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पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार - Study of Plant disease and its Types 2023

पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार - Study of Plant disease and Types 2023

आज के इस जानकारी भरी पोस्ट में जानेंगे की पादप रोग क्या हैं? पादप रोग के कौन कौन से उदाहरण हैं? साथ ही विभिन्न प्रकार के पादप रोगों के नाम के बारे में।

वैसे तो आपने पादप रोग के बारे स्कूल या कॉलेज में पढ़ा ही होगा की किस प्रकार से पौधे में रोग लग जाते हैं | यदि आप ग्रामीण क्षेत्र से हैं तो आपको पता होगा की कई बार हमारे फ़सल कैसे पादप रोग के कारण ख़राब हो जाते हैं।

पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार - Study of Plant disease and its Types 2022

Table of content:-

  • पादप रोग क्या हैं ? (What is Plant disease)
  • पादप रोगों के मुख्य उदाहारण ( Some Example of Plant disease)
  • पादप रोगों का क्या महत्व है? 
  • विषाणुजनित पादप रोग
  • जीवाणुजनित पादप रोग
  • कवकजन्य पादप रोग
  • कृमिजन्य रोग पौध कीट 
  • पौधे कीट
  • पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार
  • पादप रोग नियंत्रण की विधियां

पादप रोग का महत्व, उनके द्वारा होने वाली हानियों के कारण बहुत ही ब़ढ़ गया है। रोगों द्वारा हानि खेत से भण्डारण तक अथवा बीज बोने से लेकर फसल काटने के बीच किसी भी समय हो सकती है पौधे के जीवन काल में बीज सड़न, आर्द्रमारी, बालपौध झुलसा, तना सडन, पर्णझुलसा, पर्ण-दाग, पुष्प झुलसा तथा फल सड़न ब्याधियॉ उत्पन्न होती है।

पादप रोग क्या हैं ? (What is Plant disease)

पादप रोग को यदि  एक लाइन में समझना हो तो हम बोल सकते हैं पादपो में होने वाले रोग | पौधे के जीवन काल में बीज सड़न, आर्द्रमारी, बालपौध झुलसा, तना सडन, पर्णझुलसा, पर्ण-दाग, पुष्प झुलसा तथा फल सड़न आदि |

अन्य शब्दों में पादप रोग क्या हैं- 

पादप रोगविज्ञान या फायटोपैथोलोजी (plant pathology या phytopathology) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक के तीन शब्दों जैसे पादप, रोग व ज्ञान से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "पादप रोगों का ज्ञान (अध्ययन)"। जीव विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत रोगों के लक्ष्णों, कारणों, हेतु की, रोगचक्र, रागों से हानि एवं उनके नियंत्रण का अध्ययन किया जाता हैं।

पादप रोगों के मुख्य उदाहारण - ( Some Example of Plant disease)

  • गन्ने में का लाल सड़न रोग - उत्तर प्रदेश के पूर्वी भागों तथा बिहार के निकटस्थ क्षेत्रों में,
  • गन्ने का लाल सड़न या कंड - समस्त भारत में,
  • आम का चूर्णिल आसिता व गुच्छा शीर्ष रोग
  • अमरूद का उकठा
  • मध्य एवं दक्षिणी भारत में सुपारी को महाली अथवा कोलिरोगा रोग,
  • गेहूं के किटट,
  • अरहर तथा चने का उकठा,
  • नेमाटोड से उत्पन्न गेहूं को गेगला या सेहूं रोग
  • सब्जियों का जडग्रन्थि व मोजेक,
  • काफी एवं चाय का किटट,

पादप रोगों का क्या महत्व है? 

पौधों की बीमारियों का अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पौधे के साथ-साथ पौधों की उपज को भी नुकसान पहुंचाते हैं । खेत में, भंडारण में या बुवाई और उपज की खपत के बीच किसी भी समय विभिन्न प्रकार के नुकसान होते हैं। रोग प्रत्यक्ष मौद्रिक हानि और भौतिक हानि के लिए जिम्मेदार हैं।

विषाणुजनित पादप रोग : 

  1. केला का बंची टॉप 
  2. आलू मोजेइक, 
  3. तंबाकू मोजेइक, 
  4. आलू का लीफ रोल, 
  5. तंबाकू, टमाटर और पपीता का पर्ण-संकुचन, 
  6. गाजर का रेड लीफ ।

जीवाणुजनित पादप रोग : 

  1. गेहूँ का तुंदु रोग, 
  2. धान का ब्लाइट, 
  3. कपास का उँगलीदार पर्ण धब्बा या ब्लैक आर्म, 
  4. सेब, अलमंद, बेर, चेरी, आडू, नाशपाती आदि का क्राउन गाल रोग, 
  5. आलू का भूरा रूट, 
  6. आलू का चक्रीय रूट।

कवकजन्य पादप रोग : 

  1. गेहूँ का रस्ट- काला, भूरा, पीला, 
  2. तिल्ली पर्ण धब्बा या भूरा पर्ण धब्बा, 
  3. बाजरा का ग्रीन ईअर रोग, 
  4. बाजरा का स्मट रोग, 
  5. मूँगफली का टिक्का रोग, 
  6. गन्ने का रेड रूट, 
  7. बाजरा का अरगोट, 
  8. धान का ब्लास्ट रोग, 
  9. मूली, शलगम, पत्ता गोभी, फूल गोभी आदि का सफेद रस्ट, 
  10. गेहूँ का चूर्ण मिल्ड्यू. 
  11. गेहूँ का कर्नल बंट, 
  12. कहवा का रस्ट, 
  13. आलू का लेट ब्लाइट, 
  14. अंगूर, बाजरा, पत्ता गोभी, सरसों फूलगोभी, का डाउनी मिल्ड्यू, 
  15. पपीता का फूटरूट, 
  16. काला चना, राजमा आदि का बीन रस्ट, 
  17. कपास का विल्ट, 
  18. मटर का विल्ट, 
  19. धान का फूटरूट, 
  20. जौ का लूज स्मट।

कृमिजन्य रोग पौध कीट : 

  • नींबू का डाई बैक, 
  • टमाटर का रूट नॉट, 
  • गेहूँ का ईयर कोकल  

पौधे कीट : 

  • कपास का धब्बेदार गोलकृमि, 
  • चावल का स्टेम बोरर, 
  • कपास का भूरा पौध होपर,
  • कपास का गुलाबी गोलकृमि, 
  • गंधी बग या धान्य बग, 
  • नारियल का कीड़ा।

Study of Plant Disease and its Types 2022

लघु कृषक व्यापार संघ की स्थापना 1994 में हुई। यह ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रयास करता है। इसके प्रबंधन बोर्ड का पदेन अध्यक्ष कृषि मंत्री और इसका पदेन उपाध्यक्ष भारत सरकार के कृषि और सहकारिता विभाग का सचिव होता है। 

चीन और अमेरिका के बाद भारत विश्व में उर्वरकों का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है।  भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर है, जबकि डी.ए.पी. के मामले में उसकी आत्मनिर्भरता 95 प्रतिशत है। पूरे देश में उर्वरकों की खपत 89.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। 

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पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार

उर्वरकों के उपभोग में पंजाब तथा हरियाणा क्रमश: पहले तथा दूसरे स्थान पर हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड तथा सिक्किम 10 किग्रा / हेक्टेयर भी उपभोग नहीं करते हैं| देश में बिजली की प्रति व्यक्ति सबसे अधिक खपत पंजाब में है।

तो आज के इस पोस्ट में हमने पादप रोग का अध्ययन तथा प्रकार के बारे पूरी जानकारी देखा आशा करते हैं की आपको Study of Plant Disease and its Types की यह जानकारी पसंद आई होगी और आपको कुछ नए पादप रोगों के बारे में जानने सिखने को मिला होगा |

 >>भारत के राष्ट्रीय उद्यान। National Parks of India in Hindi 

पादप रोग नियंत्रण की विधियां

ट्राइकोडर्मा पादप रोग प्रबंधन विशेष तौर पर मृदा जनित बिमारियों के नियंत्रण के लिए बहुत की प्रभावशाली जैविक विधि है। ट्राइकोडर्मा एक कवक फफूंद है । यह लगभग सभी प्रकार के कृषि योग्य भूमि में पाया जाता है। ट्राइकोडर्मा का उपयोग मृदा जनित पादप रोगों के नियंत्रण के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

पादप रोग की खोज किसने की थी?

पादप रोग की खोज लॉर्ड प्लिनी (100 ई.) उन्होंने पौधों के रोगों का वर्णन किया और कुछ उपाय सुझाए। उनका मानना था कि रोग पौधों से या पर्यावरण से उत्पन्न होता है।

इस आर्टिकल में हमने पादप रोंगों, पादप रोगों के प्रकार, पादप रोगों का महत्त्व और पादप रोंगों के नियंत्रण के बारे में जाना। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पादप रोगों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

आशा करता हूँ कि पादप रोंगों की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,यदि आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।


जीवों का वर्गीकरण (Classification of Organisms in Hindi)

जीवों का वर्गीकरण (Classification of Organisms in Hindi)

हेलो दोस्तों, इस लेख में हम जीवों के वर्गीकरण के बारे में जानने वाले हैं। जीवों को उनकी शारीरिक सरंचना ,रूप रंग एवं कार्य के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। "लीनियस को आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली का पिता कहा जाता है।" लीनियस ने अपनी पुस्तक 'सिस्टम नेचुरा' में जीवों के वर्गीकरण के बारे में लिखा है ,जो वर्तमान में सर्वाधिक मान्य है। विभिन्न परीक्षाओं में भी जीवों के वर्गीकरण से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। जीवों के वर्गीकरण के बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को पूरा जरुर पढ़ें।


Classification of Organisms in Hindi


Table of content: -

  • जीवों का वर्गीकरण (Classification of Organisms in Hindi)
  • जीवों के वर्गीकरण की श्रेणियाँ (Categories Classification of organisms)
  • जीवों के जगत (Kingdoms of Organisms in Hindi) 
  • दो जगत वर्गीकरण (Two Kingdom Classification) 
  • चार जगत वर्गीकरण (Four Kingdom Classification in Hindi) 
  • पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification in Hindi)
  • द्विनाम नामकरण पद्धति (Binomial System of Nomenclature) 
  • जाति की अवधारणा (Concept of Species) 
  • वर्गिकी पदानुक्रम (Taxonomic Hierarchy) 
  • पादप जगत (Plant Kingdom list)

Biological Classification in Hindi

परिचय (Introduction) :

"जन्तुओं को समानताओं तथा असमानताओं के आधार पर वर्गीकरण की पद्धति में उचित स्थान देना वर्गीकरण (Classification) कहलाता है।"

वर्गीकरण का विज्ञान वर्गिकी (Taxonomy) कहलाता है। 

जाति (Species) से जगत (Kingdom) तक प्रत्येक स्तर पर जीवों के समूहों की तुलना द्वारा विविधता का अध्ययन बायोसिस्टेमैटिक्स (Biosystematics) कहलाता है। 

पढ़ें- ग्रह क्या है।

जीवों का वर्गीकरण (Classification of Organisms in Hindi)

वर्गिकी (Taxonomy) के अन्तर्गत जीवों की पहचान, नामकरण तथा वर्गीकरण का अध्ययन किया जाता है।

  1. जगत (Kingdom)
  2. संघ (Phylum)
    • उपसंघ (Subphylum),
    • अधिवर्ग (Superclass)
  3. वर्ग (Class)
    • उपवर्ग (Subclass),
    • सहगण या कोहऑर्ट (Cohort),
    • अधिगण (Superorder)
  4. गण (order)
    • उपगण (Suborder),
    • अधिकुल (Superfamily)
  5. कुल (Family)
    • उपकुल (Subfamily),
    • आदिम जाति (Tribe)
  6. वंश (Genus)
    • उपवंश (Subgenus)
  7. जाति (Species)
    • उपजाति (Subspecies)

जीवों के वर्गीकरण की श्रेणियाँ (Categories Classification of organisms)

* टेक्सॉन (Taxon) - एक दी गयी वर्गीकरण पद्धति में किसी भी स्तर का एक वर्गिकीय समूह है, उदाहरण— ब्रेसिकेसी (Brassicaceae), सोलेनम (Solanum) आदि। 

* कैटेगरी (Category) - वर्गीकरण के विभिन्न रैंक या स्तर हैं। यह एक वर्गिकीय शब्द है और जीवित प्राणी को प्रदर्शित नहीं करती है। 

* जाति (Species) - ऐसे जीवों का समूह है जो आकारिकी दृष्टि से समान लक्षणधारी होते हैं व आपस में प्रजनन कर अपने समान अन्य जीवों को उत्पन्न करते हैं, उदाहरण मेन्जिफेरा इन्डिका (Mangifera indica) 

* वंश (Genus) - ऐसी जातियों का समूह है जो आपस में सम्बन्धित होती हैं तथा इनमें जातियों की तुलना में कम लक्षण समान होते हैं, उदाहरण- मेन्जिफेरा (Mangifera) 

* कुल (Family) - इस प्रकार के वंशो का समूह है जो आपस में एक-दूसरे से अन्य कुलों की तुलना में कही अधिक सम्भव लक्षण दर्शाते हैं, उदाहरण – मालवेसी -  (Malvaceae) 

* गण (Order) - ऐसे कुलों का समूह है जो कुछ लक्षणों में एक दूसरे से समानता दर्शाते हैं। ये लक्षण किसी कुल में सम्मिलित वंशों की तुलना में कहीं कम समान होते हैं, उदाहरण - रोजेल्स (Rosales )

* वर्ग (Class) - अनेक गणों से मिलकर बनता है, उदाहरण - डाइकोटिलीडनी ( Dicotyledonae) । 

* संघ (Phylum) या प्रभाग (Division) - कई वर्गों से मिलकर बना होता है, उदाहरण - स्पर्मेटोफाइटा (Spermatophyta)

* जगत (Kingdom) - इसके अन्तर्गत वे जीव आते हैं जो विशिष्ट सामान्य लक्षणों का समुच्चय बनाते हैं 

* जीवों का विभिन्न रासायनिक पदार्थों, द्वितीयक उपापचयी पदार्थों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर वर्गीकरण रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy) कहलाता है। . जैसे-कुल-चिनोपोडिएसी (Chenopodiaceae), एमरेन्थेसी (Amaranthaceae) तथा एड़जोएसी (Aizoaceaeमें बीटासाइनीन (betacyanin) वर्णक पाया जाता है। 

* पौधों के वर्गिकीय अध्ययन के लिए गणित के सामान्य सिद्धान्तों या तकनीकों का प्रयोग संख्यात्मक वर्गिकी (Numerical Taxonomy) या फिनेटिक्स (Phenatics) कहलाता है। 

* जीवों के वर्गीकरण के लिए गुणसूत्र या अन्य कोशिकीय अध्ययन से सम्बन्धित वर्गिकी साइटोटेक्सोनोमी (Cytotaxonomy) कहलाती है। 

* जन्तुओं तथा पादपों के अभिनिर्धारण (identification) के लिए तैयार की गयी योजना या व्यवस्था कुँजी (key) कहलाती है।

जानें- 20+ वैज्ञानिक कारण।

जीवों के जगत (Kingdoms of Organisms in Hindi) 

** हिप्पोक्रेट्स (Hippocrates460-377 BC) एवं अरस्तू (Aristotle; 384-322 BC) ने जन्तुओं को चार मुख्य समूहों-कीट (insects), पक्षी (birds)मछली (fishes) तथा व्हेल (whales) में रखा। 

** थियोफ्रेस्टस (Theophrastus 372-287 BC) ने पौधों को वृक्ष, शाक और झाड़ी में वर्गीकृत किया। 

** जॉन रे (John Ray; 1627-1705) ने 18000 से अधिक पौधों तथा जन्तुओं का वर्णन अपनी पुस्तक “हिस्टोरिया जेनरेलिस प्लान्टेरम” (Historia Generalis Plantarum) में किया। 

दो जगत वर्गीकरण (Two Kingdom Classification) 

** दो जगत वर्गीकरण लिनियस (Linnaeus; 1758) ने दिया था। इस वर्गीकरण में सभी जीवों को पादपों अर्थात् प्रकाश संश्लेषी जीव (photosynthetic organisms) तथा जन्तुओं अर्थात् अप्रकाश-संश्लेषी जीव (non-photosynthetic organisms ) में विभाजित किया गया था। 

** यूग्लीना (Euglena) में पादप तथा जन्तु दोनों के लक्षणों की उपस्थिति, जीवाणु तथा साइनोबैक्टीरिया की अन्य जीवों से भिन्नता तथा कवकों का अप्रकाश-संश्लेषी होते हुए भी पादपों में रखना आदि के कारण यह वर्गीकरण मान्य नहीं हुआ। 

दो जगत वर्गीकरण के महत्त्वपूर्ण बिन्दु -

  1. कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus) को वर्गिकी का पिता (Father of Taxonomy) कहा जाता है। 
  2. आकारीकीय लक्षणों के आधार पर पौधों का वर्गीकरण अल्फा वर्गिकी (cr-taxonony) कहलाता है। यह शब्द तुरिल (Turill; 1948) ने दिया था। 
  3. आकारीकीय लक्षणों के साथ-साथ शारीरिकी, कोशिका विज्ञान, भ्रूणिकी, आण्विक जीव विज्ञान का वर्गीकरण में प्रयोग बीटा वर्गिकी (J-taxonomy) कहलाता है। 
  4. ए पी डी कण्डोले (A P de Condolle; 1813) ने सर्वप्रथम टेक्सोनॉमी (Taxonomy) शब्द का प्रयोग किया। 
  5. नाम प्रारूप (holotype) वह नमूना है जिसे लेखक ने जाति के नामकरण के विवरण के साथ सुरक्षित रखा हो। 
  6. सम प्रारूप (isotype) नाम प्रारूप के प्रतिरूपी नमूने होते हैं। 
  7. अनुप्रारूप (paratype) वह नमूना है जो प्रथम वर्णन के नाम प्रारूप या समप्रारूप के अतिरिक्त रखा गया हो। 
  8. तुल्य प्रारूप (syntype) जाति के विवरण में लेखक द्वारा चुने गये दो या अधिक नमूने हैं। 
  9. लेक्टोप्रारूप (lectotype) वह प्रारूप है जो जाति के प्रथम विवरण या प्रकाशन में नाम प्रारूप के न दिये जाने पर बाद में मूल पादप से चुना जाता है। 
  10. पादपों के वैज्ञानिक नाम इण्टरनेशनल कोड ऑफ बोटेनिकल नॉमनक्लेचर (ICBN) तथा जन्तुओं के वैज्ञानिक नाम इण्टरनेशनल कोड ऑफ जूलोजीकल नॉमनक्लेचर (ICZN) द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।

चार जगत वर्गीकरण (Four Kingdom Classification in Hindi) 

  • कोपलैण्ड (Copeland; 1956) ने सभी जीवों को चार जगतों— माइकोटा या मोनेरा, (Mycota or Monera), प्रोटिस्टा (Protista), प्लान्टी (Plantae) तथा एनिमेलिया (Animalia) में बाँटा 
  • माइकोटा के अन्तर्गत प्रारम्भिक केन्द्रक युक्त जीव (जीवाणु तथा साइनोबैक्टीरिया) प्रोटिस्टा के अन्तर्गत शैवाल, कवक तथा प्रोटोजोआ, प्लान्टी के अन्तर्गत प्रकाश-संश्लेषी बहुकोशिकीय जीव तथा एनिमेलिया के अन्तर्गत, अप्रकाश-संश्लेषी बहुकोशिकीय जीव रखे गये। 

पाँच जगत वर्गीकरण (Five Kingdom Classification in Hindi)

आर एच व्हिटेकर ( R H Whittaker; 1969) ने कोशिका संरचना की जटिलता (यूकैरियोटिक अथवा प्रोकैरियोटिक), पोषण विधि के प्रकार तथा स्रोत (स्वयंपोषी अथवा परपोषी), शरीर संगठन की जटिलता (एककोशिकीय अथवा बहुकोशिकीय) तथा जीवन-चक्र के प्रकार (उत्पादक अथवा उपभोक्ता) के आधार पर जीवों को पाँच जगतों – मोनेरा, प्रोटिस्टा, फन्जाई, प्लान्टी तथा एनिमेलिया में विभाजित किया – 

(i) मोनेरा (Monera) 

- अविकसित केन्द्रक युक्त सभी प्रोकैरियोटिक जीव इसके अन्तर्गत आते हैं। 

- ये जीव वातावरण में विघटनकारी (decomposer) का कार्य करते हैं। 

- इनमें दृढ़ कोशिका भित्ति उपस्थित होती है। उदाहरण- जीवाणु तथा नीले-हरे शैवाल । 

(ii) प्रोटिस्टा (Protista) 

- इसमें एक कोशिकीय यूकैरियोटिक जीव रखे गये हैं। 

- ये स्वतन्त्र जीवी, परजीवी या स्वपोषी हो सकते हैं। उदाहरण- प्रोटोजोआ (Protozoa) डाइनोफ्लेजीलेट्स (dinoflagellates) सदस्य

(iii) प्लान्टी (Plantae)

- इसमें बहुकोशिकीय पादप रखे गये हैं।

- इनकी कोशिकाओं में सैल्यूलोस की बनी कोशिका भित्ति पायी जाती है।

- ये स्थलीय या जलीय तथा स्वंयपोषी होते हैं। उदाहरण- हरी, लाल तथा भूरी शैवाल, ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, अनावृतबीजी तथा आवृतबीजी पादप

(iv) कवक (Fungi)  

- एककोशिकीय या बहुकोशिकीय हो सकते हैं। 

- क्लोरोफिल की अनुपस्थिति के कारण परपोषी होते हैं

- इनकी कोशिका भित्ति काइटिन (chitin) की बनी होते है उदाहरण- मोल्ड्स (molds), मशरूम (mushroom), पफ बॉल (puff ballतथा ब्रेकेट कवक (bracket fungi)

(v) एनिमेलिया (Animalia) 

- इसमें यूकैरियोटिक बहुकोशिकीय जन्तु रखे गये हैं। 

- ये परपोषी जीव हैं। 

उदाहरण- हाइड्रा (Hydra), कीट, मछलियाँ, सरीसृप, पक्षी तथा स्तनधारी

जानें- 10thके बाद क्या-क्या कर सकते हैं।

द्विनाम नामकरण पद्धति (Binomial System of Nomenclature) 

  • इस पद्धति के अनुसार किसी जीव के वैज्ञानिक नाम में वंश (Genus) तथा जाति (Species) दोनों का नाम सम्मिलित होता है। 
  • इसे सर्वप्रथम गास्पर्ड बॉहिन (Gaspard Bauhin1623) द्वारा प्रयोग में लाया गया परन्तु इस पद्धति को प्रचलित करने का श्रेय कैरोलस लिनियस को जाता है। 
  • कैरोलस लिनियस ने अपनी पुस्तक स्पीसीज प्लान्टेरम Species Plantarumमें इसका वर्णन किया है
  • द्विनाम पद्धति में वंश के नाम का पहला अक्षर (अंग्रेजी में) बड़ा तथा जातिय नाम का पहला अक्षर छोटा लिखा जाता है और दोनों को इटेलिक (italic) करते हैं। 
  • नाम के अन्त में छोटे रूप में उस वैज्ञानिक का नाम लिखते हैं जिसने उस जाति और वंश का नाम बनाया था। उदाहरण- मेन्जिफेरा इन्डिका (Mangifera indica L)

जाति की अवधारणा (Concept of Species) 

जाति वर्गीकरण की सबसे छोटी या मूलभूत इकाई है। जाति (Species) शब्द जॉन रे (John Ray; 1686) ने प्रतिपादित किया। 

अर्नस्ट मेयर (Ernst Mayr ; 1942) द्वारा की गयी जाति की जैव अवधारणा (Biological concept of species) के अनुसार "जाति ऐसे जीवों की जनसंख्या है जो संरचना तथा कार्य में समान हो और परस्पर प्रजनन करके अपने जैसी सन्तान उत्पन्न कर सकते हो, परन्तु अन्य जातियों से प्रजनन नहीं करते हो”।

लोटसी (Lotsi; 1918) द्वारा दी गयी जाति की आनुवंशिकीय अवधारणा के अनुसार "जाति आनुवंशिक रूप से समान जीवों का समूह है। 

लिनियस द्वारा दी गयी जाति की आकारिकीय अवधारणा (Morphological concept of species) के अनुसार जाति आकारिकीय रूप से समान जीवों का समूह है 

विस्थानिक जातियाँ (Allopatric species) विभिन्न आवास या भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाली दो या अधिक जातियाँ हैं। 

समस्थानिक जातियाँ (Sympatric species) एक ही भौगोलिक परिस्थिति में पायी जाने वाली विभिन्न हैं। में पायी जाने वाली 

बहुप्ररूपी जातियाँ (Polytypic species) विभिन्न परिस्थितियों व आवासों एक ही जाति की दो या अधिक जनसंख्या हैं जिन्हें उपजातियाँ कहते हैं। 

सहोदर जातियाँ  (Sibling species) शारीरिक रूप से समान तथा पास-पास आवास में पायी जाने वाली वे जातियाँ है जिनमें परस्पर जनन नहीं होता। 

एक ही समय में पायी जाने वाली दो या अधिक जातियाँ समकालिक जातियाँ (Synchronic species), जबकि अलग-अलग समय में पायी जाने वाली दो या अधिक जातियाँ विषमकालिक जातियाँ (Allochronic Species) कहलाती है।

वर्गिकी पदानुक्रम (Taxonomic Hierarchy) 

* विभिन्न वर्गीकीय श्रेणियों को एक उचित उतरते हुए क्रम में व्यवस्थित करना वर्गिकी पदानुक्रम या लिनियन पदानुक्रम (Linnaean hierarchy) कहलाता है। 

वर्गीकरण की पद्धतियाँ (Systems of Classification) 

विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दिये गये वर्गीकरणों को निम्न तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है 

(i) कृत्रिम पद्धतियाँ (Artificial systems) इस पद्धति में किसी एक या कुछ लक्षणों के आधार पर जन्तुओं व पौधों के समूह तथा उपसमूह बनाये जाते हैं जैसे थियोफ्रेस्टस ने अपनी पुस्तक "हिस्टोरिया प्लान्टेरम" (Historia Plantarum) में 480 पौधों का वर्णन किया तथा स्वभाव व आकारिकी के आधार पर पौधों को शाक, झाड़ी तथा वृक्षों में विभाजित किया, जबकि लिनियस ने अपनी पुस्तक "जेनेरा प्लान्टेरम" (Genera Plantarum) में पौधों को पुष्प के आधार पर 24 वर्गों (23 पुष्पीय, 24वाँ अपुष्पीय) में विभाजित किया। लिनियस के वर्गीकरण का मुख्य आधार पुंकेसरों की संख्या, लम्बाई तथा संघ था, इसलिए इस वर्गीकरण को लैंगिक प्रकार का वर्गीकरण (sexual system of classification) भी कहते हैं। 

(ii) प्राकृतिक पद्धतियाँ (Natural systems) इसमें पौधों के वर्गीकरण के लिए सभी महत्वपूर्ण लक्षणों को आधार बनाया जाता है। पौधों की कायिक संरचना तथा जन क्रिया में समानता के आधार पर समूह व उपसमूह बनाये जाते हैं, जैसे- ए. डब्ल्यू. आइकलर (AW Eichler; 1883) ने पादप-जगत को उपजगत-क्रिप्टोगेम्स व फैनेरोगैम्स में विभाजित किया था।

बेन्थम एवं हुकर (Bentham and Hooker) का वर्गीकरण भी प्राकृतिक पद्धति पर आधारित था। 

(iii) जातिवृत्तीय पद्धतियाँ (Phylogenetic systems) इसमें पौधों को उनके विकास तथा उद्भव को ध्यान में रखकर वर्गीकृत किया जाता है अर्थात् विकास, आनुवंशिक लक्षणों तथा जनन गुणों के आधार पर समूह तथा उपसमूह बनाये जाते हैं, -एंग्लर एवं प्रेन्टल (Engler and Prantl), हचिन्सन (Hutchinson) तथा ओसबाल्ड  टिप्पो (Oswald Tippo) का वर्गीकरण

पादप जगत (Plant Kingdom list)

  1. क्रिप्टोगेम्स (Cryptogams)
    • थैलोफाइटा (Thallophyta)
      • शैवाल (Algae) 
      • कवक (Fungi) 
      • जीवाणु (Bacteria) 
      • लाइकेन (Lichen)
    • ब्रायोफाइटा (Bryophyta) 
    • टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) 
  2. फैनेरोगैम्स (Phanerogams)
    • अनावृतबीजी (Gymnosperms)
    • आवृतबीजी (Angiosperms)

इस आर्टिकल में हमने जीवों के वर्गीकरण के बारे में विस्तार से जाना। लीनियस को आधुनिक वर्गीकरण प्रणाली का पिता कहा जाता है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में जीवों के वर्गीकरण से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

आशा करता हूँ कि जीवों के वर्गीकरण का यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी ,अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।

9 ग्रह क्या है? (What is planet in Hindi)

ग्रह क्या है (What is planet in Hindi)

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम  ग्रह क्या है, सौरमंडल में कितने ग्रह हैं, सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है, सबसे छोटा ग्रह कौन सा है के बारे में विस्तार से जानेंगे। हम जहाँ रहते है वह पृथ्वी नाम का एक ग्रह है। ऐसे ही बहुत से ग्रह हैं जो सौरमंडल में पाए जाते हैं इनके अलावा भी आकाशगंगा में अरबों की संख्या में ग्रह हैं जिनका पता लगाना असंभव  है। आज के इस पोस्ट में सौरमंडल के सभी ग्रहों के बारे में जानेंगे।

आपको जानकर हैरानी होगी कि प्लानेट नाम का अर्थ बहुत ही अजीब है- Planet एक लैटिन का शब्द है, जिसका अर्थ होता है इधर-उधर घूमने वाला।

Planets of Solar System in Hindi



हमारे सौर मंडल में आठ ग्रह हैं - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण। इनके अतिरिक्त तीन बौने ग्रह और हैं - सीरीस, प्लूटो और एरीस।


ग्रहों के नाम हिंदी और इंग्लिश में (Planets Name In Hindi-English)

Planet English Name Planet Hindi Name
Mercury (मर्करी) बुध (Budh)
Venus (वेनस) शुक्र (Shukra)
Earth (अर्थ) पृथ्वी (Prithvi)
Mars (मार्स) मंगल (Mangal)
Jupiter (जुपिटर) बृहस्पति (Brahspati)
Saturn (सैटर्न) शनि (Shani)
Uranus (युरेनस) अरुण (Arun)
Neptune (नेप्‍च्‍यून) वरुण (Varun)

ग्रह क्या होते है? (What are planets in hindi?)

ग्रह (प्लानेट- Planet)

  • सौर मंडल के ग्रह (Planets of Solar System)
  • वे आकाशीय पिंड जो सूर्य या अन्य किसी तारे का चक्कर लगाते हैं तथा जो तारों के प्रकाश से चमकते हैं, उन्हें ग्रह कहते हैं। 
  • सूर्य की तुलना में ग्रहों का आकार छोटा और तापमान कम होता है।
  • प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों और एक दीर्घवृत्तीय कक्षा में चक्कर लगाता है। 
  • मुख्य ग्रहों के अलावा हमारे सौरमंडल में 5 बौने (Dwary Planets) है यथा प्लूटो, सीरस, ट्राईस, मेकमेक और होमीया ) (Pluto, Ceres, Tris, ´Makemake, Haumea). 
  • यम (Pluto) को सन् 2006 से ग्रहों की सूची से बाहर निकाल दिया गया है। 
  • सभी ग्रह घड़ी की उल्टी दिशा में चक्कर लगाते हैं, जबकि शुक्र और अरुण घड़ी की सीधी दिशा में चक्कर लगाते हैं। 
  • सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर 8 ग्रह चक्कर लगाते हैं। इनमें से छह ग्रह पृथ्वी, बुध, मंगल, बृहस्पति, शुक्र और शनि प्राचीनकाल से ही ज्ञात थे तथा अन्य तीन-अरुण, वरुण तथा यम की खोज दूरबीन के आविष्कार के बाद हुई।
  • सूर्य से बढ़ती दूरी के क्रम में ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण तथा यम यम की कक्षा सर्वाधिक दीर्घवृत्तीय (elliptical) है। सूर्य से इसकी कक्षा की निकटतम दूरी 4.4 बिलियन किलोमीटर और अधिकतम दूरी 7.3 बिलियन किलोमीटर है। 
  • सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर वामावर्त दिशा में शु घूमते हैं। उनकी अपनी अक्षीय गति भी वामावर्त दिशा में ही होती है, लेकिन शुक्र और अरुण इसके अपवाद हैं। शुक्र की अक्षीय गति अन्य ग्रहों की तुलना में उल्टी होती है, जबकि अरुण अपने किनारों के गिर्द घूमता है। 
  • बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण विशाल ग्रह हैं। 
  • केवल पाँच ग्रह ऐसे हैं, जिन्हें नग्न आँखों से (पृथ्वी के अलावा) देखा जा सकता है- बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति, शनि। 
  • ग्रह दो प्रकार के होते हैं-स्थलीय तथा जोवियन । 
  • जिन ग्रहों की रचना पृथ्वी के समान होती है, उन्हें स्थलीय या पार्थिव ग्रह कहते हैं। ये चार हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल।
  • मंगल ग्रह की कक्षा के बाहर स्थित ग्रह, जोवियन ग्रह कहलाते हैं। ये भी चार ग्रह हैं- बृहस्पति, शनि, अरुण तथा वरुण । यम इन दोनों श्रेणियों में से किसी में भी नहीं आता है। 
  • सूर्य से ग्रहों की दूरी के आधार पर सौरमंडल के ग्रहों को दो भागों में विभाजित किया जाता है-आंतरिक ग्रह तथा बाह्य ग्रह|
  • आंतरिक ग्रहों में बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल ग्रह आते हैं। 
  • बाह्य ग्रहों में बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण तथा यम आते हैं। 
  • सौरमंडल के बाह्य भाग वाले ग्रह आंतरिक भाग वाले ग्रहों की अपेक्षा काफी दूर हैं
  • आकार की दृष्टि से विभिन्न ग्रह (बड़े से छोटे ) इस प्रकार हैं- बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुणपृथ्वी, शुक्र, मंगल एवं बुध । 
  • सूर्य से बढ़ती दूरी के आधार पर विभिन्न ग्रह इस प्रकार हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण । 

बुध (मरकरी- Mercury) 

  • बुध ग्रह हमारे सौरमंडल का पहला ग्रह है।
  • यह सूर्य से सबसे पास स्थित है। 
  • इसका कोई उपग्रह नहीं हैं। यहाँ जीवन नहीं है। 
  • सूर्य का एक चक्कर लगाने में बुध को 88 दिन लगते है, जो सबसे कम है। 
  • इस ग्रह में चुंबकीय क्षेत्र नहीं पाया जाता है । 
  • इसका व्यास 4,849.6 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 5.76 करोड़ किलोमीटर है।


शुक्र (वीनस- Venus)

  • शुक्र ग्रह हमारे सौरमंडल का दूसरा ग्रह है।
  • यह सबसे चमकीला ग्रह है। इसका तापमान लगभग 500° सेंटीग्रेड है 
  • यह सबसे गर्म ग्रह है। 
  • यह एक शुष्क ग्रह है तथा यहाँ जीवन का अभाव है। 
  • इसे सूर्य का एक चक्कर लगाने में 225 दिन लगते हैं। 
  • इस ग्रह में सल्फ्यूरिक अम्ल के घने बादल छाए रहते हैं। 
  • शुक्र के वायुमंडल का 96 प्रतिशत भाग कार्बन डाइ ऑक्साइड और 3.5 प्रतिशत भाग नाइट्रोजन है।
  • शुक्र ग्रह पूर्व से पश्चिम की तरफ अपने अक्ष पर घूर्णन करता है, अतः यहाँ सूर्योदय पश्चिम की तरफ होता है।
  • शुक्र को भोर का तारा (morning star), सांध्य का तारा (evening star), पृथ्वी का जुड़वाँ तारा, पृथ्वी की बहन आदि नामों से भी जाना जाता है। 
  • शुक्र का व्यास 12,032 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 10.75 करोड़ किमी. है।


पृथ्वी (अर्थ- Earth)

  • पृथ्वी सौरमंडल में सूर्य से तीसरा ग्रह है। 
  • यह एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन है। 
  • पृथ्वी की उत्पत्ति के संदर्भ में नवीनतम सिद्धांत, बिगबैंग या महाविस्फोट सिद्धांत है। 
  • अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी ग्रह, एक नीले तथा चमकीले गोले के समान दिखाई देता है। 
  • पृथ्वी गोलाकार है। इसके 71 प्रतिशत भाग पर जल एवं 29 प्रतिशत भाग पर स्थल है। 
  • पृथ्वी उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों पर चपटी है, इसलिए ध्रुवों पर लिये गए पृथ्वी के व्यास व भूमध्यरेखा पर लिये गए पृथ्वी के व्यास में अंतर है। पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। यह अवधि 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकेंड है। घूर्णन की इसी घटना के कारण दिन एवं रात होते हैं
  • विषुवत रेखा पर घूर्णन की यह गति 1610 किमी. प्रति घंटा, 60° पर 850 किमी प्रति घंटा तथा ध्रुवों पर शून्य होती है।
  • पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर एक निश्चित दीर्घवृत्ताकार पथ पर 29.72 किमी प्रति सेकेंड की दर से परिक्रमण करती है। इस परिक्रमण की अवधि 365 दिन, 5 घंटे एवं 48 मिनट और 46 सेकेंड अर्थात 3651/4 होती है। चौथाई दिवस प्रतिवर्ष फरवरी महीने में जुड़ जाता है, जिससे उस वर्ष फरवरी 29 दिनों की होती है। इसे लीप वर्ष कहते हैं
  • पृथ्वी के परिक्रमण तथा अक्ष पर झुकाव कारण ही ऋतु परिवर्तन होते हैं। 

मंगल (मार्स- Mars)

  • मंगल ग्रह हमारे सौरमंडल का चौथा ग्रह है।
  • मंगल अपने अक्ष पर पृथ्वी की तरह ही झुका हुआ है. इसी वजह से यहाँ पृथ्वी की तरह ही मौसम परिवर्तन की घटनायें होती हैं। इसका व्यास 6755.2 किमी. है तथा सूर्य से इसकी दूरी 22.56 करोड़ किमी. है। 
  • मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है। 
  • मंगल 687 दिनों में सूर्य की परिक्रमा करता है। 
  • यहाँ भारी मात्रा में Feo पाया जाता है। 
  • मंगल पर सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलम्पस मोन्स (Olympus mons) है। मंगल के दो चंद्रमा भी हैं, जिन्हें फोमोस और डीमोस कहते हैं। 
  • मंगल में एवरेस्ट पर्वत से तीन गुनी ऊँची चोटी स्थित है, जिसका नाम निक्स ओलम्पिया है।

जानें- प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण लिस्ट एवं उनके कार्य।

बृहस्पति (जुपिटर- Jupiter)

  • बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का पांचवां ग्रह है।
  • आकार की दृष्टि से वृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है, जो पृथ्वी से लगभग 1300 गुना बड़ा है। इसकी गति भी अन्य ग्रहों की तुलना में तीव्र है।
  • बृहस्पति का तापमान - 150°C है। 
  • बृहस्पति के वायुमंडल में हाइड्रोजन और हीलियम की प्रधानता है। इसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र भी पाया जाता है। 
  • इसका व्यास 1,41,968 किमी. है तथा इसकी सूर्य से औसत दूरी 77.28 करोड़ किमी. है। 
  • इसके 63 उपग्रह हैं जिनमें से गैनीमीड सबसे बड़ा है।


शनि (सैटर्न- Saturn)

  • शनि ग्रह हमारे सौरमंडल का छठां ग्रह है तथा बृहस्पति के बाद सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं।
  • शनि के चारो तरफ चक्र या छल्ले पायें जाते है, जिसे वलय (ring) कहतें है।
  • खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुना ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है।


अरुण (यूरेनस- Uranus)

  • अरुण ग्रह हमारे सौरमंडल का सातवाँ ग्रह है।
  • अरुण आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण ग्रह को "लेटा हुआ ग्रह" कहा जाता है, क्योंकि यह अपनी धुरी पर सूर्य की ओर इतना झुका हुआ है कि लेटा हुआ दिखाई देता है।
  • अरुण ग्रह अकार में पृथ्वी से 63 गुना अधिक बड़ा है।
  • अरुण ग्रह को बिना दूरबीन के आँख से भी देखा जा सकता है।
  • युरेनस ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 14.5 गुना है।

वरुण (नॅप्चयून- Neptune)

  • वरुण ग्रह हमारे सौरमंडल का आठवाँ ग्रह है।
  • वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से 17 गुना अधिक है।
  • वरुण सूरज से बहुत ही ज्यादा दूर है, इसलिए इसका ऊपरी वायुमंडल बहुत ही ठंडा है और वहाँ का तापमान -128 C° (55 कैल्विन) तक गिर सकता है।

सौर मंडल ग्रह जीके हिंदी में (Solar System Planets GK in hindi)

1 सबसे चमकीला ग्रह शुक्र (Venus
2 सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
3 सबसे छोटा ग्रह बुध (Mercury)
4 सूर्य के सबसे पास स्थित ग्रह बुध (Mercury)
5 सूर्य के सबसे दूर स्थित ग्रह वरुण (Neptune)
6 पृथ्वी के सबसे पास स्थित उपग्रह शुक्र (Venus)
7 पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा (Moon)
8 सबसे अधिक उपग्रहों वाला ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
9 सबसे ठंडा ग्रह वरुण (Neptune)
10 सबसे गर्म ग्रह बुध (Mercury)
11 सबसे भारी ग्रह बृहस्पति (Jupiter)
12 सबसे चमकीला तारा साइरस (Dog star)
13 सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह डी मोस (Deimos)
14 सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह गैनिमेडे (Ganymede)
15 लाल ग्रह मंगल (Mars)
16 नीला ग्रह पृथ्वी ( Earth)
17 पृथ्वी की बहन भोर का तारा शुक्र (Venus)
18 साँझ का तारा शुक्र (Venus)
19 सुंदरता का देवता शुक्र (Venus)
20 हरा ग्रह वरुण (Neptune)

इस पोस्ट में हमने ग्रह क्या है, सौरमंडल में कितने ग्रह हैं, सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है, सबसे छोटा ग्रह कौन सा है इत्यादि के बारे में जाना। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में ग्रह से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

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पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य | Names and functions of nutrients plants

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य (Names and functions of nutrients essential for plants)

हेलो दोस्तों, आज के इस पोस्ट में हम पौधों में आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) नाम एवं उनके कार्य के बारे जानेंगे। पौधों के सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिस तरह से पुरे विश्व में ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है,हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पेड़ बचने का प्रयास करना चाहिए। इसके किये हमें पौंधों की देखभाल के बारे में आना जरुरी है । इसलिए इस पोस्ट में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के बारे में बताया गया है।

Names and functions of nutrients essential for plants

पौधों के प्राथमिक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम हैं। परन्तु केवल तीन पोषक तत्वों की सहायता से पौधों का सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) नहीं हो सकता है। निचे आपको पौधों के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्यों के बारे में दिया गया है-

Names and functions of nutrients essential for plants in Hindi

  1. कार्बन (Carbon)
    • पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) लेते हैं।
    • प्रकाश को उपस्थिति में CO2 क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण में भाग लेती है।
    • इसके अलावा पौधों के अधिकांश भाग में कार्बन पाया जाता है।

  2. ऑक्सीजन (Oxygen)
    • ऑक्सीजन पौधों को जल वायु से मिलती है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में CO2 से मिलकर ऑक्सीजन (O2) निकालता है तथा शर्कराओं का निर्माण करता है।

  3. हाइड्रोजन (Hydrogen)
    • हाइड्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए जल से प्राप्त होती है।
    • हाइड्रोजन आक्सीजन से मिलकर पानी बनाती है तथा कार्बन के साथ मिलकर जटिल रासायनिक यौगिक बनाती है।

  4. नाइट्रोजन (Nitrogen)
    • नाइट्रोजन पौधों के पर्णहरित न्यूक्लियक अम्ल, विटामिन्स, प्रोटीन, एमाइड्सएल्केलाइड्स तथा प्रोटोप्लाज्म की संरचना में भाग लेती है।
    • पौधों में नाइट्रोजन नियन्त्रक का कार्य करती है।
    • नाइट्रोजन, एडीनोसीन, ट्राइफॉस्फेट (ATP) का एक अवयव है। नाइट्रोजन, पर्णहरित का एक मुख्य अवयव होता है, इससे पत्तियों का रंग गहरा हरा होता है।
    • पौधे मृदा से नाइट्रेट को अपनी जड़ों द्वारा अमोनियम आयन्स (NH4 +) व नाइट्रेट आयन्स (NO3-) के रूप में ग्रहण करते हैं।      पढ़ें- रसायन विज्ञान MCQ प्रश्न।

  5. फॉस्फोरस (Phosphorus)
    • फॉस्फोरस न्यूक्लियो प्रोटीन,न्यूक्लियक अम्ल, फॉयटिन तथा फास्फोलिपिड्स का मुख्य अवयव फॉस्फोरस से फलीदार फसलों की जड़ों में स्थित ग्रंथियों की संख्या तथा आकार में वृद्धि होती है, जिससे वायुमण्डलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायता भी लेती है।
    • फॉस्फोरस से फल एवं बीज जल्दी बनता है जिससे पौधों एवं फलों में पूर्ण वृद्धि कम समय में हो जाती है अर्थात् फसल शीघ्र पक जाती है।
    • फॉस्फेट की उपस्थिति में पराग सेंचन (Pollination) अच्छा होता है, जो फसल की मात्रा एवं गुणों को प्रभावित करता है। यह नाइट्रोजन के प्रभाव को कम या उदासीन करती है।

  6. पोटैशियम (Potassium)
    • पोटैशियम कार्बोहाइड्रेट्स के स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा यह आयरन वाहक के रूप में कार्य करता है।
    • पोटैशियम पौधे में रोग तथा हानिकारक दशाओं से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। पोटैशियम नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की उपस्थिति में बीज के देरी या शीघ्रता से पकने के स्वभाव को सन्तुलित करता है।
    • यह वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि को रोकने में मदद करता है। पोटैशियम कोशिका विभाजन एवं निर्माण में सहायता करता है।
    • पोटेशियम के प्रभाव से धान्य एवं घास वाली फसलों के तने, भूसा एवं डण्ठल, प्रबल एवं कठोर बनते हैं, जिससे फसलों का गिरने का खतरा नहीं होता है।

  7. कैल्शियम (Calcium)
    • कैल्शियम पौधों के लिए अत्यन्त आवश्यक है।
    • यह पौधों को कोशिकाओं की दीवारों के निर्माण में आवश्यक है। कैल्शियम पौधों के मूलरोगों के विकास में सहायक है, जिससे पौधों की पोषण ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
    • कैल्शियम कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण में सहायक है तथा पौधों की मेटाबोलिज्म में स्वतन्त्र हुए कार्बनिक अम्लों को उदासीन करता है।
    • कैल्शियम फलीदार पौधों में पर्याप्त मात्रा में मिलती है और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता देते है।  पढ़ें- जीव विज्ञान प्रश्न और उत्तर।

  8. मैग्नीशियम (Magnisium)
    • मैग्नीशियम क्लोरोफिल का मुख्य अवयव है जिसके बिना कोई पौधा हरा नहीं रह सकता और पौधों के भाग पीलेपड़ जाते हैं।
    • मैग्नीशियम फॉस्फोरस को ग्रहण करने तथा इसके स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा वसीय अम्लों तथा तेलों के संश्लेषण में भी आवश्यक है।
    • मैग्नीशियम वायु से CO2 लेकर पत्तियों द्वारा शर्करा निर्माण में सहायक होता है।

  9. सल्फर (Sulphur)
    • सल्फर क्लोरोफिल के निर्माण में भी आवश्यक है।
    • यह प्रोटीन का एक मुख्य भाग होने के कारण अत्यंत आवश्यक है सल्फर (गन्धक) के ऑक्सीकरण से सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है।
    • इसके उपयोग से मृदा क्षारीयता दूर की जा सकती है।
    • सल्फर पौधों में सुगन्धित तेलों के निर्माण में सहायक है।
    • इसकी कमी से अनेकों रोग उत्पन्न हो जाते हैं सल्फर से एल्फा-एल्फा की जड़ों में ग्रंथियों का विकास अधिक होता है।

  10. आयरन (Iron)
    • यह भी क्लोरोफिल निर्माण में आवश्यक तत्व है, लेकिन फ्लोरोफिल का अंग नहीं है।
    • पादपों में होने वाले ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • आयरन पौधों द्वारा नाइट्रोजन के पोषण और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करता है।
    • कोशिका विभाजन में भी सहायक होता है।

  11. मैगजीन (Magnese)
    • मैगनीजकी मात्रा जलाक्रान्त व अम्लीय मृदाओं में उगने वाले पौधों में अपेक्षाकृत अधिक होती है।
    • मैगनीज पर्णहरिम निर्माण में सहायक होता है।
    • पौधों में नाइट्रोजन कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म तथा क्रेब चक्र की क्रियाओं में आवश्यक है।
    • यह ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • नाइट्रेट के स्वांगीकरण में सहायक होता है।                                                                                               जानें-  पर्यावरण से सम्बंधित महत्वपूर्ण दिवस लिस्ट।

  12. जिंक (Zinc)
    • जिंक क्लोरोफिल निर्माण में एकउत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • प्रोटीन, केरोटिन तथा सिट्रिक के संश्लेषण में सहायक होता है।
    • जिंक कार्बोहाइड्रेट के रूपान्तरण में आवश्यक होता है तथा मृदा में जलशोषण को बढ़ाता है।

  13. कॉपर (Copper)
    • यह अप्रत्यक्ष रूप से क्लोरोफिल निर्माण तथा आयरन के उपयोग में सहायक होता है।
    • इससे श्वसन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
    • यह क्लोरोफिल के विनाश को रोकता है।
    • कॉपर पौधों में एसीनो अम्ल के साथ मिलकर अनेक एमिनोयौगिक और प्रोटीन बनाता है।
    • प्रोटीन मेटाबोलिज्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • कॉपर पौधों में इन्डोल एसीटिक अम्ल के संश्लेषण में सहायक होता है।

  14. बोरोन (Boron)
    • बोरोन पराग (Pollan) एवं प्रजनन क्रियाओं में सहायक होता है।
    • बोरोन कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण एवं प्रोटीन तथा पानी के उपापचयन में सहायक है।
    • बोरोन कोशिका विभाजन व कॉर्टेक्स के विकास के लिए आवश्यक है।
    • बोरोन पोटेशियम व कैल्शियम अनुपात को नियन्त्रित करता है।
    • पौधों में पानी के शोषण को नियन्त्रित करता है।
    • बोरोन ATP, DNA, RNA एवं पेक्टिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
    • यह पौधों में फल,फूल व बीज बनने को भी प्रभावित करते हैं।

  15. मॉलिब्डेनम (Molybdenum)
    • मॉलिब्डेनम (Molybdenum) एजोटोबैक्टर एवंराइजोबियम बैक्टीरिया द्वारा मुक्त नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिए आवश्यक है।
    • यह इट्रेट रिडक्टेज एन्जाइम का महत्त्वपूर्ण भाग है।

  16. क्लोरीन (Cblorin)
    • क्लोरीनवर्णक रंगीन(एन्थोसायनिन) का संघटक पदार्थ होता है तथा यह रसाकर्षण दाब को बढ़ाता है। क्लोरीन (कोशिका रस) cell sup में धनायन सन्तुलन बनाए रखता है।

आज के इस पोस्ट में हमने पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य के बारे में जाना। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

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  1. रसायन विज्ञान बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर
  2. विटामिन 'A' की कमी से होने वाले रोग

रसायन विज्ञान 40+ MCQ प्रश्न | Chemistry MCQs in Hindi 2022

रसायन विज्ञान बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर (Chemistry Multiple Choice Question Answer)

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम रसायन विज्ञान के कुछ महत्वपूर्ण MCQ प्रश्नों के बारे में जानेंगे ,जो अक्सर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। दैनिक जीवन से जुड़े बहुत से कार्य रासायनिक तत्वों से जुड़े होते है, प्रत्येक वस्तु कणों से मिलकर बनी होती है, प्रत्येक कण में कुछ रासायनिक पदार्थ होते हैं।अर्थात जीवन में उपयोग की जाने वाली प्रत्येक वस्तु रसायन से जुडी हुई है, इसलिए हमें रसायन के इन सामान्य प्रश्नों से परिचित होना चाहिए। रसायन विज्ञान, विज्ञान की ही एक शाखा है इसका अध्ययन विज्ञान संकाय के विद्यार्थी करते हैं। इस आर्टिकल के माध्यम से आप कम समय में अधिक उपयोगी चीजों के बारे में जान पाएंगे।

Chemistry Multiple Choice Question Answer

सामान्य विज्ञान रसायन विज्ञान (Chemistry MCQ QUESTIONS) -

1. हाइड्रोजन बम विकसित किया गया था?

(a) एडवर्ड टेलर

(b) ब्रोन

(c) ओपेन्हीमर

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर :- (a) एडवर्ड टेलर


2. रेडियोधर्मी पदार्थ में किन दोरान कोई परिवर्तन नही होता?

(a) बीटा उत्सर्जन

(b) अल्फ़ा उत्सर्जन

(c) गामा उत्सर्जन

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (c) गामा उत्सर्जन



3. निम्नलिखित में से रेडियो तत्व में से किसका उपयोग मनुष्य के शरीर में रक्त प्रवाह की गति के मापन में किया जाता है?

(a) रेडियो फास्फोरस

(b) रेडियो आयोडीन

(c) रेडियो आयरन

(d) रेडियो सोडियम

उत्तर:- (d) रेडियो सोडियम

पढ़े- जीव विज्ञान सामान्य ज्ञान।

4. किसी तत्व के सम्स्थानिको के बीच अंतर किनकी भिन्न संख्या की उपस्थिति के कारण होता है? (a) प्रोटॉन

(b) न्युट्रोन

(c)इलेक्ट्रान

(d) फोटोन

उत्तर:- (b) न्युट्रोन


5. हाइड्रोजन के समस्थानिको की संख्या कितनी है?

(a) 2

(b) 3

(c) 4

(d) 7

उत्तर:- (b) 3


6. निम्नांकित में से कोन हाइड्रोजन का आइसोटोप नही है?

(a) प्रोटीयम

(b) डयूटीरियम

(c) ट्रिटियम

(d) ट्रेंसियम

उत्तर:- (d) ट्रेंसियम


7. हाइड्रोजन के रेडियो सक्रिय समस्थानिक को कहते है? (a) डयूटरियम

(b)प्रोट्रियम

(c) रेडियम

(d) ट्राईटियम

उत्तर:- (d)ट्राईटियम


8. सर्वाधिक संख्या में समस्थानिक किसके होते है?

(a) युरेनियम

(b) हाइड्रोजन

(c) पोलोनियम

(d) लेड

उत्तर (c) पोलोनियम

जानें- कोशिका और कोशिकांग की सरंचना।

9. पोलोनियम के समस्थानिको की संख्या है?

(a) 15

(b) 17

(c) 32

(d) 27

उत्तर:- (d) 27


10. चट्टानो की आयु ज्ञात करने के लिए रेडियोएक्टिव आयु अंकन में किस समस्थानिक का उपयोग किया जाता है?

(a) युरेनियम

(b) प्लूटोनियम

(c) थोरियम

(d) कार्बन

उत्तर:- (a) यूरेनियम


11. परिसंचरण तंत्र में रक्त के थक्के की स्थिति का पता लगाने के लिए किस समस्थानिक का प्रयोग किया जाता है?

(a) Na-24

(b) Co-60

(c) As-74

(d) 1-131

उत्तर:- (a) Na-24


12. कोबाल्ट -60 आमतोर पर विकिरण चिकित्सा यथा केसर जेसे रोगों में प्रयुक्त होता है क्योकि यह उत्सर्जित करता है?

(a) बीटा किरणे

(b) गामा किरणे

(c) अल्फ़ा किरणे

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) गामा किरणे


13. रक्त कैंसर को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किये जाने वाला आइसोटोप कोनसा

(a) फास्फोरस - 32

(b) कोबाल्ट -60

(c) आयोडीन 131

(d) ये सभी

उत्तर:- (b) कोबाल्ट-60


14. वेसे नाभिक जिनमे न्युट्रानों की संख्या समान परन्तु प्रोटोनो की संख्या भिन्न हो कहलाते है?

(a) समइलेक्ट्रानिक

(b) सम्भारिक्क

(c) समस्थानिक

(d) समन्यूट्रोनिक

उत्तर:- (d) ) समन्यूट्रोनिक


15. आइसोटोन होते है?

(a) समान संख्या में प्रोटॉन

(b) समान संख्या में न्युट्रोन

(c) समान संख्या में न्युक्लियॉन

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) समान संख्या में न्युट्रोन


पढ़ें- 100+रासायनिक तत्वों के नाम और सूत्र।

16. वे आयन जिनमे इलेक्ट्रानो की संख्या होती है कहलाते है?

(a) समस्थानिक

(b) समभारिक

(c) समन्यूट्रोनिक

(d) समइलेक्ट्रानिक

उत्तर:- (d) समइलेक्ट्रानिक



17. निम्नलिखित में से किसके उत्सर्जन में सम्भारिक उत्पन्न होते है?

(a) अल्फ़ा किरण

(b) बीटा किरण

(c) गामा किरण

(d)इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) बीटा किरण



18. ट्राईटियम में प्रोटॉन और न्युट्रोन की संख्या क्रमस क्या है?

(a) 1p और 1n

(b) 1p और 2n

(c) 1p और 3n

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) 1p और 2n


19. धनायन तत्व बनता है जब?

(a) परमाणु इलेक्ट्रान ग्रहण करता है

(b) परमाणु इलेक्ट्रान खोता है

(c) परमाणु पर बहार से धनावेश आता है

(d) परमाणु से प्रोटॉन बाहर निकल जाता है

उत्तर:- (b) परमाणु इलेक्ट्रान खोता है



20. ऋणायन जब बनता है जब ?

(a) परमाणु इलेक्ट्रान ग्रहण करता है

(b) परमाणु इलेक्ट्रान खोता है

(c) अ व् ब दोनों

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (a) परमाणु इलेक्ट्रान ग्रहण करता है



21. आयनों से बने योगिक का सामान्य नाम है?

(a) वेधुत संयोजक

(b) सह संयोजक

(c) उप सह्योजक

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (a) वेधुत संयोजक



22. एक आयनिक बधन बनता है जब?

(a) संयोग करने वाले परमाणु इलेक्ट्रान का प्राप्त होते है

(b) संयोग करने वाले परमाणु इलेक्ट्रान का त्याग करते है

(c) एक धातु तत्व का संयोग अधातु तत्व से होता है

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (c) एक धातु तत्व का संयोग अधातु तत्व से होता है



23. विधुत संयोजक बंध बनता है?

(a) धनविष्ट आयनों के बीच

(b) ऋणाविष्ट आयनों के बीच

(c) विपरीत आविष्ट आयनों के बीच

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (c) विपरीत आविष्ट आयनों के बीच



24. निम्नलिखित योगिको में से किसमे आयनिक बंध नहीं है?

(a) पोटेशियम नाइट्रेट

(b) सोडियम क्लोराइड

(c) केल्शियम क्लोराइड

(d) मीथेन

उत्तर:- (d) मीथेन



25. सहसंयोजी आबंध किसके कारण बनता है?

(a) इलेक्ट्रानो के पूर्ण अंतरण

(b) इलेक्ट्रानो के आंशिक अंतरण

(c) इलेक्ट्रोनो के अंश भाजन

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर c) इलेक्ट्रोनो के अंश भाजन

जानें- धातु और उनके यौगिक।

26. जब एक ही तत्व के दो परमाणु परस्पर संयोग करते है तो उनके बीच बंधन की प्रकृति होगी?

(a) आयनिक

(b) सहसंयोजक

(c) धुर्वीय सहसंयोजक

(d) अधुर्वीय सहसंयोजक

उत्तर:- (d) अधुर्वीय सहसंयोजक



27. मीथेन अणु की आकृति होती है?

(a) द्वि-संयोजक बंधन

(b) एकल सहसंयोजक

(c) त्रिसंयोजक बंधन

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:-(b) एकल सहसंयोजक



28. इथिलिन अणु की आकृति होती है?

(a) एकरेखीय

(b) चतुष्फलकिय

(c) समतल त्रिकोणीय

(d) अष्टफल्किय

उत्तर:- (c) समतल त्रिकोणीय



29. निम्नलिखित में से किस यौगिक की आकृति चतुष्फल्कीय होती है?

(a) अमोनिया

(b) कार्बन ट्रेटाक्लोराइड

(c) जल

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) कार्बन ट्रेटाक्लोराइड



30. सहसंयोजक योगिको के द्व्णाक तथा कव्थनांक निम्न होते है क्योकि?

(a) ये कम क्रियाशील होते है

(b) जल में इनका आयनन नही होता है

(c) ये प्राय जल में अविलेय होते है

(d) इनमे अंतरआणविक बल कमजोर होता है

उत्तर:- (d)इनमे अंतरआणविक बल कमजोर होता है



31. सोडियम क्लोराइड में होता है?

(a) सहसंयोजक बंधन

(b) उप-सहसंयोजक बंधन

(c) विद्युत संयोजक बल

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (c)विद्युतसंयोजक बल



32. जब एक रासायनिक बंध बनता है तब क्या होता है?

(a) ऊर्जा हमेशा अवशोषित होती है

(b) ऊर्जा हमेशा निर्मुक्त होती है

(c) ऊर्जा जितनी अवशोषित होती है उससे अधिक निर्मुक्त होती है

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (b) ऊर्जा हमेशा निर्मुक्त होती है



33. कार्बन ट्रेटाक्लोराइड अणु की आकृति है?

(a) पिरामीडिय

b) वर्षाकार

(c) चतुष्फलकीय

(d) इनमे से कोई नही

उत्तर:- (c) चतुष्फलकीय



34. निम्न में से किस योगिक में हाइड्रोजन आबंध विद्यमान है?

(a) HF

(b) HCI

(c) HBr

(d) HI

उत्तर:- (a) HF



35. हाइड्रोजन क्लोराइड एक गेस है परन्तु हाइड्रोजन फलुराइड एक निम्न कव्थनांक वाला द्रव्य है क्योकि?

(a) HF बंध प्रबल है

(b) H-F बंध दुर्बल है

(c) अ व् ब दोनों

(d) हाइड्रोजन आबंध के कारण अण संगणित हो जाते है

उत्तर d) हाइड्रोजन आबंध के कारण अण संगणित हो जाते है



36. जल के अधिक कव्थनांक का कारण है ?

(a) जल के अणुओ में हाइड्रोजन आबंध

(b) इसका अधिक हाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक

(c) हाइड्रोजन फ्लूओराइड

(d) इसकी अधिक विशिष्ट ऊष्मा

उत्तर:- (a) जल के अणुओ में हाइड्रोजन आबंध



37. द्रवित सोडियम क्लोराइड विधुत धारा का प्रवाह कर सकता है क्योकि इसमे उपस्थित होता है? (a) मुक्त आयन

(b) मुक्त इलेक्ट्रोन

(c) मुक्त अणु

(d) इनमें से कोई नही

उत्तर:- (a) मुक्त आयन



38. निम्न में से सहसंयोजी कोनसा एक योगिक है?

(a) केल्सियम क्लोराइड

(b) मेंग्निशियम फलुराइड

(c) सोडियम क्लोराइड

(d) कार्बन ट्रेटाक्लोराइड

उत्तर:- (d)कार्बन ट्रेटाक्लोराइड


आज के इस आर्टिकल में हमने रसायन विज्ञान के महत्वपूर्ण  MCQ प्रश्न और उत्तर के बारे में जाना। ये प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जा चुके हैं। इसलिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह है।

उम्मीद करता हूँ कि रसायन विज्ञान MCQ प्रश्न की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर जरुर करें।

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विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग [2022] (Vitamin A deficiency diseases in Hindi)

विटामिन 'ए' की कमी से होने वाले रोग |  Vitamin A ki Kami Se Hone Wale Rog

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हम विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग के बारे में जानेंगे।  विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग के बारे में जानने के साथ-साथ आपको इस पोस्ट में विटामिन-A के कमी से होने वाले रोग के लक्षण,  विटामिन-A की महत्वपूर्ण बातो के बारे में भी बताने वाले है। कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इसलिए हमें अपने स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिन के बारे में जरुर जानना चाहिए। इस आर्टिकल में विटामिन ‘ए’(A) के बारे में ऐसी ही कुछ जानकारी दी गयी है।

Vitamin A deficiency diseases in Hindi

विटामिन- ए (Vitamin- A):

शरीर को स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए विटामिनो के महत्वपूर्ण योगदान से इंकार नही किया जा सकता है। शरीर के समुचित पोषण के लिए विटामिन अति आवश्यक सहायक तत्व हैं। आधुनिककाल में विटामिनो की खोज के बाद इनका प्रचलन तेजी से जोर पकड़ चूका हैं। सभी विटामिन जो अबतक चिकित्सा वैज्ञानिको ने खोज निकाले हैं एक दुसरे पर निर्भर है। यह हमारे भोजन में काफी मात्र में होकर भी हमारे शरीर को नई जीवन शक्ति देते हैं। इनकी कमी से शरीर रोगग्रस्त हो जाता हैं। जब विटामिनो को किसी कारणवश शरीर में पूर्ति हो पाना संभव नही होता। तब यह कमी मृत्यु का कारण बन जाती है। आगे हम सभी विटामिन-A का वर्णन कर रहे हैं। 

शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी से निम्नलिखित रोग उत्पन्न हो जाते हैं जो समुचित विटामिन ‘ए’ की चिकित्सा करने पर दूर हो जाते हैं।

विटामिन- A से सम्बंधित सवाल -

  1. विटामिन 'A' की कमी से होने वाले रोग?
  2. विटामिन ए की कमी से होने वाले रोग का नाम?
  3. विटामिन A की कमी से क्या होता है?
  4. विटामिन ए की कमी के लक्षण?
  5. विटामिन A की कमी से कौन सा रोग होता है?
विटामिन- ए से सम्बंधित इन सवालों के जवाब आपको निचे विस्तार से दिया गया है-

विटामिन-ए की कमी के लक्षण (Symptoms of Vitamin A Deficiency) :-

  • भूख की कमी, 
  • आंतो में गैस के विकार, 
  • गैस बनना
  • मूत्राशय की पथरी, 
  • दिल की कमजोरी, 
  • निमोनिया, 
  • सर्दी,खांसी, जुकाम, ज्वर, 
  • नजला,ब्रोंकाईटिस,
  • सुखी खांसी, 
  • त्वचा रोग, चर्म का सुख जाना, चर्म प्रदाह, चर्म शोथ, चर्म की सुजन, चर्म मोटी हो जाना, 
  • घाव, फोड़े, फुन्सिया, 
  • कारबंकल जैसे खतरनाक जहरीले घाव 
  • कील-मुहांसे झाइयाँ, चेहरे के दाग- धब्बे, 
  • बाल उड़ना, सर गंजा होना, बालो का रुखापन,
  • नाड़ी दुर्बलता, नाड़ी संस्थान की कमजोरी- हीनता,
  • स्तनों में दूध कम हो जाना, 
  • मासिक धर्म पूर्व के सभी विकार. 
  • बुढ़ापे में योनि शोथ, योनि प्रदाह, योनि की सुजन हो जाना, 
  • बच्चों  की दुर्बलता, 
  • रतौंधी. नेत्र विकार, नेत्र राग धुंधला दिखाई देना,अंधत्व, 
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का आभाव हो जाना, 
  • झागदार दस्त होना, 
  • देर से दांत निकलना, 
  • शरीर का वजन गिर जाना, 
  • अपचन संक्रमण, 
  • जीवनी शक्ति का अभाव हो जाना, 
  • बहरापन, 
  • पेंघा या गिल्हड, 
  • जननांगो के रोग एवं विकार आदि। 

विटामिन ‘ए’ (A) के जानने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य :-

  • यह हमारे शरीर को नई जीवन शक्ति देते हैं।
  • विटामिन ‘ए’ शरीर  को रोग प्रतिरोधक क्षमता देता हैं। 
  • नन्हे बच्चो को विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 
  • गर्भावस्था में विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 
  • संक्रामक रोगों से शरीर जब घिर गया हो तब विटामिन ‘ए’ की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग (Vitamin- A deficiency diseases) :-

  • विटामिन ‘ए’ की कमी से बहरापन  होता है। 
  • सर्दी खांसी, जुकाम, नजला विटामिन ‘A’ की कमी से होता है। 
  • फेफड़ो में संक्रमण विटामिन ‘ए’ की कमी से होता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से रोगों तेज प्रकाश सहन नही कर पता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से कील-मुंहासे आदि कई चर्म रोग हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से नेत्रों में आंसू सुख जाते है। 
  • विटामिन ‘ए’ का अविष्कार १९३१ में हुआ था। 
  • विटामिन ’A’ जल में घुल जाता है। 
  • विटामिन ’ए’ तेल और वसा में घुल जाता है। 
  • विटामिन ’A’ की कमी से नाख़ून आसनी से टूटने लगते है। 
  • विटामिन’ए’ की कमी से रतौंधी हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से अनेक नेत्र रोग स घेरते है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से रोगी अँधा हो जाता है। 
  • विटामिन’A’ की कमी से दांत कमजोर हो जाता है।  दांतों का एनामेल बनने में रूकावट हो जाती है।   
  • दांतों में गड्ढे विटामिन ‘ए’ की कमी से होते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से पुरुष के जननांगो पर प्रभाव डालता है। 
  • साइनस नथुने नक् कण और फले शिराओ पतली रक्त वाहिनियों माथे की रक्त वाहिनियों के संक्रमण विटामिन ‘ए’ कि पूर्ति करने से दूर हो  जाते है।
  • स्कारलेट फीवर विटामिन ‘ए’ देने से ठीक हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’  की कमी से बच्चो की बढ़त थम जाती है। 
  • बच्चो को एक हजार से लेकर तीन हजार यूनिट आई, प्रतिदिन विटामिन ‘इ’ की आवश्यकता होती है। 
  • विटामिन’ए’ की कमी दिमाग की 8वीं नाड़ी पर बुरा प्रभाव डालती है। 
  • विटामिन ‘A’ के प्रयोग से वृक्को की पथरी का  डर नहीं रहता। पथरी रेत के कण जैसी बनकर मूत्र से निकल जाती हैं। 
  • गिल्हड़ विटामिन ‘ए’ की कमी से होता हैं।
  • दिल धड़कने वाले रोगी को विटामिन ‘ए’  के साथ विटामिन ‘बी’ भी देना चाहिए। 
  • विटामिन ‘A’  कमी से स्त्री के जननांगो पर घटक प्रभाव पड़ता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से स्त्री का डिम्बाशय सिकुड़ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से पुरुष का अंडाशय सिकुड़ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ और ‘ई’ शरीर में घट जाने पर स्त्री और पुरषों की सम्भोग इच्छा नहीं रहती तथा संतान उत्पन्न करने की क्षमता भी समाप्त हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ और ‘ई’ की कमी से पिट्यूटरी ग्लैंड की सक्रियता में बाधा हो जाती है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से अनेक चर्म रोग हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से बुढ़ापा जल्दी आ जाता है। 
  • विटामिन ‘ए’ से धमनियां और शिराएँ मुलायम रहती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से बल झड़ने लगते है। 
  • विटामिन ‘ए’ हरी सब्जियों में अधिक होता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से हमारे देश में लाखों लोग अपनी आँखों की रोशनी खो चुके हैं। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से आँखों की चमक निस्तेज हो जाती है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से नेत्रों में झुर्रियां पड़ जाती है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से जीभ पीली पड़ जाती है। 
  • मछली के तेल में विटामिन ‘A’ सबसे अधिक होता है। 
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से सर के बल खुरदुरे हो जाते है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से भूख घट जाती है।
  • विटामिन ‘ए’ की कमी से वजन घट जाता है। 
  • विटामिन ‘A’ की कमी से त्वचा खुरदुरी मोती और कांतिहीन हो जाती है, चेहरा निस्तेज हो जाता है।

आज के इस आर्टिकल में हमने विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग के बारे में जाना स्वस्थ शरीर के लिए  हमे इन बातों की जानकारी होना आवश्यक है।

आशा करता हूँ कि विटामिन ‘ए’(A) की कमी से होने वाले रोग की यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी ,यदि आपको पोस्ट पसंद आये तो पोस्ट को शेयर अवश्य करें। 

100+ जीवविज्ञान सामान्य ज्ञान | Biology GK Questions in Hindi 2023

जीवविज्ञान जीके प्रश्न हिंदी में (Biology GK Questions in Hindi)

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम जीवविज्ञान सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नो के बारे में जानने वाले हैं।   जीव विज्ञान से संबन्धित सामान्य ज्ञान के प्रश्न  जीवविज्ञान की पढाई हम स्कूल के समय से शुरु कर देते हैं. जिसमे हमें सामान्य विज्ञान और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले विज्ञान के बारे में पढ़ाया जाता हैं. इनमें से ही एक होता हैं जीवविज्ञान. इस पोस्ट में आप पढ़ने वाले हैं। जो एक लाइन में होंगे जिसे आप आसानी से याद कर पाएंगे।

Biology GK Questions

Biology Gk in Hindi - सामान्य ज्ञान

  • मनुष्य में नर का गुणसूत्र सम्मिश्रण होता है – XY

  • मनुष्य में पाचन क्रिया कहाँ प्रारंभ होती है – मुख

  • मनुष्य में मेरूदण्‍ड से कितनी जोड़ी तंत्रिका निकलती है – 31

  • मनुष्य में सामान्य रुधिर शर्करा स्तर प्रति 100 ml रुधिर होती है – 80-100 mg

  • मरूद्भिद पौधा है – करील

  • मलेरिया का संक्रामक चरण है – बीजाणुज (स्‍पोरोजोआइट)

  • मशरूम क्या है – कवक

  • माता-पिता के गुण उनकी संतानों में किसके द्वारा स्‍थानान्‍तिरत होते हैं – गुणसूत्र द्वारा

  • मानव का मस्तिष्क लगभग कितने ग्राम का होता है -1350

  • मानव के आमाशय में अम्ल X उत्पन्न होता है, जो भोजन के पाचन में सहायता करता है। ‘X’ है – हाइड्रोक्‍लोरिक अम्ल

  • मानव के श्वेत रक्त कणों (WBC) का व्यास होता है, लगभग – 007 mm

  • मानव त्वचा को रंग देने वाला वर्णक है – मेलानिन

  • मानव में शीर के किस भाग में शुक्राणु डिम्‍ब को निषेचित (Fertilize) करता है – डिम्‍बवाहिनी (Fallopian) नली

  • मानव रक्त प्‍लाज्‍मा में प्रायः पानी की प्रतिशत मात्रा में कितनी भिन्नता होती है – 80-80%

  • मानव रुधिर का pH है – 7.4

  • मानव रुधिर में कोलेस्‍ट्रॉल का सामान्य स्तर है – 140-180 mg

  • मानव शरीर का सबसे बड़ा अंग कौन है – फेफड़ा

  • मानव शरीर का सामान्य तापमान होता है – 90 C

  • मानव शरीर की किन कोशिकाओं में सबसे कम पुनर्योजन शक्ति होती है – मस्तिष्क कोशिकाएं

  • मानव शरीर की किस ग्रन्थि को ‘मास्‍टर ग्रन्थि’ कहा जाता है – पीयूष

  • मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी है – स्‍टेपिस

  • मानव शरीर की सबसे लम्बी हड्डी है – फीमर

  • मानव शरीर के किस अंग की हड्डी सबसे लम्बी होती है – जाँघ

  • मानव शरीर के किस अंग में लसीका कोशिकाएँ बनती है – दीर्घ अस्थि

  • मानव शरीर के भीतर खून किसकी उपस्थिति के कारण नहीं जमता है – हिपेरिन

  • मानव शरीर में औसतन ऑक्‍सीजन का तत्व कितना प्रतिशत होता है – 50%

  • मानव शरीर में कार्बोहाइड्रेट पुन: संग्रह होता है – ग्‍लाइकोजेन

  • मानव शरीर में कौन ग्रन्थि ऐसी है, जिसका सम्बन्ध शरीर की उत्तेजना से है – अधिवृक्‍क ग्रंथि

  • मानव शरीर में खून के शुद्धिकरण की प्रक्रिया को कहते हैं – डायलिसिस

  • मानव शरीर में पाचन का अधिकांश भाग किस अंग में सम्‍पन्‍न होता है – छोटी आँत

  • मानव शरीर में पुच्‍छ, कौन-सी संरचना में संलग्‍न होता है – वृहदान्‍त्र

  • मानव शरीर में पैरो की हड्डियाँ हैं – फिबुला एवं टिबिया

  • मानव शरीर में रक्त का थक्का किस विटामिन से बनता है – विटामिन K

  • मानव शरीर में रक्त की अपर्याप्‍त आपूर्ति को कहते हैं – इस्‍कीमिया

  • मानव शरीर में रक्तचाप नियंत्रित होता है – अधिवृक्‍क ग्रंथि से

  • मानव शरीर में लाल रक्त कण का निर्माण कहाँ होता है – अस्थि मज्‍जा

  • मानव शरीर में वसा जमा होती है – वसा ऊतक में

  • मानव शरीर में विटामिन A संचित रहता है – यकृत में

  • मानव शरीर में संक्रमण को रोकने में मदद करने वाला विटामिन है – विटामिन A

  • मानव शरीर में सबसे छोटी अन्‍त:स्‍त्रावी ग्रंथि कौन-सी है – अवदु ग्रंथि

  • मानव शरीर में सबसे लम्बी अस्थि है – उरु अस्थि

  • मानव शरीर में हृदय का कार्य है – पम्पिंग स्‍टेशन की तरह

  • मानव शरीर में हॉर्मोनों में से कौन-सा रक्‍त कैल्सियम और फॉस्‍फेट को विनियमित करता है – परावटु (Parathyroid) हॉर्मोन

  • मानव शरीर रचना के सन्‍दर्भ में एण्‍टीबॉडीज होते हैं – प्रोटीन्‍स

  • मानव हृदय में कक्ष की संख्या है – चार

  • मानव हृदय है- मायोजेनिक हार्ट

Biology GK Questions in Hindi

  • मायोग्‍लोबिन में कौन-सी धातु होती है – ताँबा

  • मिनीमाता रोग का कारण है – पारा

  • मुख्यतः इसकी उपस्थिति के कारण मानव शरीर उच्च वायुमण्‍डलीय दाब के अन्‍तर्गत भी बिना कुचला रहता है – कोशिकाओं में तरल

  • मूत्र का पीला रंग किसकी मौजूदगी के कारण होता है – यूरोक्रोम

  • मूत्र के स्रवण (secretion) को बढ़ाने वाली औषधि को कहते हैं – डाइयूरेटिक

  • मृदा अपरदन रोका जा सकता है – वनरोपण द्वारा

  • मैंग्रोव वनों पर वैश्विक तापन का क्या प्रभाव होगा – मैंग्रोव के विशाल क्षेत्र जल मग्‍न हो जायेंगे

  • मैमथ पूर्वज हैं – हाथी का।

  • यदि एक जीवाणु कोशिका प्रति 20 मिनटों में विभाजित होती है, तो दो घण्टे में कितने जीवाणु बनेंगे – 64

  • यदि एक पिता का रक्त वर्ग A है और माता का रक्त वर्ग O हो तो बताइए कि उनके पुत्र का कौन-सा वर्ग हो सकता है – O

  • यदि किसी पुरुष का रक्त वर्ग AB हो तथा महिला का रक्त वर्ग B हो तो उनकी सन्तानों में कौन-सा रक्त वर्ग उपस्थित नहीं हो सकता है – O

  • यदि किसी व्यक्ति की रुधिर वाहिकाओं की त्रिज्‍या कम हो जाए, जो उसका रक्त दाब – बढ़ेगा।

  • यदि माता-पिता में से एक का रुधिर वर्ग AB है और दूसरे का O, तो उनके बच्चे का संभावित रुधिर वर्ग होगा – A या B

  • यदि विश्व के सभी पादप मर जाते हैं, तो सभी पशु भी इनकी कमी के कारण मर जायेंगे – ऑक्‍सीजन

  • रक्त का थक्का बनाने में इनमें से कौन-सा अवयव मदद करता है – विटामिन K

  • रक्त का शुद्धिकरण कहाँ होता है – किडनी

  • रक्त ग्‍लूकोज स्तर सामान्यतः व्यक्त किया जाता है – भाग प्रति मिलियन में

  • रक्त जमने में किस तत्व की मुख्‍य भूमिका होती है – Ca

  • रक्त में पायी जाने वाली धातु है – लोहा

  • रक्त में प्रति स्‍कंदक पदार्थ कौन-सा है – हेपेरिन

  • रक्त में लाल रंग किसके कारण होता है – हीमोग्‍लोबिन

  • रक्त स्‍कन्‍दन में कौन-सा विटामिन क्रियाशील होता है – विटामिन K

  • राष्ट्रीय पोषण संस्थान एक अनुसंधान है जो किस राज्य में स्थित है – आन्‍ध्र प्रदेश

  • राष्ट्रीय वानस्पतिक उद्यान कहाँ पर स्थित है – लखनऊ

  • रुधिर के प्‍लाज्‍मा में किसके द्वारा एन्‍टीबॉडी निर्मित होती है – लिम्‍फोसाइट

  • रेगिस्तान में पैदा होने वाले पौधे कहलाते हैं – जीरोफाइट्स

  • रेड डाटा बुक उन जातियों के बारे में जानकारी देती है, जो – संकटापन्न हैं

  • लम्बे समय तक कठोर शारीरिक कार्य के पश्चात मांसपेशियों में थकान अनुभव होने का कारण होता है – ग्‍लूकोज का अवक्षय

  • लाइकेन जिन दो वर्ग के पौधों से मिलकर बनता हैं, वे हैं – कवक और शैवाल

  • लाइसोसोम में पाया जाने वाला वह एन्‍जाइम जिनमें जीवद्रव्‍य को घुला देने या नष्ट कर देने की क्षमता होती है, कहलाता है – हाइड्रोलाइटिक एन्‍जाइम

  • लार किसके पाचन में सहायक होती है – स्‍टार्च

  • लार में कौन सा एन्‍जाइम पाया जाता है – टायलिन

  • लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) कहाँ उत्पन्न होते हैं – अस्थि मज्‍जा

  • लाल रक्त कोशिकाओं के बिना पशु-केंचुआ

  • लाल रुधिर कणिकाओं का उत्पादन किसके द्वारा होता है – अस्थि मज्‍जा

  • लिटमस प्राप्‍त होता है – एक लाइकेन से

  • लिटमस-अम्‍ल-क्षार सूचक प्राप्त होता है – लाइकेन से

  • वनस्‍पतिविज्ञान (Botany) के जनक हैं – थियोफ्रेस्‍टस

  • वर्णान्‍धता वाले व्यक्ति को लाल रंग दिखायी देगा – हरा

  • वसा में घुलनशील विटामिन होते हैं – कैल्सिफेरॉल, केरोटिन, टोकोफेरॉल

  • वह अंग कौन-सा है जो मानव शरीर में ग्‍लाइकोजन के रूप में कार्बोहाइड्रेट को जमा करता है – यकृत

  • वह एकमात्र पक्षी जो पीछे की ओर उड़ता है – गुंजन पक्षी

  • वह वर्णक जो वनस्पति को बैंगनी किरणों के दुष्‍प्रभाव से बचाता है, कौन-सा है –फाइकोसायनिन

  • वह विज्ञान जिसका सम्बन्ध जीवधारियों के अध्ययन से होता है, कहलाता है – जीवविज्ञान

  • वह स्तनधारी जो खतरे के संकेत के समय गेंद के समान हो जाता है – कंटक चूहा

  • वाँस को किसमें वर्गीकृत किया जाता है – घास

  • विटामिन A की कमी के कारण होता है – नाइट ब्‍लाइंडनेस

  • विटामिन B2 का अन्य नाम है – राइबोफ्लेविन

  • विटामिन B6 की कमी से पुरुष में हो जाता है – अरक्‍तता

  • विटामिन C का रासायनिक नाम है – एस्‍कॉर्बिक अम्‍ल

  • विटामिन C सबसे उत्तम स्रोत है – आँवला

  • विटामिन D के सर्जन में क्या पाया जाता है – कैल्सिफेरॉल

  • विटामिन E का रासायनिक नाम है – टोकोफेरॉल

  • विटामिन E विशेषतः किसके लिए महत्‍वपूर्ण है – लिंग ग्रन्थियों की सामान्‍य क्रिया में

  • प्रोटीन को माना जाता है – शरीर का निर्माण करने वाला

  • फलीदार पादपों की जड़ों में उपस्थित गाँठों में पाए जाने वाले नेत्रजन स्थिरीकरण जीवाणु हैं – सहजीवी

  • फाइकोलॉजी (Phycology) में किसका अध्ययन किया जाता है – शैवाल (Algae) का

  • फीरोमोन्‍स पाए जाते हैं – कीटों में

  • फूलगोभी में पौधे का उपयोगी भाग कौन-सा है – ताजा पुष्‍प समूह

  • बच्चों के लिंग निर्धारण के लिए उत्‍तरदायी क्रोमोसोम होता है – पिता का

  • बच्‍चों में अंगों की अस्थियाँ मुड़ जाती हैं, यदि कमी है – विटामिन D की

  • बायाँ महाधमनी चाप इनमें दिखायी देता है – स्‍तनपायी

  • बी.सी.जी. प्रतिरक्षण होता है – टी.बी. के लिए

  • बेरियम मील का उपयोग किया जाता है – आहार नली की एक्‍स-रे के लिए

  • बैक्‍टीरिया में पाया जाने वाला प्रकाश-संश्‍लेषी आशय कहलाता है – वर्णकीलवक

  • भारत में पारिस्थितिक असन्‍तुलन कौन एक प्रमुख कारण है – वनोन्‍मूलन

  • भारत में मैन्‍ग्रोव की खेती के लिए कौन-सा क्षेत्र प्रसिद्ध है – दक्षिणी 24 परगना का सजनेखाली जंगल

  • भारत में वन अनुसंधान संस्‍थान कहाँ स्थित है – देहरादून

  • भारत में सबसे बड़ी मछली है – व्‍हेल शार्क

  • भारी मात्रा में ऐल्‍कोहॉल पीने वाले लोग मरते हैं – सिरोसिस से

  • भ्रूण के विकास के लिए किस अंग के द्वारा खाद्य की पूर्ति की जाती है – बीजाण्‍डसन

  • मच्‍छरों के नियन्त्रण हेतु प्रयोग होने वाली कीटभक्षी मछली है – गेम्‍बूसिया

  • मछलियों के यकृत के तेल में किसकी प्रचुरता होती है – विटामिन D

  • मधुमक्खी में पुंमधुप (Dron) होते हैं – जननक्षम नर

  • मधुसूदनी (Insulin) अन्‍त:स्‍त्राव एक – ग्‍लाइकोलिपिड है।

  • मनुष्‍य किसके द्वारा जीवमण्‍डल में पारिस्थितिक सन्‍तुलन बनाये रख सकता है – सम्‍बन्धित पौधों की नई किस्‍में और पालतू पशु की नई नस्ल विकसित करना

  • मनुष्‍य की खोपड़ी में कितनी अस्थियाँ होती हैं – 8

  • मनुष्य की लाल रक्‍त कोशिकाओं का जीवनकाल कितना होता है – 120 दिन

आज के इस आर्टिकल में हमने जीवविज्ञान सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नों को जाना ,जो प्रतियोगी परीक्षाओं की नजर से जरुरी है। जीव विज्ञान साइंस की एक महत्वपूर्ण शाखा है। जिससे साइंस की परीक्षाओं में इनसे सवाल पूछा जाना स्वभाविक है।

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