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पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य | Names and functions of nutrients plants

पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्य (Names and functions of nutrients essential for plants)

हम इस पोस्ट में पौधों में आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) एवं उनके कार्य की सूचि या लिस्ट दे रहें हैं। क्योंकि पौधों के सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) हेतु कुल 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिसके बारे में परीक्षा की दृष्टी से आपको जरुर जानना चाहिए।

Names and functions of nutrients essential for plants

पौधों के प्राथमिक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम हैं। परन्तु केवल तीन पोषक तत्वों की सहायता से पौधों का सामान्य विकास (Development) एवं वृद्धि (Growth) नहीं हो सकता है। निचे आपको पौधों के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्वों के नाम और उनके कार्यों के बारे में दिया गया है-

Names and functions of nutrients essential for plants in Hindi

  1. कार्बन (Carbon)
    • पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) लेते हैं।
    • प्रकाश को उपस्थिति में CO2 क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण में भाग लेती है।
    • इसके अलावा पौधों के अधिकांश भाग में कार्बन पाया जाता है।

  2. ऑक्सीजन (Oxygen)
    • ऑक्सीजन पौधों को जल वायु से मिलती है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में CO2 से मिलकर ऑक्सीजन (O2) निकालता है तथा शर्कराओं का निर्माण करता है।

  3. हाइड्रोजन (Hydrogen)
    • हाइड्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए जल से प्राप्त होती है।
    • हाइड्रोजन आक्सीजन से मिलकर पानी बनाती है तथा कार्बन के साथ मिलकर जटिल रासायनिक यौगिक बनाती है।

  4. नाइट्रोजन (Nitrogen)
    • नाइट्रोजन पौधों के पर्णहरित न्यूक्लियक अम्ल, विटामिन्स, प्रोटीन, एमाइड्सएल्केलाइड्स तथा प्रोटोप्लाज्म की संरचना में भाग लेती है।
    • पौधों में नाइट्रोजन नियन्त्रक का कार्य करती है।
    • नाइट्रोजन, एडीनोसीन, ट्राइफॉस्फेट (ATP) का एक अवयव है। नाइट्रोजन, पर्णहरित का एक मुख्य अवयव होता है, इससे पत्तियों का रंग गहरा हरा होता है।
    • पौधे मृदा से नाइट्रेट को अपनी जड़ों द्वारा अमोनियम आयन्स (NH4 +) व नाइट्रेट आयन्स (NO3-) के रूप में ग्रहण करते हैं।

  5. फॉस्फोरस (Phosphorus)
    • फॉस्फोरस न्यूक्लियो प्रोटीन,न्यूक्लियक अम्ल, फॉयटिन तथा फास्फोलिपिड्स का मुख्य अवयव फॉस्फोरस से फलीदार फसलों की जड़ों में स्थित ग्रंथियों की संख्या तथा आकार में वृद्धि होती है, जिससे वायुमण्डलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायता भी लेती है।
    • फॉस्फोरस से फल एवं बीज जल्दी बनता है जिससे पौधों एवं फलों में पूर्ण वृद्धि कम समय में हो जाती है अर्थात् फसल शीघ्र पक जाती है।
    • फॉस्फेट की उपस्थिति में पराग सेंचन (Pollination) अच्छा होता है, जो फसल की मात्रा एवं गुणों को प्रभावित करता है। यह नाइट्रोजन के प्रभाव को कम या उदासीन करती है।

  6. पोटैशियम (Potassium)
    • पोटैशियम कार्बोहाइड्रेट्स के स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा यह आयरन वाहक के रूप में कार्य करता है।
    • पोटैशियम पौधे में रोग तथा हानिकारक दशाओं से बचने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। पोटैशियम नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की उपस्थिति में बीज के देरी या शीघ्रता से पकने के स्वभाव को सन्तुलित करता है।
    • यह वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि को रोकने में मदद करता है। पोटैशियम कोशिका विभाजन एवं निर्माण में सहायता करता है।
    • पोटेशियम के प्रभाव से धान्य एवं घास वाली फसलों के तने, भूसा एवं डण्ठल, प्रबल एवं कठोर बनते हैं, जिससे फसलों का गिरने का खतरा नहीं होता है।

  7. कैल्शियम (Calcium)
    • कैल्शियम पौधों के लिए अत्यन्त आवश्यक है।
    • यह पौधों को कोशिकाओं की दीवारों के निर्माण में आवश्यक है। कैल्शियम पौधों के मूलरोगों के विकास में सहायक है, जिससे पौधों की पोषण ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
    • कैल्शियम कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण में सहायक है तथा पौधों की मेटाबोलिज्म में स्वतन्त्र हुए कार्बनिक अम्लों को उदासीन करता है।
    • कैल्शियम फलीदार पौधों में पर्याप्त मात्रा में मिलती है और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता देते है।

  8. मैग्नीशियम (Magnisium)
    • मैग्नीशियम क्लोरोफिल का मुख्य अवयव है जिसके बिना कोई पौधा हरा नहीं रह सकता और पौधों के भाग पीलेपड़ जाते हैं।
    • मैग्नीशियम फॉस्फोरस को ग्रहण करने तथा इसके स्थानान्तरण में सहायक होता है तथा वसीय अम्लों तथा तेलों के संश्लेषण में भी आवश्यक है।
    • मैग्नीशियम वायु से CO2 लेकर पत्तियों द्वारा शर्करा निर्माण में सहायक होता है।

  9. सल्फर (Sulphur)
    • सल्फर क्लोरोफिल के निर्माण में भी आवश्यक है।
    • यह प्रोटीन का एक मुख्य भाग होने के कारण अत्यंत आवश्यक है सल्फर (गन्धक) के ऑक्सीकरण से सल्फ्यूरिक अम्ल बनता है।
    • इसके उपयोग से मृदा क्षारीयता दूर की जा सकती है।
    • सल्फर पौधों में सुगन्धित तेलों के निर्माण में सहायक है।
    • इसकी कमी से अनेकों रोग उत्पन्न हो जाते हैं सल्फर से एल्फा-एल्फा की जड़ों में ग्रंथियों का विकास अधिक होता है।

  10. आयरन (Iron)
    • यह भी क्लोरोफिल निर्माण में आवश्यक तत्व है, लेकिन फ्लोरोफिल का अंग नहीं है।
    • पादपों में होने वाले ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • आयरन पौधों द्वारा नाइट्रोजन के पोषण और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करता है।
    • कोशिका विभाजन में भी सहायक होता है।

  11. मैगजीन (Magnese)
    • मैगनीजकी मात्रा जलाक्रान्त व अम्लीय मृदाओं में उगने वाले पौधों में अपेक्षाकृत अधिक होती है।
    • मैगनीज पर्णहरिम निर्माण में सहायक होता है।
    • पौधों में नाइट्रोजन कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म तथा क्रेब चक्र की क्रियाओं में आवश्यक है।
    • यह ऑक्सीकरण-अवकरण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • नाइट्रेट के स्वांगीकरण में सहायक होता है।

  12. जिंक (Zinc)
    • जिंक क्लोरोफिल निर्माण में एकउत्प्रेरक का कार्य करता है।
    • प्रोटीन, केरोटिन तथा सिट्रिक के संश्लेषण में सहायक होता है।
    • जिंक कार्बोहाइड्रेट के रूपान्तरण में आवश्यक होता है तथा मृदा में जलशोषण को बढ़ाता है।

  13. कॉपर (Copper)
    • यह अप्रत्यक्ष रूप से क्लोरोफिल निर्माण तथा आयरन के उपयोग में सहायक होता है।
    • इससे श्वसन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
    • यह क्लोरोफिल के विनाश को रोकता है।
    • कॉपर पौधों में एसीनो अम्ल के साथ मिलकर अनेक एमिनोयौगिक और प्रोटीन बनाता है।
    • प्रोटीन मेटाबोलिज्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • कॉपर पौधों में इन्डोल एसीटिक अम्ल के संश्लेषण में सहायक होता है।

  14. बोरोन (Boron)
    • बोरोन पराग (Pollan) एवं प्रजनन क्रियाओं में सहायक होता है।
    • बोरोन कार्बोहाइड्रेट के स्थानान्तरण एवं प्रोटीन तथा पानी के उपापचयन में सहायक है।
    • बोरोन कोशिका विभाजन व कॉर्टेक्स के विकास के लिए आवश्यक है।
    • बोरोन पोटेशियम व कैल्शियम अनुपात को नियन्त्रित करता है।
    • पौधों में पानी के शोषण को नियन्त्रित करता है।
    • बोरोन ATP, DNA, RNA एवं पेक्टिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
    • यह पौधों में फल,फूल व बीज बनने को भी प्रभावित करते हैं।

  15. मॉलिब्डेनम (Molybdenum)
    • मॉलिब्डेनम (Molybdenum) एजोटोबैक्टर एवंराइजोबियम बैक्टीरिया द्वारा मुक्त नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिए आवश्यक है।
    • यह इट्रेट रिडक्टेज एन्जाइम का महत्त्वपूर्ण भाग है।

  16. क्लोरीन (Cblorin)
    • क्लोरीनवर्णक रंगीन(एन्थोसायनिन) का संघटक पदार्थ होता है तथा यह रसाकर्षण दाब को बढ़ाता है। क्लोरीन (कोशिका रस) cell sup में धनायन सन्तुलन बनाए रखता है।

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