विटामिन ‘A’ के प्रयोग से वृक्को की पथरी का  डर नहीं रहता। पथरी रेत के कण जैसी बनकर मूत्र से निकल जाती हैं। 
  • गिल्हड़ विटामिन ‘ए’ की कमी से होता हैं।
  • दिल धड़कने वाले रोगी को विटामिन ‘ए’  के साथ विटामिन ‘बी’ भी देना चाहिए। 
  • विटामिन ‘A’  कमी से स्त्री के जननांगो पर घटक प्रभाव पड़ता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से स्त्री का डिम्बाशय सिकुड़ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से पुरुष का अंडाशय सिकुड़ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ और ‘ई’ शरीर में घट जाने पर स्त्री और पुरषों की सम्भोग इच्छा नहीं रहती तथा संतान उत्पन्न करने की क्षमता भी समाप्त हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ और ‘ई’ की कमी से पिट्यूटरी ग्लैंड की सक्रियता में बाधा हो जाती है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से अनेक चर्म रोग हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से बुढ़ापा जल्दी आ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ से धमनियां और शिराएँ मुलायम रहती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से बल झड़ने लगते है। 
  • विटामिन ‘ए’ हरी सब्जियों में अधिक होता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से हमारे देश में लाखों लोग अपनी आँखों की रोशनी खो चुके हैं। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से आँखों की चमक निस्तेज हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से नेत्रों में झुर्रियां पड़ जाती है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से जीभ पीली पड़ जाती है। 
  • मछली के तेल में विटामिन ‘A’ सबसे अधिक होता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से सर के बल खुरदुरे हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से भूख घट जाती है।
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से वजन घट जाता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से त्वचा खुरदुरी मोती और कांतिहीन हो जाती है, चेहरा निस्तेज हो जाता है।

भारतीय कला और संस्कृति | Indian Art and Culture in Hindi

भारत की कला संस्कृति (Indian Art and Culture in Hindi)

इस पोस्ट में हमने आपको भारत की कला और संस्कृति (Indian Art and Culture) के बारे में जानकारी दिया हैं। भारत में विभिन्न धर्मो, जातियों और समुदाय के लोग पाए जाते है। भारत की कला संस्कृति भी इसका एक महत्वपूर्ण भाग है। जिस प्रकार से एक देश के अन्दर सारी समानताये, विविधताये पाई जाती है, ठीक उसी प्रकार से बिना संस्कृति के हमारा भारत देश अधुरा माना जाता है।
Indian Art and Culture in Hindi
भारत की कला संस्कृति (Art culture of India) से जुड़ी सभी जानकारी निचे दिया गया हैं :- 

    भारतीय कला और संस्कृति का परिचय (Introduction - Indian Art and Culture):- 

    भारत की कला संस्कृति का प्रदर्शन वैदिक काल से ही देखने को मिलता है इसका  मतलब यह है कि इसकी  शुरुआत पुराने समय में ही हो गयी थी। जब राजा महाराजा के समय में मूर्ति कला का प्रदर्शन होता था। भारत की कला संस्कृति की बात करे तो भारत देश की संस्कृति और सभ्यता पुरे विश्व में विख्यात है कला और संस्कृति हमारे भारत की धरोहर है भारत की कला और संस्कृति सांस्कृतिक रूप से भी हमारे देश की पहचान बने हुए है जहाँ एक ओर विदेशी संस्कृतियाँ विश्व में फैले हुए है वही हमारे देश की सभ्यता विदेशों में भी अपनी एक अलग जगह बनाये हुए है, भारत अपने, संगीत, नृत्य, लोकपरम्परा, रहन-सहन, संस्कृति, सभ्यताओं, परम्पराओं, प्रदर्शंकला, अनुष्ठान, चित्रकला,रंगमंच,गानों से विश्व भर में मौजूद है. भारत की कला और संस्कृति का परिचय पूरी दुनिया देती है।

    भारत में अलग–अलग जाति, धर्म तथा अलग-अलग संस्कृति के लोग रहते जाते है। यहाँ पर लोग विभिन्न प्रकार की भाषाये बोलते है, अलग-अलग कपड़े पहनते है, अलग-अलग त्यौहार मानते है, पर फिर भी उनमे समानताये है। शायद इसलिए तो कहा जाता है "भारत में अनेकता में भी एकता देखने को मिलती है।"

    तो हमने यह जाना की की भारत की  कला संस्कृति की शुरुआत कैसे हुई कब से हुई तथा इसमें जाति, धर्म तथा भाषायों का महत्व क्या  है इसके बाद हम  जानेंगे की भारत की कला संस्कृति को कितने भागो में बाटा गया है  तथा इसका भारतीयों के जीवन में क्या महत्त्व है तो चलिए जानते है।

    (1) भाषाएं (Language) :– 

    भाषाओ की बात करे तो भारत की कला व संस्कृति में संविधान के आठवी अनुसूची के अनुसार 22 भाषाये पायी जाती है इन भाषाओ को भी अलग-अलग सूची में विभाजित किया गया है भारत की कला व संस्कृति में भाषाए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है यहाँ पर विभिन्न जाती व धर्मो के लोग विभिन्न भाषाए बोलते है भाषागत विविधता भी अलग-अलग राज्यों में भी पायी जाती है जैसे की जो  लोग ओड़िसा राज्य में रहते है वे ओड़िया भाषा बोलते है महाराष्ट्र में मराठी, छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी, मणिपुर में बंगोली, तथा अलग-अलग राज्यों में  में अन्य  उर्दू, हिंदी, गुजराती, मलयालम,आदि भाषाओ का उपयोग भारत में किया जाता है।


    तो हमने यह जाना की भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग अलग तरह के भाषाये बोली जाती है। तथा भारत में कुल 22 भाषाए बोली  जाती है। आगे हम जानेगे की किस तरह भाषओंके आधार पर लोगो ने धर्मो को भी किस तरह बाट दिया है, तो  चलिए जानते है  हमारे आस- पास  किस -किस जाति के के लोग है। 

    (2) धर्म (Religion) –

     भारत की कला संस्कृति में बहुत सारे जाति धर्म के लोग पाए जाते है धर्म से आशय उनके अध्यात्म से है जो की अलग –अलग विभिन्नताए लिए हुए है भारत की कला संस्कृति का एक भाग धर्म भी माना गया है भारतीय धर्म, विश्व के धर्मो में प्रमुख है-जैसे हिन्दूधर्म, बौद्धधर्म, सिक्खधर्म, जैनधर्म धर्मो के आधार पर ही भारतीय कला व संस्कृति को रखा गया है। भारत में धर्मो में भिन्नताये सबसे ज्यादा है तथा  बहुत ही कट्टर धर्म  के लोग इसमें  सम्मिलित है इनमें सबसे ज्यादा 13.4% हिन्दू धर्म सम्मिलित है।

    (3) पहनावा (Clothings)-

    भारत की कला संस्कृति में इनका पहनावा भी महत्वपूर्ण है जैसे की महिलाओं के लिए साड़ी और पुरुषों के लिए धोती कुर्ता यहाँ का पारंपरिक परिधान है एवं यहाँ पर राज्यों एवं निवास स्थानों के हिसाब से भी पहनावा है जैसे की दक्षिण भारत के पुरुष सफ़ेद रंग का लंबा चादर नुमा वस्त्र पहनते हैं और घगरा, चुन्नी, कुर्ता, लुंगी, धोती, पैजामा, साड़ी ब्लाउज आदि पहने जाते है।

    (4) संगीत(Music)-

    भारतीय कला संस्कृति में संगीत का स्थान भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है संगीत का स्थान वैदिक काल से ही प्रभावशाली रहा है भारतीय संगीत में विभिन्न प्रकार के धार्मिक लोकसंगीत, लोकगीत पॉप संगीत, शामिल है भारतीय संगीत का सबसे पुराना उदहारण है सामवेद की कुछ धुनें जो आज भी वैदिक श्रोता बलिदान में गायी जाती है यह प्राचीन काल से ही मनोरंजन का साधन रहा है पहले राजा-महाराजा गीत संगीत का हिस्सा हुआ करते थे।

    (5) नृत्य (Dance)-

    भारत की कला संस्कृति भी कभी नाच गाने भी इसका हिस्सा हुआ करते थे इसमें प्रमुख नृत्य है जो प्राचीन इतिहास के साक्ष भी माने जाते है, इसमें मोहिनीअट्टम, कुचीपुरी, कुछ लोक नृत्य राज्यों के अनुसार ही प्रसिद्ध हुए है जैसे की- असम का बिहू, गुजरात का डंडिया और गरबा,छत्तीसगढ़ का राउतनाचा, पंजाब का भांगड़ा, महाराष्ट्र का लावणी, कर्नाटक का यक्षगान, गोवा का देखनी,और तमिलनाडू का भारत नाट्यम, उत्तर प्रदेश का कत्थक केरल का कथकली इत्यादि भी भारत की कला संस्कृति का ही महत्वपूर्ण भाग है।

    (6) नाटक और रंगमंच (Drama and theater) -

    भारतीय कला और संस्कृति में नाटक रंगमंच का भी योगदान है कला के क्षेत्र में भारतीय नाटक और थिअटर प्राचीन कल से ही चले आ रहे है इनमे से कुछ है – कालिदास का अभिज्ञान शाकुंतलम, नाटकारों में महत्वपूर्ण रहा है। लोक थिएटर की परंपरा भारत के अधिकाशं क्षेत्रों में भी उपयोगी है। 

    (7) चित्रकारी (Paintings)-

    भारत की कला-संस्कृतियों में चित्रकारी भी एक उपयोगी स्थान निभा रही है चित्रकारी भारत में एक अजंता एलोरा की मंदिर में बने हुए चित्र प्राक्रतिक के प्रेंम को प्रदर्शित करते है यह चित्रकारी बहुत ही, प्रसिद्ध मानी गयी है इनमे से एक है कालिदास की अभिज्ञान शाकुंतलम, भारतीय कला की कुछ उल्लेखनीय विधाएं हैं, जबकि राजा रवि वर्मा, नंदलाल बोस, गीता वढेरा, जामिनी रॉय और बी वेंकटप्पा कुछ आधुनिक चित्रकार हैं। वर्तमान समय के कलाकारों में अतुल डोडिया, बोस कृष्णमक्नाहरी, देवज्योति राय और शिबू नटेसन, भारतीय कला के उस नए युग के प्रतिनिधि हैं.

    (8) मूर्तिकला और वास्तुकला (Sculpture and Architecture) -

    भारतीय कला संस्कृति में मूर्ति कला और वास्तु कला का भी एक अलग स्थान रहा है भारत की मूर्ति कला सिन्धु घटी के ज़माने के है जहा पर खोदाई के दौरान कुछ मूर्तियाँ प्राप्त हुई है मथुरा की गुलाबी बलुआ पत्थर की कुछ मुर्तिया भी प्राप्त हुयी है भारतीय कला संस्कृति में वास्तुकला का भी योगदान रहा है मौर्य और उनके साम्राज्य के काल में साँची का स्तूप बनवाया है जो भारतीय इतिहास के वास्तुकला का एक नमूना पेश करता है, कुछ मुग़ल कालीन वास्तुकला भी भारत की कृष्णमक्नाहरी, देवज्योति राय और शिबू नटेसन, भारतीय कला के उस नए युग के प्रतिनिधि हैं संस्कृति व् वस्तु कला में पाए गये है जैसे गोल गुम्बद, दिल्ली का लाल किला, आगरा का ताजमहल, जामा मस्जिद, आलाई दरवाजा विक्टोरिया महल इसका उत्कृष्ठ उदहारण है।  

    निष्कर्ष (Conclusion): – 

    इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको भारतीय कला संस्कृति से रूबरू करवाया है जो की इस भारतीय लोककला और संस्कृति (Indian Folk Art and Culture) का एक केंद्रबिंदु है, जिसमे की सारे लोकगायन लोक संस्कृति और बहुत सारे वास्तु कला कला के नमूने पेश किये है। इस प्रकार से हमारे भारतीय कला संस्कृति में अनेको विशेषताएं पायी जाती है भारत की कला और संस्कृति हमारे भारत की आधार शिला है। बिना कला और संस्कृति के भारत देश अधुरा माना गया है।

    अंतर्राष्ट्रीय जगहों के प्रमुख मामले (Major Matters of International Places)

    अंतर्राष्ट्रीय जगहों के प्रमुख मामले और उनकी जानकारी (Major matters of international places and their knowledge)

    हमारे देश भारत के अलावा जितने और भी मामले पूरी दुनियाभर में घटित होते रहते उन्हें हम अंतर्राष्ट्रीय मामलों का नाम दे सकते हैं। निचे आपको इन्ही में से कुछ अंतर्राष्ट्रीय जगहों और उनके प्रमुख मामलों की जानकारी दे रहें हैं।

    Major matters of international places and their knowledge

      लेह - पहला फील्ड स्टेशन

      लद्दाख क्षेत्र में पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने बर्फीले मरुस्थल लेह में फील्ड स्टेशन स्थापित करने के लिए अपनी मजूरी दे दी है। यह फील्ड स्टेशन अल्मोड़ा स्थित जीबी पन्त हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान द्वारा स्थापित किया जायेगा। यह अपनी तरफ का पहला फील्ड स्टेशन होगा, जिसके पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में चीन की सीमा लगी होगी।


      दिशनगढ़ - सबसे बड़ा ऊर्जा संयंत्र

      आसनसोल के दिशनगढ़ में देश का सबसे बड़ा दो मेगावाट और पीपी ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जायेगा। इस बिजली संयत्र की स्थापना के लिए 30.9 करोड़ रूपए का ऋण देने हेतु पश्चिम बंगाल ग्रीन एनर्जी डेवलपमेंट कॉर्पोरशन लिमिटेड और पॉवर फाइनेंस कारपोरेशन के बिच समझौता हुआ।

      गढ़ी मोलाली गाँव - दस हज़ार साल पूर्व के शैलचित्र

      भारत के विश्व प्रसिद्द ऐतिहासिक स्थल भीमबेटका में मिले शैलचित्रो के सामान ही मध्यप्रदेश के सागर शहर से करीब 10 किमी दूर स्थित गढ़ी मोलाली गाँव के आस पास की पहाडियों में दस हज़ार साल इसा पूर्व से भी पहले के शैलचित्रो का पता चला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग व सागर विश्वविद्यालय के प्राचीन विभाग द्वारा किये गए संयुक्त सर्वेक्षण में यहाँ स्थित दर्जनों गुफाओ की दीवारों  पर बड़ी संख्या में लाल, पीले व सफ़ेद रंगों में उकेरी गयी आकृतिया मिली। सर्वेक्षण दल के कथनानुसार ये शैलचित्र प्राचीन व संख्या के नज़रिए से भीमबेटका में मिले शैलचित्रो के समकक्ष ही है।


      तक्षशीला - भगवान् बुद्ध की 2,000 वर्ष पुरानी प्रतिमा

      पाकिस्तान पुरातत्वविदों को ऐतिहासिक शहर तक्षशीला से भगवान् बुद्ध की 2,000 वर्ष पुरानी एक दुर्लब प्रतिमा प्राप्त हुई है। यह प्रतिमा लाल बालू पत्थर (सेंडस्टोन) की बनी हुई है। 13,312 सेमी की इस प्रतिमा में भगवन बुद्ध आसन मारकर एक सिंहासन पर बैठे हुए है , जिसे दो सिंहो ने सहारा दे रखा है।


      लन्दन - सबसे महंगा व गन्दा शहर

      एक सर्वे में लन्दन को यूरोप का सबसे महंगा व गन्दा शहर बताया गया है। पर्यटन से जुडी एक संस्था ‘ट्रिप एडवाइज़र’ द्वारा सेलानियो के बीच कराये गये सर्वे में यह बात सामने आई है। लेकिन, इन सबके बावजूद रात बिताने के लिए पर्यटक लन्दन को सबसे पहली पसंद मानते है। इस सर्वे में शौपिंग के लिहाज़ से लन्दन दुसरे स्थान पर आया है।


      चिली – पहला अंटार्कटिका संग्रहालय

      चिली के पुन्टा अरेना शहर में दुनिया का पहला अंटार्कटिका संग्रहालय स्थापित किया जायेगा। इस संग्रहालय में लोगो को अंटार्कटिक से जुड़े विभिन्न पहलुओ को जानने का अवसर मिलेगा। इस संग्रहालय के निर्माण में 2 करोड़ डॉलर खर्च किये जायेंगे।लगभग तीन वर्षो  में संग्रहालय का निर्माण कार्य पूरा होगा।


      मिस्र – 7,000 वर्ष पुराने शहर

      अमेरिका के पुरातात्वेताओ ने मिस्त्र के फडयूम नखलिस्तान में 7,000 वर्ष पुराने शहर के अवशेषों की खोज की है। इन अवशेषों को नए पाषाण यूग में 5200 ईसा पूर्व से 4500 ईसा पूर्व के बीच का बताया जा रहा है।


      यांगून - भीषण चक्रवर्ती तूफ़ान ‘नर्गिस’

      चक्रवर्ती तूफ़ान ‘नर्गिस’ – 4 मई , 2008 को म्यांमार की राजधानी यांगून में भीषण चक्रवर्ती तूफ़ान ‘नर्गिस’ की चपेट में आने के कारण 243 लोगो की मृत्यु हो गयी। यह तूफ़ान इस क्षेत्र में आये सभी तुफानो में भीषण व तबाहिपूर्ण था। 


      प्रदुषण फ़ैलाने में नम्बर वन बना चीन – 

      एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन अब सबसे अधिक प्रदुषण फ़ैलाने वाला देश बन गया है। चीन में ग्रीन हाउस गैसों के  उत्सर्जन का स्तर अमेरिका के 2006-7 के स्तर को पार गया है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के अनुसार अनुसंधानकर्ताओ की यह रिपोर्ट मई माह में जर्नल इनवायरमेंट इकोनोमिक्स एंड मैनेजमेंट में प्रकाशित होंगी। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है की अगर चीन ने अपनी उर्जा निति में व्यापक फेरबदल नहीं किये तो वहाँ  ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन क्योटो संधि  में तय मानको से कई गुना अधिक् हो जायेगा। 


      गांधी के आदर्शो को मान्यता देगी यूरोपीय संसद – 

      अब यूरोपीय संसद (ईपी) ने भी मान लिया है की गांधीवाद का कोई जबाब नहीं है। असल, में यूरोपीय संसद ने अपनी एक वार्षिक रिपोर्ट में महात्मा गांधी के अहिंसावाद को मानवाधिकार के सिद्दांतो को सुनुश्चित करने के लिए एकदम सटीक बताया है रिपोर्ट में यह भी प्रस्ताव किया गया है की यूरोपीय यूनियन के मानवाधिकार और जनतांत्रिक निति में गांधीवाद का प्रोत्साहन प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। ‘वैश्विक मानवाधिकार 2007’ के मान से पेश यूरोपीय संसद की इस रिपोर्ट में कहा गया है की केंद्रीय राजनैतिक भूमिका के तौर पर गांधीवाद के सिद्दांतो को शामिल करने के लिये वर्ष 2009 में अहिंसा पैर यूरोपीय कांग्रेस बुलाई जाये और वर्ष 2010 को ‘यूरोपीय इयर ऑफ़ नॉन वायलेंस’ घोषित किया जाए। रिपोर्ट में यूरोपीय संगठन के सदस्यों से संयूक्त राष्ट्र में वर्ष 2010 से 2020 के दशक को ‘अहिंसा का दशक’ घोषित करने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया गया है। यूरोपीय संसद के विदेश मामलों की समिति द्वारा अप्रैल में स्वीकृत इस रिपोर्ट पर 8 मई को यूरोपीय संसद के पूर्ण सत्र में वोटिंग होंगी।


      नेपाल में संविधान सभा के लिए चुनाव – 

      10 अप्रैल को नेपाल में संविधान सभा के लिए हुए चुनाव में माववादी पार्टी को प्रचंड के नेत्तृत्व में जबरदस्त सफलता मिली। नेपाली कांग्रेस तथा कम्यूनिष्ठ पार्टी को इस चुनाव में करारा झटका लगा। चुनाव के बाद नेपाल के राजशाही के समाप्त होने के आसार बन गये है।


      भूटान में प्रथम संसदीय निर्वाचन – 

      भूटान में 24 मार्च, 2008 को हुए ऐतिहासिक प्रथम संसदीय चुनाव पुरिब्तारह से एक तरफा रहे। चुनाव परिणामो में द्रुक फुएंसम शोगपा (डीपीटी) ने कुल 47 में से 44 सीटो पैर कब्ज़ा जमा लिया। डीपीटी का नेतृत्व पूर्व प्रधानमन्त्री जिग्मे शिनले कर रहे थे। इस चुनाव से देश में पिछले एक सदी से चले आ रहा राजशाही का दौर ख़त्म हो रहा है और लोकतंत्र की स्थापना की जा रही है। कोई असर पड़ता नज़र नही आया और उन्होंने बचीं की तानाशाही नीतियों के खिलाफ अपना प्रदर्शन जारी रखा।


      म्यांमार में वर्ष 2010 में होंगे आम चुनाव – 

      म्यांमार की सैन्य सरकार ने 8 फ़रवरी , 2007 को घोषणा की कि देश में आम चुनाव वर्ष 2010 में करवाए जायेंगे। सैन्य शाशन जुंटा के अनुसार नए संविधान को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक जनमत संग्रह मई , 2007 में कराया गया। यह पहला अवसर था , जब सैन्य सरकार ने लोकतंत्र की दिशा में अपनी योजना के लिए किसी तथ्य का निर्धारण किया।  


      प्रवासी कर –

      ग्रेट ब्रिटेन सर्कार यूरोपीय संघ से बाहर के देशो से आने वाले प्रवासियों से प्रवासी कर (Migration tax) वसूलेगी। यह कर तब तक वसूलेगी , जब तक प्रवासी/प्रवासियों को ब्रिटेन की पूर्णतः नागरिकता नहीं मिल जाती। इस कर के आरोपण के के पीछे का तर्क यह है की बाहर से आने वाले लोग ब्रिटेन की सेवाओ यथा- स्वास्थ्य एवं शिक्षा का उपभोग करेंगे। इन सेवाओ के उपभोग करने के कारण ही प्रवासियों से प्रवासी कर वसूला जायेगा। यह कर बुजुर्गो एवं अपने बच्चो के साथ आने वाले लोगो को अधिक देना होगा , क्योकि उपर्युक्त सेवाओ का सर्वाधिक उपयोग ये ही करेंगे। वसूले गये कर को प्रस्तावित ‘ब्रिटिश न्याय कोष’ में जमा कराया जायेगा, जिसे सेवा उपलब्बध कराने वाले संगठनो को दिया जायेगा। इस न्याय कोष में 15 मिलियन पौंड संगृहीत होने कका अनुमान है। 


      कोसोवा ने स्वतंत्रता की घोषणा की –

      सर्बिया के प्रति कोसोवा ने 17 फ़रवरी, 2008 को सार्वभौम स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। स्वतंत्रता की घोषणा के पश्चात् कोसोवा में संयूक्त राष्ट्र की जगह यूरोपीय मिशन के लोग आ जायेंगे। इस मिशन का नेतृत्व डच राजनईक पीटर फीथ के हाथ में होगा।


      मानव तस्करी के खिलाफ संयूक्त राष्ट्र संघ का नया संघर्ष – 

      दुनियाभर में मानव तस्करी की रोकथाम सम्बन्धी समझौते को लागू करने वाली प्रमुख संस्था संयूक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध रोकथाम कार्यालय ‘यूएनओडीसी’ ने इसके खिलाफ लडाई तेज करने के लिए संयूक्त राष्ट्र वैश्विक मानव तस्करी संघर्ष पहल ‘यूनगिफ्ट’ शुरू की है। इसका उद्देश्य मानव तस्कारी के खिलाफ जागरूकता बढाना , मानव तस्करी सम्बंधित आकड़ो के आधार को मजबूत करना और तकनिकी सहायता बढाना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विऐना में फ़रवरी, 2008 में मानव तस्करी के विषय पर विश्व सम्मलेन का आयोजन किया गया। इस सम्मलेन में मानव तस्करी के मूल कारणों , उसके सामाजिक व आर्थिक प्रभावों तथा इसे समाप्त करने के लिए आवश्यक उपायों पर जोर दिया गया। 


      साइप्रस व माल्टा यूरो अपनाने वाले देशो में शामिल – 

      यूरोपीय संघ (EU) के दो अन्य देश- माल्टा व साइप्रस ने 1 जनवरी , 2008 से यूरोप की एकीकृत मुद्रा- यूरो (Euro) को अपना लिया है। इससे यूरो मुद्रा वाले दशो की कुल, संख्या अब 15 हो गयी है। इससे पूर्व माल्टा में ‘माल्टीस लीरा’ तथा साइप्रस के ‘साइप्रस पाउंड’ प्रचलन में थे। साइप्रस में केवल दक्षिणी ग्रीक-भाषी क्षेत्र में ही यूरो को अपनाया गया है। उत्तरी टर्किश साइप्रस में पूर्ववत ‘टर्किश लीरा’ ही चलन में बरकरार है। उल्लेखनीय है की यूरोप के 12 देशो ने अपनी पृथक मुद्राओं के स्थान पर यूरो को 1 जनवरी , 2002 से अपनाया था। बाद में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फ़िनलैंड, इटली, लक्सम्बर्ग, नीदरलैंड,पुर्तगाल व स्पेन द्वारा भी ‘यूरो’ अपना लिए जाने से यूरो वाले देशो की संख्या 13 हो गयी थी। 


      पहले अफ़्रीकी उपग्रह का प्रक्षेपण सफल – 

      फ्रेंच गुआना के कोरु अन्तरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किये गये यूरोप के ‘एरियन 5’ राकेट ने 21 दिसम्बर , 2007 को अंतरिक्ष कक्ष में दो उपग्रहों को स्थापित किया , जिनमे पहला पैन- अफ़्रीकी संचार उपग्रह शामिल था। लांच लिए जाने के आधे घंटे बाद एरियन 5 ने अफ्रीका के ‘आरएससीओएम-क्यूएफ-1’ और अमेरिका के ‘होराज़न-2’ उपग्रह को कक्ष में स्थापित कर दिया। एरियन का यह साल का छठा सफल प्रक्षेपण था। 


      शेंजेन समझौते में पूर्वी यूरोप के नौ देश शामिल - 

      यूरोप के भूतपूर्व इंस्टर्न ब्लॉक के नौ देशों चेक गणराज्य, एस्तोनिया, हंगरी, लाटवियालिथुआनिया, माल्टा, पोलैण्ड, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया ने 21 दिसम्बर, 2007 को यूरोपीय जोन में शामिल होने के लिए अपनी सरहदों पर आवाजाही में होने वाली रोक-टोक को समाप्त कर दिया ये देश यूरोप के शेंजेन समझौते में शामिल हो गए। इससे इनके 40 करोड़ लोग नॉवें में आर्कटिक सर्किल के पुर्तगाल के बीच बिना पासपोर्ट दिखाए स्वतन्त्रतापूर्वक आवागमन कर सकेंगे।                                                                                                


      दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र बनाएँगे विश्व बैंक की तर्ज पर बैंक –

      छह दक्षिण अमेरिकी राष्ट्रों अर्जेंटीना, बेनेजुएला, ब्राजील, बोलिविया, इक्वाडोर और पराग्वे के राष्ट्रपतियों ने 9 दिसम्बर, 2007 को विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की तर्ज पर दक्षिण अमेरिका में एक वैकिल्पक बैंक की शुरूआत करने के सिलसिले में एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस बैंक की शुरुआत सात अरब अमेरिकी डॉलर से की गई। वेनेजुएला की राजधानी काराकस में इस बैंक का मुख्यालय होगा। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स और बोलिविया की वैधानिक राजधानी ला पॉज में इस बैंक की एक-एक शाखा खोली गई हैं। इस बैंक का लक्ष्य दक्षिण अमेरिका के आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना और निजी क्षेत्र की परियाजनाओं को कम दरों पर वित्तीय सहायता देना है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे दूसरे अन्य संस्थानों में सभी सदस्यों को वीटो पावर की सुविधा नहीं है, जबकि दक्षिण अमेरिका के इस बैंक के सारे सदस्यों को वोटो पावर की सुविधा दी गई है।              


      जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन बाली में सम्पन्न – 

      ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर कटौती के मामले में विश्वव्यापी सहमति कायम करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में वैश्विक सम्मेलन (United Nations Climate Change Conference) इण्डोनेशिया के बाली द्वीप में नूसा दुआ (Nusa Dua) में 3-14 दिसम्बर, 2007 को सम्पन्न हुआ। 190 देशों के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया। ऑस्ट्रेलिया जिसकी पूर्ववर्ती कंजरवेटिव सरकार ने इस सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा की थी, ने भी इस सम्मेलन में जोर-शोर से भाग लिया। ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमन्त्री केविन रूड स्वयं इस सम्मेलन को सम्बोधित करने वालों में शामिल थे। सम्मेलन में भागीदारी से पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमन्त्री रूड ने क्योटो सन्धि पर हस्ताक्षर भी 3 दिसम्बर, 2007 को कार्यभार सँभालते ही किए थे। वर्ष 1997 में बनी क्योटो सन्धि से आगे की रणनीति बनाने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा किया गया था। विश्व के प्रमुख 36 औद्योगिक देशों पर लागू क्योटो सन्धि की अवधि 2012 में समाप्त हो रही है, इस सन्धि के अन्तर्गत इन 36 औद्योगिक देशों को 2008 तक ग्रीन हाउस गैसों में उत्सर्जन का स्तर क्रमशः घटाते हुए 1990 के स्तर तक लाने की जिम्मेदारी है। सम्मेलन में भारतीय शिष्टमण्डल का नेतृत्व केन्द्रीय विज्ञान मन्त्री कपिल सिब्बल ने किया था। दो सप्ताह तक चले इस सम्मेलन मे नई सन्धि तैयार करने को विकसित एवं विकासशील देशों में सहमति अन्तिम समय में ही हो सकीइस सम्बन्ध में अगली बैठक डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में वर्ष 2009 में होगी। सन्धि वर्ष 2012 में लागू होगी।                                                                 


      पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमन्त्री बेनजीर भुट्टो की हत्या - 

      आठ वर्ष के निर्वासन के पश्चात् 18 अक्टूबर, 2007 को स्वदेश लौटी पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमन्त्री बेनजीर भुट्टो की रावलपिण्डी में 27 दिसम्बर2007 को जब एक चुनावी सभा को सम्बोधित करने के बाद वह अपनी गाड़ी में सवार हुई थीं रहस्यमय परिस्थतियों में हत्या कर दी गई।                                                 


      15 सितम्बर अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस घोषित - 

      लोकतन्त्रीकरण एवं विकास को बढ़ावा देने और मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतन्त्रता के सम्मान पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 सितम्बर 2007 को अन्तर्राष्ट्रीय लोकतन्त्र दिवस घोषित किया है।


      नेपाल  को गणतन्त्र घोषित करने का प्रस्ताव पारित – 

      नेपाल की संसद ने संविधान सभा चुनाव के बाद नेपाल को गणतन्त्र घोषित करने का प्रस्ताव 4 नवम्बर, 2007 को पारित कर दिया। संविधान सभा के चुनाव समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली से होंगेसत्ताधारी गठबन्धन के राजशाही के मुद्दे पर एकमत नहीं हो पाने के कारण संसद के विशेष सत्र को आगे बढ़ाया गया था। विशेष सत्र की समाप्ति के अवसर पर माओवादियों ने देश को तत्काल गणतन्त्र घोषित करने का प्रस्ताव वापस ले लिया। इसके बदले में संसद ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) का वह संशोधित प्रस्ताव पारित किया, जिसमें संविधान सभा चुनाव के बाद नेपाल को गणतन्त्र घोषित करने की बात कही। पूर्ण रूप से समानुपातिक निर्वाचन प्रकिया अपनाने की माओवादियों की माँग भी संसद ने मंजूर कर ली। माओवादियों ने संसद में अपनी पार्टी के प्रस्ताव को वापर लेने और सीपीएम (यूएमएल) की ओर से पेश संशोधित प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की। हालांकि, देश की सबसे बड़ी नेपाली कांग्रेस पार्टी ने दोनों प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया।


      2008 विश्व पर्यावरण – 

      संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2008 को विश्व पर्यावरण स्वछता वर्ष घोषित किया है। संयूक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इसकी घोषणा की। मौजूदा समय में दुनियाभर में 2 अरब से जादा लोगो के पास बुनियादी पर्यावरण सफाई सुविधाओं का अभाव है। विकासशील देशो में अधिकतर लोगो के लिए स्वच्छ जल भी उपलब्बध नहीं है। आंकड़ो के अनुसार दुनियाभर में हर सप्ताह 40 हज़ार से जादा लोग ख़राब पानी एवं गंदिगी के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारियों से मौत का शिकार बन जाते है। ऐसी गंभीर स्तिथि से निपटने के लिए पुरे विश्व में स्वच्छता पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखकर वर्ष 2008 को विश्व पर्यावरण स्वच्छता वर्ष के रूप में मनाया जायेगा।

      मुद्रा और मुद्रा के प्रकार (Currency and types of Currency)

      मुद्रा क्या हैं? मुद्रा के प्रकार (What are currency and currency type)

      मुद्रा क्या हैं ? (What are currency?)

      हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हम मुद्रा और मुद्रा के प्रकार(Currency and types of Currency) के बारे में जानेंगे।  कोई भी ऐसी वस्तु जो जनता की आम सहमति के द्वारा लेन – देन या भुगतान के माध्यम के रूप में प्रयोग की जाती है। अर्थात् जिसका उपयोग विनिमय (Exchange) के रूप में किया जाता है। वह मुद्रा ( Money ) कहलाती है। प्रत्येक देश की अपनी एक राष्ट्रीय मुद्रा होती है। जैसे भारत की राष्ट्रीय मुद्रा "रूपया" है 

      Currency and types of Money

        मुद्रा की तरलता (Money Liquidity)

        मुद्रा की वह क्षमता जिससे उसे नकद में रूपांतरित किया जा सकता है। उस मुद्रा की तरलता ( Liquidity of Money ) कहते हैं। जितनी अधिक आसानी से नकद में रूपांतरित किया जा सकेगा उतनी ही अधिक मुद्रा की तरलता होगी।

        संक्रीण मुद्रा (Narrow Money)

        मुद्रा आपूर्ति का वह हिस्सा जिसको आसानी से नकद में रूपांतरित किया जा सकता है। जिसकी तरलता सर्वाधिक होती है। संक्रीण मुद्रा कहलाती है। उदाहरण -: कैश ( Cash )

        वृहद मुद्रा (Broad Money)

        मुद्रा आपूर्ति का वह हिस्सा जिसे थोड़े से प्रयास से नकद में रूपांतरित किया जा सकता है। वृहद मुद्रा कहलाती है। उदाहरण -: चेक (Cheque)

        समीप मुद्रा (Near Money)

        इस प्रकार की मुद्रा की तरलता काफी कम होती है। परंतु कुछ प्रयासों के द्वारा तरल में रूपांतरित किया जा सकता है। समीप मुद्रा कहलाती है। उदाहरण -: शेयर (Share)

        मुद्रा के प्रकार (Types of Money)

        1. वस्तु या पदार्थिय मुद्रा (Commodity Money)

        इस प्रकार की मुद्रा में किसी भी पदार्थ का उपयोग मुद्रा के रूप में किया जाता है। उदा. – बर्तन, हाथी दांत।

        2. धात्विक मुद्रा (Metallic Money)

        जब किसी भी धातु का उपयोग मुद्रा के रूप में करते हैं तो उसे धात्विक मुद्रा कहा जाता है। उदा. – सोना, चांदी।

        3. मानक मुद्रा (Standard Money)

        यह धात्विक मुद्रा का ही प्रकार है। यहां पर अंकित मान का मूल्य उतना ही होता है। जितने मूल्य की वह वस्तु है। उदा. – सिक्के।

        4. सांकेतिक मुद्रा (Token Money)

        यहां पर अंकित मान निर्मित मौद्रिक वस्तु के मूल्य से अधिक होता है।

        5. कागजी मुद्रा (Paper Money)

        जब कागज का उपयोग भिन्न भिन्न मौद्रिक मान के लिए किया जाता है। भारत में कागजी मुद्रा भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा जारी की जाती है।

        अपवाद = भारत में एक रुपए को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। तथा इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। और सभी प्रकार के सिक्कों को वित्त मंत्रालय जारी करता है व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया चलन में लेकर आता है।

        6. आदेश मुद्रा (Order currency)

        इसे सरकारी आदेशों के द्वारा जारी किया जाता है। इसके वैधानिक महत्व होते हैं। इस मुद्रा को बगैर सोना, प्रतिभूतियों के आधार पर जारी किया जाता है। इसे संकट की घड़ी में इस्तेमाल किया जाता है। वर्ल्ड वार-2 के समय सबसे ज्यादा आदेश मुद्रा हिटलर ने जारी की थी।

        7. बैंक मनी (Bank Money)

        यह वह मुद्रा है जो आम जनता द्वारा बैंकों में जमा की हुई है। इस मुद्रा को मांग के अनुसार भुगतान किया जाता है। इसी जमा राशि के आधार पर चेक, ड्राफ्ट जारी किए जाते हैं। अतः इसे क्रेडिट मुद्रा भी कहते हैं।

        8. खाता मुद्रा (Money of Account)

        यह मुद्रा का वह रूप है जिस रूप में सरकार अपने खाते का रख रखाव करती है।

        9. वास्तविक मुद्रा (Real Money)

        यह वह मुद्रा है जो वास्तव में किसी देश में चलन में है।

        10. वैधानिक मुद्रा (Legal Tender Money/ Fiat Money)

        यह वह मुद्रा है। जिसको सरकार या कानून से समर्थन प्राप्त होता है। प्रत्येक व्यक्ति इस मुद्रा को स्वीकार करने के लिए बाध्य होता है।

        इसके दो प्रकार होते हैं –

        1. सीमित वैधानिक मुद्रा/ Limited Legal Tender Money (सिक्के)

        2. असीमित वैधानिक मुद्रा/ Unlimited Legal Tender Money (कागजी नोट)

        11. बंजर मुद्रा (Barren Money)

        नगद को बंजर मुद्रा कहते हैं। क्योंकि नकद अपने आप में कुछ भी उत्पन्न नहीं करता है।

        मुद्रा के कार्य (Use of Money)

        यह विनिमय (Exchange) का माध्यम है। वस्तुओं और सेवाओं (Goods and Services) के मूल्य का निर्धारण (pricing) करता है। आंशिक भुगतान (Partial payment) के मानक के रूप में कार्य करता है। इसमें धारण की प्रकृति (nature of holding) होनी चाहिए। यह तत्काल हुए लेन देन को प्रभावी करता है। यह साख का आधार है। यदि हमारे खाते में मुद्रा होगी तभी हम साख उत्क्रमण (Credit Reversal) का प्रयोग कर सकते हैं।


        आज के इस आर्टिकल में हमने मुद्रा और मुद्रा के प्रकार (Currency and types of Currency) के बारे में जाना।प्रत्येक की ओनी एक राष्ट्रीय मुद्रा होती है । जैसे भारत कि राष्ट्रीय मुद्रा रूपया  है। मुद्रा से जुड़े प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

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